उत्तराखंड में सामाजिक और पारिवारिक मुश्किलों से जूझ रही बेसहारा मुस्लिम महिलाओं के स्थायी पुनर्वास के लिए एक नई पहल की जा रही है। इसके तहत तीन तलाक और निकाह हलाला की पीड़ा झेलने वाली महिलाओं के साथ-साथ बेसहारा विधवाओं को रहने के लिए बिना किसी शुल्क के आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन महिलाओं को सुरक्षित ठिकाना देना है, जिनके पास छत नहीं है और जो गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं।
कल्याणकारी संपत्तियों का सीधा लाभ
वक्फ प्रबंधन के अनुसार, संस्था के पास मौजूद संपत्तियों और उनके माध्यम से जुटाए जाने वाले संसाधनों का असली अधिकार उन्हीं जरूरतमंद वर्गों का है, जिनके कल्याण को ध्यान में रखकर वक्फ का गठन किया गया था। इस व्यवस्था का लाभ समाज की उन महिलाओं तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाना जरूरी है, जो सामाजिक तिरस्कार या पारिवारिक बिखराव के बाद जीवन यापन के बुनियादी संकट से जूझ रही हैं। बेसहारा बेटियों और बहनों को उनका सामाजिक अधिकार दिलाना इस पूरी कवायद का मुख्य आधार है।
जमीनों से अतिक्रमण हटाने का अभियान
राज्य के प्रत्येक जिले में वक्फ बोर्ड के पास हजारों बीघा जमीन दर्ज है, जिसका प्रभावी उपयोग इन आवासों के निर्माण में किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने स्पष्ट किया है कि कई स्थानों पर संपत्तियों पर अनधिकृत कब्जे बने हुए हैं, जिन्हें कठोर प्रशासनिक कदमों के जरिए पूरी तरह खाली कराया जाएगा। अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीनों और उन पर पहले से बने भवनों को विधिवत रूप से इन पीड़ित महिलाओं के आवास के लिए सुरक्षित किया जाएगा।
सामाजिक उपेक्षा के बीच नया संबल
वैवाहिक विवादों के दौरान कई बार तीन तलाक दिए जाने के बाद पुरुष दूसरा विवाह कर लेते हैं, जिससे पहली पत्नी को गंभीर संकट और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं के पास न तो आर्थिक सहारा बचता है और न ही सिर छिपाने के लिए कोई सुरक्षित जगह होती है। शादाब शम्स के मुताबिक, दर-दर भटकने को मजबूर इन बहनों और बेटियों को सुरक्षित छत मिलने से उनके आत्मसम्मान को बल मिलेगा और वे अपने जीवन को नए सिरे से संवार सकेंगी।



















