कम लागत में खुद का काम शुरू करने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए खेती का क्षेत्र बड़े अवसर लेकर आता है। अक्सर लोग भारी भरकम पूंजी और बड़े पैमाने पर शुरुआती खर्च के डर से अपना कारोबार शुरू करने से कतराते हैं, जिसकी वजह से उन्हें आजीविका की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। हालांकि कृषि क्षेत्र में कई ऐसे काम मौजूद हैं जिन्हें बहुत कम जगह और बेहद सीमित बजट के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है। ऐसा ही एक बेहतरीन और मुनाफे वाला विकल्प मशरूम की खेती है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों के युवाओं के लिए आय का एक मजबूत जरिया बन रहा है।
इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी बड़े खेत या विशाल जमीन के टुकड़े की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। थोड़ी सी जानकारी और सही तकनीक का इस्तेमाल करके कोई भी युवा या युवती अपने घर के आसपास ही छोटे स्तर पर इसका उत्पादन शुरू कर सकता है। जैसे-जैसे साल का आखिरी दौर नजदीक आ रहा है और सर्दियों का मौसम दस्तक दे रहा है, यह समय मशरूम की पैदावार बढ़ाने के लिहाज से सबसे अनुकूल और उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम का तापमान मशरूम के विकास के लिए एकदम सही रहता है जिससे बंपर पैदावार मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कश्यप के अनुसार अक्टूबर महीने से ही मशरूम उत्पादन की तैयारियां जोरों पर शुरू की जा सकती हैं। सर्दियों के इस खास मौसम में मुख्य तौर पर बटन मशरूम और ओयस्टर मशरूम की खेती करना सबसे फायदेमंद साबित होता है। बाजार में इन दोनों ही किस्मों की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों और युवाओं को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। उत्पादन के बाद इसे सीधे स्थानीय बाजारों में आसानी से खपाया जा सकता है, जिससे शुरुआती दौर में ही अच्छी खासी कमाई होना शुरू हो जाती है।
पारंपरिक खेती के उलट मशरूम उगाने के लिए एकड़ो जमीन की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। इसे घर के एक छोटे से कमरे, छप्पर या शेड के भीतर भी बहुत कम संसाधन जुटाकर उगाया जा सकता है। यदि पूरी उत्पादन प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीकों और सही दिशा-निर्देशों के साथ अपनाया जाए, तो यह बेहद कम पूंजी में शुरू होने वाला एक शानदार स्वरोजगार बन सकता है। इसके अलावा उत्पादकों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबी दूरियों का सफर तय नहीं करना पड़ता, क्योंकि स्थानीय स्तर पर ही खरीदार मिल जाते हैं।
मशरूम उत्पादन को केवल ताजा फसल बेचने तक ही सीमित रखना जरूरी नहीं है। कई बार ऐसा वक्त भी आता है जब बाजार में ताजा मशरूम की मांग कम हो जाती है या फिर बंपर पैदावार की वजह से माल अधिक मात्रा में बच जाता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए किसान और युवा इससे जुड़े वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर सकते हैं जो लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। मशरूम से स्वादिष्ट नमकीन, क्रिस्पी बिस्कुट और मसालेदार भुजिया जैसे कई प्रकार के खाद्य उत्पाद बनाकर सीधे बाजार में बेचे जा सकते हैं।
इस तरह के मूल्य संवर्धन से न केवल उत्पाद की शेल्फ लाइफ यानी इस्तेमाल करने की अवधि काफी बढ़ जाती है, बल्कि बाजार में उसकी कीमत भी कई गुना अधिक मिलती है। प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के इस पूरे कॉन्सेप्ट को जोड़कर युवा भाई-बहन अपने लिए रोजगार का एक नया और अनूठा रास्ता तैयार कर सकते हैं, जिससे मंदी के दौर में भी मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ता है।
हालांकि किसी भी नए कारोबार में उतरने से पहले उसकी तकनीकी बारीकियों को समझना सबसे पहली शर्त होती है। मशरूम की खेती में भी तापमान का संतुलन, नमी की मात्रा, साफ-सफाई, बीज की गुणवत्ता और पैदावार की सही विधि की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। इन अहम बातों को जाने बिना यदि कोई काम शुरू करता है, तो उसे नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की तरफ से स्थानीय युवाओं और किसानों को मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रांगण में पूरी तरह से ऑफलाइन और निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, जहां विशेषज्ञों द्वारा मशरूम उगाने से जुड़ी हर बारीक से बारीक जानकारी और तकनीक सिखाई जाती है। इस ट्रेनिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी खास मौसम या नियत तारीख का इंतजार करने की कोई बाध्यता नहीं है। जो भी इच्छुक युवा या किसान मशरूम की खेती में हाथ आजमाना चाहते हैं, वे साल में किसी भी दिन कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं और प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के लिए मशरूम का यह व्यवसाय एक बेहद असरदार और व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है। खास तौर पर आने वाली सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए अक्टूबर महीने से ही इसकी रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। बहरहाल, खेत या शेड में उतरने से पहले केंद्र से ट्रेनिंग लेकर पूरी तकनीक को अच्छी तरह समझ लेना बुद्धिमानी होगी, ताकि कम लागत में शुरू किया गया यह छोटा सा कदम आगे चलकर एक स्थायी और नियमित आमदनी का बड़ा जरिया बन सके।


















