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असली दूध और वनस्पति तेल वाले पनीर की पहचान का संकट, एफएसएसएआई के नए प्रस्ताव से खुलेगी पोलव्यापार
26 सित॰ 2026, 12:54 pm (17 मिनट पहले)· 2

असली दूध और वनस्पति तेल वाले पनीर की पहचान का संकट, एफएसएसएआई के नए प्रस्ताव से खुलेगी पोल

बाज़ार में बिकने वाले असली और वनस्पति तेल से बने एनालॉग पनीर के अंतर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस पर लगाम कसने के लिए एफएसएसएआई ने एक नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है।

सौ बात की एक बात यह है कि आने वाले समय में पनीर केवल उसी खाद्य पदार्थ को कहा जा सकेगा जो पूरी तरह से दूध से तैयार किया गया हो। इस तरह के नए नियम अब देश में लागू होने की प्रक्रिया में हैं। आम जनता इस बात को जानकर हैरान है कि क्या अब तक बाजारों में बिकने वाला पनीर दूध से नहीं बनता था। हकीकत यही है कि असली दूध से बने पनीर के साथ-साथ पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों से तैयार पनीर भी धड़ल्ले से बेचा जा रहा है और उसे भी पनीर ही कहा जाता है। हालांकि नियमों के अनुसार इसे एनालॉग पनीर कहा जाता है, लेकिन इसके नाम में पनीर शब्द जुड़ा होने के कारण खरीदार भ्रमित हो जाते हैं। अब खाद्य नियामक संस्था एफएसएसएआई ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसका मतलब है कि अभी कानून नहीं बना है बल्कि एक प्रस्ताव लाया गया है जिस पर अगले 60 दिनों तक यानी दो महीनों के भीतर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।

नाम और मार्केटिंग पर लगाम कसने की तैयारी

इस नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो उत्पाद दूध से नहीं बना है, उसे पनीर के रूप में न तो बनाया जाए, न बेचा जाए, न ही उसके पैकेट पर यह नाम लिखा जाए और न ही मार्केटिंग में पनीर शब्द का इस्तेमाल किया जाए। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि अब तक ऐसा करने की अनुमति थी। कंपनियों को बाकायदा एनालॉग इन डेयरी कॉन्टेक्स्ट नाम से लाइसेंस मिलते थे, जिसके तहत पाम ऑयल जैसी सामग्रियों से पनीर जैसा दिखने वाला पदार्थ तैयार करके उसे इसी नाम से बेचा जाता था। एनालॉग शब्द का मतलब नकली नहीं होता है, और यह कोई जहरीला या मिलावटी पदार्थ भी नहीं होता, बल्कि इसका अर्थ है कि वह चीज पनीर जैसी दिखती है। साधारण पनीर को दूध गर्म करके नींबू, सिरका या सिट्रिक एसिड डालकर फाड़ा जाता है और फिर उसका पानी निकालकर दबा दिया जाता है जिससे पनीर तैयार हो जाता है। इसके विपरीत, एनालॉग पनीर वनस्पति तेलों से बनता है, जिसमें आजकल मुख्य रूप से पाम ऑयल का उपयोग किया जाता है। यह देखने में बिल्कुल पनीर जैसा लगता है, पकाने पर टूटता नहीं है, सफेद रंग का रहता है और सबसे बड़ी बात यह है कि लंबे समय तक खराब नहीं होता है। कई बार इसमें थोड़ा सा मिल्क पाउडर भी मिला दिया जाता है ताकि हल्की सी दूध जैसी महक भी आ जाए। परिणामस्वरूप, आंखों को वह पनीर जैसा दिखता है, हाथ में लेने पर वैसा ही महसूस होता है और कड़ाही में भी पनीर जैसा ही रहता है, लेकिन उसमें एक बूंद भी दूध नहीं होता है।

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असली और एनालॉग पनीर की कीमतों में भारी अंतर

असली पनीर और एनालॉग पनीर की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर होता है। असली पनीर आमतौर पर 350 से 450 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिकता है, जबकि एनालॉग पनीर बाजार में 150 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर मिल जाता है। इस सस्ते विकल्प का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होटलों, रेस्तरां, ढाबों, खाने-पीने की दुकानों, शादियों के खानपान और केटरिंग में धड़ल्ले से किया जा रहा है। यह तकनीकी रूप से मिलावटी या जहरीला तो नहीं है, लेकिन यह पनीर भी नहीं है। कोई भी ग्राहक को यह नहीं बताता कि उसने खाने में असली पनीर के बजाय एनालॉग पनीर का इस्तेमाल किया है। इसका मतलब यह है कि यह अवैध नहीं है, बशर्ते इसका नाम साफ-साफ बताया जाए, लेकिन इससे ग्राहकों को भारी नुकसान और धोखे का सामना करना पड़ता है। कई राज्यों ने इस स्थिति को देखते हुए इस पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया था। दूसरी ओर, कंपनियों ने भी यह सवाल उठाना शुरू कर दिया था कि अगर इसे बैन ही करना है तो फिर इसके निर्माण का लाइसेंस क्यों जारी किया जा रहा है। अब एफएसएसएआई ने प्रस्ताव दिया है कि आप इसका उत्पादन कर सकते हैं, लेकिन इसके नाम में पनीर शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। कानूनी भाषा में नकली और एनालॉग दोनों अलग चीजें हैं। नकली या मिलावटी उत्पाद वह होता है जिसमें असली पनीर में कोई चीज छिपाकर मिलाई जाए, कोई नुकसानदायक पदार्थ डाला जाए, या फिर उसे पनीर कहकर बेचा जाए जो तय मानकों पर खरा न उतरता हो।

बाजार में अन्य उत्पादों के नियम और भ्रम

एनालॉग उत्पादों की एक पूरी अलग श्रेणी होती है, जहां दूध की जगह अन्य सामग्रियों का उपयोग करके उसे किसी उत्पाद जैसी शक्ल दी जाती है। दुनिया भर में कई तरह के एनालॉग उत्पाद बनाए जाते हैं, जैसे एनालॉग चीज, एनालॉग क्रीम और एनालॉग आइसक्रीम। हमारे देश में भी ऐसी कई आइसक्रीम बिकती हैं जो दूध से नहीं बनती हैं बल्कि पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों से तैयार की जाती हैं। यही वजह है कि अमूल जैसी बड़ी कंपनियों को अपने पैकेट पर विशेष रूप से यह लिखना पड़ता है कि उनकी आइसक्रीम पूरी तरह से दूध से बनी हुई है। नियमों के जरिए फैले इस भ्रम की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनियों को यह स्पष्ट करना पड़ रहा है कि उनका उत्पाद वाकई दूध से बना है, क्योंकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि आम लोगों को यह पता ही नहीं है कि बाकी बिकने वाली चीजें दूध से नहीं बनी हैं। आम उपभोक्ता तो हर ठंडी चीज को आइसक्रीम ही समझता है। अगर पैकेट पर बहुत ध्यान से देखा जाए तो उस पर फ्रोजन डेजर्ट लिखा होता है, और ग्राहक अपने हिसाब से यह अनुमान लगाते रहते हैं कि यह दूध से नहीं बल्कि पाम ऑयल से बनी है, क्योंकि नियम इसी तरह से बनाए गए हैं।

मक्खन और पनीर के नियमों में अंतर

बाजार में एनालॉग बटर भी उपलब्ध है, लेकिन उसे मक्खन नहीं कहा जाता है, बल्कि उसका नाम मार्जरीन रखा गया है। इसका नाम पूरी तरह अलग होने की वजह से कोई भी व्यक्ति भ्रमित नहीं होता है। यदि पैकेट पर मार्जरीन लिखा होगा तो कोई भी उसे गलती से मक्खन समझकर नहीं खरीदेगा, और यही कारण है कि भारत में मार्जरीन की बिक्री बहुत ज्यादा नहीं होती है। लेकिन यदि किसी उत्पाद पर एनालॉग पनीर लिखा होगा, तो नाम में पनीर शब्द आते ही लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं। यदि रेस्तरां वाले उसी उत्पाद से पनीर की कोई डिश तैयार कर दें, तो कोई भी ग्राहक कैसे यह समझ पाएगा कि वह असली पनीर नहीं है। सवाल यह उठता है कि मार्जरीन को एनालॉग बटर क्यों नहीं कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मार्जरीन का दुनिया भर में अपना एक अलग नाम है। मार्जरीन मार्जरीन है और बटर अपनी जगह बटर है। जो वस्तु मक्खन नहीं है, उसे दूसरे देशों में मक्खन के नाम से बेचने की अनुमति ही नहीं दी जाती है। पनीर का यह पूरा मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा है, क्योंकि बाकी दुनिया में पनीर का सेवन उस तरह से नहीं किया जाता है। एनालॉग बटर का अलग नाम मार्जरीन रख दिया गया, लेकिन एनालॉग पनीर का कोई दूसरा अलग नाम किसी ने नहीं रखा। यही वजह है कि यह लगातार एनालॉग पनीर के नाम से बिकता आ रहा है और लोग लगातार भ्रम में पड़ रहे हैं। खुद एफएसएसएआई ने जब एनालॉग इन डेयरी कॉन्टेक्स्ट के नाम से एक अलग श्रेणी बना रखी है, तो फिर कंपनियां यह क्यों बताने लगीं कि उनके इस पनीर में दूध का नामोनिशान ही नहीं है। रेस्तरां और ढाबे वाले भी इस बात का खुलासा क्यों करेंगे। पैकेट पर बहुत छोटे अक्षरों में एनालॉग लिखा रहता है, दुकान वाला भी उसे पनीर ही बताता है और रेस्तरां के मेनू कार्ड पर भी पनीर ही लिखा होता है, इसलिए आम जनता यही समझती है कि वह शुद्ध पनीर है और दूध से ही बना है। अब जाकर इन नियमों में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, खासकर तब जब कई जगहों पर छापे मारे गए और होटलों व रेस्तरां के लाइसेंस रद्द किए गए।

सवाल-जवाब

एफएसएसएआई ने हाल ही में किस संबंध में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है?
एफएसएसएआई ने दूध से न बनने वाले पनीर जैसे उत्पादों के नाम में पनीर शब्द के इस्तेमाल को रोकने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
एनालॉग पनीर मुख्य रूप से किस चीज से बनाया जाता है?
एनालॉग पनीर मुख्य रूप से वनस्पति तेलों विशेषकर पाम ऑयल से तैयार किया जाता है।
असली पनीर और एनालॉग पनीर की कीमतों में कितना अंतर होता है?
असली पनीर आमतौर पर 350 से 450 रुपये प्रति किलो बिकता है जबकि एनालॉग पनीर 150 से 250 रुपये प्रति किलो मिल जाता है।
क्या एनालॉग पनीर सेहत के लिए जहरीला या मिलावटी होता है?
एनालॉग पनीर जहरीला या मिलावटी नहीं होता है, लेकिन इसमें दूध का इस्तेमाल नहीं होता है।
फीडबैक और आपत्तियों के लिए कितना समय दिया गया है?
एफएसएसएआई के इस प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 60 दिन यानी दो महीने का समय तय किया गया है।
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