ऋषिकेश के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल त्रिवेणी घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर गाड़ियों के अनियंत्रित दबाव और जगह-जगह खड़ी होने वाली गाड़ियों के कारण रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। त्रिवेणी घाट शहर का बेहद अहम केंद्र है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक, श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। हालांकि, घाट को जोड़ने वाली सड़क के संकरे होने और उस पर कार, ऑटो, ई-रिक्शा तथा दोपहिया वाहनों की भारी संख्या के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। व्यस्त समय में सड़क के दोनों किनारों पर खड़े वाहन और चलती गाड़ियों का रेला पैदल यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
संकरे रास्तों पर गाड़ियों का भारी दबाव
त्रिवेणी घाट रोड पर सुबह के समय से ही वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाती है और दिन चढ़ने के साथ भीड़ लगातार बढ़ती जाती है। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों की गाड़ियां जब एक साथ इस सड़क पर उतरती हैं, तो यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। घाट की ओर जाने वाला यह मुख्य रास्ता कई जगहों पर काफी संकरा है। ऐसे में जब एक ही समय में कार, तीन-पहिया वाहन और बाइक आमने-सामने से गुजरते हैं, तो निकलने के लिए जगह बेहद कम पड़ जाती है।
समस्या उस समय और विकराल हो जाती है जब लोग अपने वाहनों को सड़क के किनारे ही खड़ा कर देते हैं। एक तरफ पार्किंग में खड़ी गाड़ियां जगह घेर लेती हैं और दूसरी तरफ से गुजरता यातायात रास्ते को और छोटा बना देता है। ऐसे में यदि सामने से कोई दूसरी गाड़ी आ जाए, तो तुरंत जाम लग जाता है। पीक आवर्स के दौरान लोगों को महज थोड़ी सी दूरी तय करने में भी काफी ज्यादा समय गंवाना पड़ता है।
गंगा आरती के समय बढ़ती है पैदल यात्रियों की आफत
त्रिवेणी घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली भव्य गंगा आरती, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए शाम के समय भारी भीड़ उमड़ती है। शाम ढलते ही घाट की तरफ जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या के साथ ही वाहनों का दबाव भी अचानक बढ़ जाता है। दूर-दराज से आने वाले अनेक श्रद्धालु अपनी गाड़ियों को सीधे घाट के निकट तक ले जाने का प्रयास करते हैं। पर्याप्त पार्किंग स्थल न होने के कारण लोग मजबूरी में या जल्दबाजी में सड़क किनारे ही वाहन पार्क कर देते हैं।
सड़क पर वाहनों के इस बेतरतीब जमावड़े से पैदल चलने वालों के लिए रास्ता लगभग बंद सा हो जाता है। बुजुर्ग श्रद्धालुओं, बच्चों और परिवारों के साथ आने वाले लोगों को सड़क पार करने और घाट तक पहुंचने में बेहद सतर्क रहना पड़ता है। पवित्र वातावरण का अनुभव करने आए पर्यटकों के लिए गाड़ियों का शोर, धुआं और हादसों का डर एक मानसिक तनाव पैदा करता है।
दुकानदारों के व्यापार पर असर और स्थानीय अनुभव
त्रिवेणी घाट रोड पर कई वर्षों से व्यापार कर रहे स्थानीय दुकानदार इस बदलती स्थिति से काफी चिंतित हैं। इस मार्ग पर लंबे समय से दुकान चला रहे व्यापारी शिव कुमार का कहना है कि उन्होंने सालों में यहां का माहौल पूरी तरह बदलते देखा है। पहले इस सड़क पर वाहनों की इतनी अधिक संख्या नहीं होती थी और श्रद्धालु व ग्राहक बेहद आराम से आवाजाही कर लेते थे। परंतु अब स्थिति यह हो चुकी है कि दिनभर सड़क पर गाड़ियों की कतार लगी रहती है।
शिव कुमार के अनुसार, ऑटो और कार चालक जहां भी थोड़ी सी जगह देखते हैं, वहीं अपनी गाड़ियां रोक देते हैं। इसके कारण दुकानों के ठीक सामने गाड़ियां खड़ी हो जाती हैं, जिससे ग्राहकों का दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि सुबह और शाम के समय समस्या सबसे अधिक गंभीर रूप ले लेती है। कई बार वाहन चालक जल्दी निकलने के चक्कर में गलत दिशा से गाड़ी निकालने लगते हैं। इससे सामने से आ रही गाड़ियों का रास्ता रुक जाता है और पूरा ट्रैफिक ठहर जाता है।
सुव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक प्रबंधन की मांग
त्रिवेणी घाट रोड की इस पुरानी समस्या को देखते हुए स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों ने प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है। लोगों का मानना है कि जब तक घाट से कुछ दूरी पर गाड़ियों के लिए एक व्यवस्थित और विशाल पार्किंग स्थल का निर्माण नहीं किया जाता, तब तक सड़क किनारे अवैध पार्किंग की समस्या खत्म नहीं होगी। इसके अलावा ई-रिक्शा और ऑटो के संचालन को भी निश्चित नियमों के तहत व्यवस्थित करने की आवश्यकता है।
स्थानीय व्यापारी शिव कुमार और अन्य निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन यहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाए, पिक-अप व ड्रॉप-ऑफ प्वाइंट तय करे और पार्किंग की उचित व्यवस्था करे, तो इस समस्या से बड़ी राहत मिल सकती है। इससे न केवल पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों का रोजगार भी सुचारू रूप से चल सकेगा।





















