असम के तिंगखोंग के अंतर्गत आने वाले नंबर 1 नाचणी जोकाई गांव में एक बड़ा मादा तेंदुआ आखिरकार पिंजरे में कैद कर लिया गया है। शनिवार को हुई इस कार्रवाई से स्थानीय निवासियों ने कुछ समय के लिए चैन की सांस ली है, जो पिछले करीब अठारह महीनों से लगातार तेंदुओं के हमलों के खौफ के साए में जीवन बिता रहे थे। इस बड़ी सफलता के बाद वन विभाग ने वन्यजीव को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया पूरी की है।
महीनों से जारी था मवेशियों का शिकार
गांव के लोगों के अनुसार, इस इलाके में पिछले डेढ़ साल से लगातार तेंदुओं की आवाजाही की खबरें सामने आ रही थीं। इस लंबी अवधि के दौरान कई पालतू जानवर जैसे कि गाय और बकरियां इन जंगली जानवरों का शिकार बन चुके थे। इन लगातार हो रही घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता को बहुत बढ़ा दिया था। ग्रामीणों के मन में इस बात का लगातार डर बना हुआ था कि कहीं ये आक्रामक जानवर इंसानों को भी अपना निशाना न बना लें, जिससे पूरे क्षेत्र में अनहोनी की आशंका गहरा गई थी।
युवाओं की पहल से मिली तुरंत कामयाबी
जब हालात में कोई सुधार नहीं हुआ और खतरे का साया लगातार मंडराता रहा, तब स्थानीय युवाओं ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया। शनिवार की दोपहर को गांव के कुछ रणनीतिक स्थानों पर युवाओं ने एक पिंजरा लगाया ताकि उस जानवर को पकड़ा जा सके जो इन सभी हमलों के पीछे मुख्य रूप से जिम्मेदार था। उनकी यह कोशिश बहुत जल्द कामयाब भी हो गई। पिंजरा लगाए जाने के महज तीस मिनट के भीतर ही एक भारी-भरकम मादा तेंदुआ उसके अंदर चली गई और सफलतापूर्वक फंस गई।
वन विभाग ने संभाला जिम्मा और आगे की मांग
तेंदुए के पिंजरे में फंसने की खबर मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तुरंत उस जंगली जानवर को अपने संरक्षण में ले लिया और उसे किसी घने जंगले क्षेत्र में छोड़ने के वास्ते जरूरी इंतजाम किए। हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। लोगों का दावा है कि इस मादा तेंदुए के पकड़े जाने के तुरंत बाद भी गांव के दूसरे छोर पर कम से कम तीन अन्य तेंदुओं की गुर्राहट सुनाई दी, जिससे वहां के निवासियों में डर बरकरार है।
और पिंजरे लगाने की उठी जोरदार मांग
गांव में तेंदुओं की लगातार मौजूदगी से चिंतित लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों से कड़े एहतियाती कदम उठाने की पुरजोर अपील की है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से यह मांग रखी है कि विभाग द्वारा गांव के मध्य भाग और सुदूर छोरों पर कम से कम तीन और पिंजरे लगाए जाएं। उनका मानना है कि इन अतिरिक्त पिंजरे की मदद से बाकी बचे हुए तेंदुओं को भी जल्द पकड़ लिया जाएगा, जिससे पालतू मवेशियों की जान बचाई जा सकेगी और आसपास रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।


















