ऋषिकेश में मौसम के मिजाज बदलते ही रिवर राफ्टिंग के कारोबार पर सीधा असर देखने को मिलने लगता है। कभी अचानक होने वाली बारिश तो कभी गंगा नदी के जलस्तर में होने वाली बढ़ोतरी के कारण अधिकारियों और संचालकों को राफ्टिंग गतिविधियों पर रोक लगानी पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में पर्यटकों को गंगा की लहरों पर रोमांचक सफर का मजा बीच में ही छोड़कर वापस लौटना पड़ सकता है, जबकि दूसरी तरफ स्थानीय कारोबारियों के सामने आजीविका और रोजगार को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। ऋषिकेश का पूरा राफ्टिंग उद्योग मुख्य रूप से अनुकूल मौसम पर टिका हुआ है। जब मौसम सुहाना और साफ रहता है, तब देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भारी भीड़ यहां उमड़ती है, लेकिन मौसम के बिगड़ते ही इस पर्यटन व्यवसाय की रफ्तार एकदम थम जाती है।
देशभर में मशहूर है ऋषिकेश की रिवर राफ्टिंग
उत्तराखंड का यह प्रमुख शहर संपूर्ण भारत में अपनी साहसिक रिवर राफ्टिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में सैलानी गंगा की तेज धाराओं और लहरों के बीच राफ्टिंग का रोमांचक अनुभव लेने के लिए खींचे चले आते हैं। बहुत से सैलानी तो विशेष तौर पर इसी अद्भुत जलक्रीड़ा का आनंद उठाने के लिए अपनी छुट्टियों का प्लान तैयार करते हैं। हालांकि, ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग का यह खेल केवल आने वाले पर्यटकों के मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां के स्थानीय निवासियों की आजीविका का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण जरिया भी है। इस व्यवसाय से जुड़े हजारों परिवारों का आर्थिक पहिया इसी पर्यटन गतिविधि के माध्यम से आगे बढ़ता है।
एजेंसी संचालकों और कर्मचारियों को हो रहा बड़ा आर्थिक घाटा
ऋषिकेश में राफ्टिंग एजेंसी का संचालन करने वाले ओम पाल सिंह ने बताया कि उनका पूरा व्यापार प्रत्यक्ष रूप से पर्यटन पर ही निर्भर करता है। इस बार मानसून और बरसात के शुरू होने के बाद से ही राफ्टिंग का कामकाज लगातार बाधित होता आ रहा है। हालात यह हैं कि कभी केवल दो दिन राफ्टिंग संचालित होती है और फिर से रोक लगानी पड़ जाती है। इसके परिणामस्वरुप उन्हें और उनके साथ काम करने वाले तमाम कर्मचारियों को भारी आर्थिक घाटे का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों, रिवर गाइड्स, हेल्पर्स और कार्यालय के अन्य दैनिक खर्चों का भुगतान लगातार करना पड़ रहा है, भले ही काम बिल्कुल न हो रहा हो। सामान्य दिनों में जहां सुबह से लेकर दोपहर तक राफ्टिंग के एक से दो फेरे आसानी से लग जाते थे, वहीं इस बार खराब मौसम और बारिश के कारण पूरा-पूरा दिन राफ्टिंग का काम पूरी तरह से ठप पड़ा रहता है।
बीस से पच्चीस दिन की देरी से शुरू हुआ इस बार का सीजन
शहर के आंद्रा आश्रम यानी गुरुद्वारे के पास ‘ब्लू आइसबर्ग एडवेंचर’ के बैनर तले रिवर राफ्टिंग एजेंसी चलाने वाले मनीष ने जानकारी दी कि इस बार पर्यटन सीजन और राफ्टिंग की शुरुआत निर्धारित समय से लगभग 20 से 25 दिन की देरी से हुई। सितंबर महीने की शुरुआत से ही लगातार खराब मौसम बने रहने और बारिश के बरसने के कारण राफ्टिंग गतिविधियों को बार-बार रोकना पड़ रहा है, जिससे उनके व्यापार को बहुत बड़ा झटका लगा है। हाल ही में ऋषिकेश एम्स के एक फेस्ट के आयोजन के सिलसिले में बड़ी संख्या में छात्र राफ्टिंग का लुत्फ उठाने आने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर खराब मौसम के कारण वे सभी बुकिंग्स पूरी तरह से रद्द करनी पड़ गईं। व्यापार में मंदी की इस मार के बावजूद ड्राइवरों, गाइडों और हेल्पर्स के वेतन के साथ-साथ कार्यालय के नियमित और अनिवार्य खर्चों का बोझ संचालकों को लगातार वहन करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह से साफ हो जाएगा ताकि सभी का कारोबार दोबारा पटरी पर लौट सके और बेहतर ढंग से चल सके।





















