जलवायु परिवर्तन और मानसूनी अनिश्चितता के बीच मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी अब जमीन पर सच साबित होती दिख रही है। दुनिया भर में तबाही मचाने वाले अल नीनो का असर अब भारत के कई राज्यों में साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है। इस प्राकृतिक चक्र की वजह से तापमान में भारी बढ़ोतरी, पीने के पानी की भारी किल्लत और अकाल जैसे गंभीर हालात पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। देश के कुछ हिस्सों में भले ही ठीकठाक बारिश दर्ज की गई हो, लेकिन महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में मानसून इस बार काफी कमजोर साबित हुआ है, जिससे स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है।
तेलंगाना में गहराता जल संकट
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य के मौजूदा हालातों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि जलाशयों में तेजी से गिरता हुआ जलस्तर और बिजली की बढ़ती मांग राज्य को एक अभूतपूर्व संकट की तरफ धकेल रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आने वाले 9 से 10 महीने राज्य के लिए बेहद कठिन साबित होने वाले हैं। पीने के पानी की उपलब्धता को सुरक्षित बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने किसानों से साफ तौर पर आग्रह किया है कि वे आगामी यासांगी यानी रबी की फसल की बुवाई के काम को फिलहाल टाल दें। इसके साथ ही आम नागरिकों से भी पानी का उपयोग अत्यधिक सावधानी और संयम के साथ करने की अपील की गई है।
मानसून में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश
कैबिनेट मंत्रियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सीएम रेवंत रेड्डी ने मीडिया को बताया कि राज्य के जल स्रोतों पर लगातार दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इस मानसूनी सीजन के दौरान राज्य में सामान्य बारिश के मुकाबले 23 प्रतिशत कम पानी गिरा है। इस बड़ी कमी के कारण जल भंडारों की स्थिति बहुत खराब हो गई है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता के लिए पेयजल, खेतों की सिंचाई और बेजुबान पशुओं के वास्ते चारे का इंतजाम करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। मुख्यमंत्री के आंकड़े बताते हैं कि कृष्णा बेसिन के जलाशयों में पिछले साल की तुलना में इस बार 72 प्रतिशत कम पानी बचा हुआ है।
जलाशयों में तेजी से घट रहा जल भंडार
राज्य के तमाम जलाशयों की मौजूदा स्थिति पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सामान्य वर्षों में इस समय तक लगभग 462 टीएमसी पानी आसानी से उपलब्ध रहता था। लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर महज 200 टीएमसी के आसपास ही सिमट कर रह गया है। सीएम रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस वक्त राज्य के किसी भी जलाशय में इतनी क्षमता नहीं बची है कि वह पेयजल और सिंचाई दोनों की जरूरतों को एक साथ पूरा कर सके। सरकार के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता राज्य के लगभग 24,000 गांवों तक पीने का साफ पानी पहुंचाने की है, जिसके लिए उपलब्ध पानी का वितरण बहुत ही सूझबूझ के साथ करना होगा.
खरीफ फसलों पर मंडराता खतरा
सरकारी कोशिशों के बावजूद वनाकालम यानी खरीफ सीजन की फसल के तहत करीब 10 लाख एकड़ जमीन पर फसलों को नुकसान पहुंचने का गहरा अंदेशा जताया गया है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मानसूनी फसलों की कटाई में अभी लगभग 20 दिन का वक्त और बाकी है। ऐसे में खेतों में खड़ी फसलों को किसी तरह बचाने के लिए राज्य सरकार इस समय खुले बाजार से भारी भरकम दरों पर बिजली खरीद रही है। किसानों से यह भी कहा गया है कि वे सिंचाई के लिए पानी का विवेकपूर्ण ढंग से इस्तेमाल करें, क्योंकि इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए पानी और चारे का प्रबंध करना भी उतना ही जरूरी है। ऐसा न होने पर मवेशियों की जान पर बड़ा खतरा बन आ सकता है।
बिजली की मांग में रिकॉर्ड उछाल
पानी के अलावा तेलंगाना में बिजली की खपत भी अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सामान्य तौर पर अक्टूबर के महीने में राज्य के अंदर बिजली की मांग करीब 15,000 मेगावाट के आसपास रहती थी, जो अब बढ़कर सीधे 20,003 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यानी सीधे तौर पर बिजली की खपत में लगभग 5,000 मेगावाट की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह कृषि के क्षेत्र में पानी खींचने वाले पंप सेटों का धड़ल्ले से लगातार चलना है। राज्य के भीतर इस समय लगभग 30 लाख कृषि पंप सेट संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही अक्टूबर के महीने में मार्च जैसी तेज गर्मी पड़ने की वजह से घरेलू घरों में भी बिजली का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है।
सरकार की नई कार्ययोजना और केंद्र से मदद की गुहार
इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत गांवों में टैंकों, झीलों और तालाबों की नए सिरे से मरम्मत कराने की कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है। इसके अलावा केंद्र सरकार से यह मांग की गई है कि जिन किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और जो किसान अगले सीजन में बुवाई नहीं कर पाएंगे, उन्हें उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क दशहरा के उत्सव के बाद एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन करेंगे, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को संकट की इस घड़ी से अवगत कराया जाएगा।
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जाएगा दिल्ली
सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक विशेष प्रतिनिधिमंडल राजधानी दिल्ली का दौरा करेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में सभी दलों के नेता शामिल होंगे जो केंद्रीय गृह मंत्री और अन्य प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करके राज्य के हालात पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि संकट की इस इस मुश्किल घड़ी में राज्य को हरसंभव प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग दिया जाए ताकि प्रदेश के लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।
वैश्विक स्तर पर अल नीनो का प्रभाव और कोविड से तुलना
ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणामों के चलते आज अल नीनो का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से भी पहले ही चेतावनी जारी की जा चुकी है कि अल नीनो की मार दुनिया भर के करीब 100 देशों के लोगों पर पड़ सकती है और लगभग 100 करोड़ आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसकी चपेट में आ सकती है। इस संकट की तुलना कोरोना महामारी जैसे भयानक दौर से करते हुए सीएम रेड्डी ने कहा कि इससे पार पाने के लिए हम सबको मिलकर एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने अपील की है कि राजनीतिक दलों, मीडिया संस्थानों और आम नागरिकों को संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर सरकार का साथ देना चाहिए ताकि इस आपदा में कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।
पानी बचाओ और बिजली बचाओ का मंत्र
जनता के बीच जागरूकता फैलाने के लिए सरकार की ओर से सांस्कृतिक मंडलियों के माध्यम से विशेष अभियान चलाए जाने की योजना है। इस जन-जागृति अभियान में सरकार केवल प्रशासनिक अमले पर निर्भर नहीं है, बल्कि मशहूर फिल्म अभिनेता विजय देवरकोंडा ने भी अल नीनो के इस गंभीर मुद्दे पर लोगों से अपील की है। इसके अलावा सरकार अन्य नामचीन फिल्मी कलाकारों, खेल जगत की मशहूर हस्तियों और जाने-माने कलाकारों का सहयोग लेने की भी पूरी तैयारी कर रही है। सरकार का सीधा और स्पष्ट संदेश है कि पानी बचाओ और बिजली बचाओ ही इस समय हमारा सबसे बड़ा मंत्र होना चाहिए।
























