जयपुर में 6 फीट के कियोस्क से चल रहा प्री-स्कूल, राजस्थान में आंगनबाड़ी केंद्रों का बुरा हालजीबीपी/एसयूडी 1.3600 के करीब स्थिर, 100-दिवसीय एसएमए के ऊपर तेजी का रुझान बरकरारयूरोपीय सेंट्रल बैंक के ब्याज दर रुख से यूरो को मिला सहारा, जैक्सन होल सम्मेलन में केविन वॉश के भाषण पर टिकी बाजार की निगाहेंकृषि विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति संशोधन कानून असंवैधानिक घोषित, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सुक्खू सरकार के नियम रद्द किएमानसून में बाहर निकलते सांपों का प्रजनन विज्ञान, पलामू के विशेषज्ञ डॉ. डीएस श्रीवास्तव ने समझाया वाइपर प्रजाति का अनोखा रहस्यरसोई के बजट को राहत: केंद्र ने दिल्ली-एनसीआर में ₹35 प्रति किलो प्याज की बिक्री शुरू की, नासिक से पहुंची 'कांदा एक्सप्रेस'नेपाल की भोटेकोशी नदी में तबाही का सच आया सामने, ग्लेशियर खिसकने और भूस्खलन से बना अस्थायी बांध टूटने के बाद आई थी भीषण बाढ़सिचुआन और मणिपुर में महसूस हुए भूकंप के झटके, चीन में 5.1 तो भारत में 3.6 मापी गई तीव्रतासुप्रीम कोर्ट से विदाई पर जस्टिस संजय करोल ने पटना के दिनों को किया याद, बोले- न्याय का मतलब सिर्फ कानून नहीं, इंसान को समझना हैमणिपुर के कांगपोकपी में घात लगाकर हमले के बाद सुरक्षा बलों ने चार लियांगमई नागा नागरिकों के शव बरामद किए
राजस्थान के टोंक में तेज आंधी से भारी नुकसान, 150 बीघा बाजरे की बोआई नष्ट होने के बाद प्रशासनिक मदद की गुहारराजस्थान
28 अग॰ 2026, 10:49 am (1 घंटे पहले)· 2

राजस्थान के टोंक में तेज आंधी से भारी नुकसान, 150 बीघा बाजरे की बोआई नष्ट होने के बाद प्रशासनिक मदद की गुहार

टोंक जिले के देवगंज गांव में दो दिन पूर्व आए तूफान और वर्षा से 150 बीघा में बोया बाजरा पूरी तरह बिछ गया। पीड़ित किसानों ने पशुचारे का संकट जताते हुए जिलाधिकारी और तहसीलदार से तुरंत गिरदावरी कराने की अपील की है।

राजस्थान के टोंक जिले में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। मंडावर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले देवगंज गांव में दो दिन पहले आई तेज मूसलाधार बारिश और भयंकर बवंडर से व्यापक तबाही देखने को मिली है। खेतों में पककर तैयार खड़ी बाजरे की फसल आंधी की चपेट में आकर लगभग 150 बीघा क्षेत्र में पूरी तरह बिछ गई है। महीनों की हाड़तोड़ मेहनत और भारी पूंजी लगाने के बाद ऐन कटाई के समय कुदरत के इस कहर ने देवगंज के कृषक परिवारों के सामने गहरा वित्तीय संकट पैदा कर दिया है। हवा और पानी के थपेड़ों से गिरी हुई फसल में दाना खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे गांव के किसान बेहद परेशान हैं।

फसल की तबाही और गहराता आर्थिक संकट

देवगंज गांव के काश्तकारों का कहना है कि उन्होंने बाजरे की खेती के लिए बीते कई महीनों से दिन-रात पसीना बहाया था। बीज, खाद, सिंचाई और खेतों की जुताई में काफी लागत लगाई गई थी। फसल खेतों में पूरी तरह लहरा रही थी और किसान बेहतर पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, दो दिन पहले आए अप्रत्याशित तूफान ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवाओं के कारण बाजरे के पौधे जड़ों से उखड़कर या बीच से टूटकर जमीन पर समा गए हैं। यदि प्रभावित खेतों को समय रहते संभाला नहीं गया और मौसम यूं ही बना रहा, तो पौधों में लगे दाने की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होगी और कुल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।

ये भी पढ़ें

पशुधन पर मंडराया संकट और चारे की किल्लत

इस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव सिर्फ खाद्यान्न उत्पादन और किसानों की आय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का दूसरा मुख्य आधार भी डगमगा गया है। पश्चिमी और मध्य राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बाजरे का पौधा केवल अनाज देने का जरिया नहीं होता, बल्कि इसके सूखे तने (कड़बी) पशुओं के मुख्य भोजन और चारे के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। तूफान के कारण फसल के जमीन पर गिर जाने और पानी में भीगने से चारा सड़ने की आशंका बन गई है। देवगंज के निवासियों का कहना है कि अगर चारा समय पर नहीं सुखाया जा सका या खराब हो गया, तो मवेशियों का पेट भरना दूभर हो जाएगा। पशुपालन से जुड़े परिवारों के सामने आने वाले दिनों में सूखे चारे का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

गिरदावरी और मुआवजे के लिए प्रशासन से गुहार

खेतों में हुए नुकसान के बाद देवगंज के कृषकों ने राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन से तत्काल राहत की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासनिक टीम और राजस्व कर्मियों को बिना किसी देरी के मौके पर भेजकर प्रभावित 150 बीघा रकबे का मौका मुआयना कराया जाए। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा समय पर गिरदावरी नहीं कराई गई, तो खेतों में हुए वास्तविक खराबे का सही आकलन करना असंभव हो जाएगा। इस संबंध में ग्रामीणों ने टोंक के कलेक्टर और क्षेत्रीय तहसीलदार को ज्ञापन देकर मांग की है कि नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए क्षतिग्रस्‍त फसलों की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार की जाए और पीड़ित काश्तकारों को सरकारी नियमानुसार उचित वित्तीय मुआवजा प्रदान किया जाए।

सवाल-जवाब

टोंक जिले के किस गांव में बाजरे की फसल को नुकसान पहुंचा है?
टोंक जिले की मंडावर ग्राम पंचायत के देवगंज गांव में तेज बारिश और तूफान से बाजरे की फसल को नुकसान हुआ है।
देवगंज गांव में कितने बीघा में बोई गई फसल प्रभावित हुई है?
मौसम की मार से देवगंज गांव में लगभग 150 बीघा जमीन में खड़ी बाजरे की फसल प्रभावित हुई है।
फसल खराब होने से किसानों के सामने कौन सी दो मुख्य चिंताएं हैं?
किसानों को वित्तीय घाटे के साथ-साथ आने वाले समय में पशुओं के लिए सूखे चारे की भारी किल्लत सता रही है।
ग्रामीणों ने किन अधिकारियों से गिरदावरी कराने की मांग की है?
ग्रामीणों और किसानों ने जिला कलेक्टर और तहसीलदार से जल्द से जल्द खेतों की गिरदावरी कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR