मूलांक 1 राशिफल 16 अक्टूबर 2026: व्यक्तिगत और व्यावसायिक मोर्चे पर बढ़ेंगी जिम्मेदारियां, टीम के सहयोग से मिलेगी सफलतामाउंट आबू नगरपालिका कैसे बनी राजस्थान की सबसे अमीर स्थानीय संस्था, जानिए इसकी जबरदस्त कमाई के जरिएवर्ष 2026 में शनि की सीधी चाल: मेष, वृषभ समेत इन 4 राशियों के खुलेंगे किस्मत के द्वारपशुपालकों के लिए जरूरी सुझाव: गाय की घटती दूध क्षमता को इन तरीकों से सुधारेंबिहार में मछली पालन से कमाई का शानदार मौका, भागलपुर के विशेषज्ञों से जानें सही तरीकाप्रशासनिक फेरबदल में आईएएस इशिता राठी बनीं जम्मू की नई एडीसी, पति रवि सिहाग की पोस्टिंग से अब सिर्फ 140 किमी का फासलाप्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन में कामयाबी दिलाएंगी ये 4 आदतें, रांची के अनुभवी शिक्षाविद ने साझा किए सूत्रबैंक से लोन चुकाने के बाद भी आ रहा बकाया का मैसेज या नहीं मिल रही एनओसी, फरीदाबाद की वकील से जानें क्या है सही कानूनी रास्तामूलांक 2 राशिफल 16 अक्टूबर 2026: संवेदनशीलता पर रखें नियंत्रण, कार्य और आर्थिक स्थिति में बनाएं संतुलनकनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके का आरोप, दिल्ली पुलिस और आईबी रख रही हैं पहरा
माउंट आबू नगरपालिका कैसे बनी राजस्थान की सबसे अमीर स्थानीय संस्था, जानिए इसकी जबरदस्त कमाई के जरिएराजस्थान
16 अक्तू॰ 2026, 8:19 am (36 मिनट पहले)· 1

माउंट आबू नगरपालिका कैसे बनी राजस्थान की सबसे अमीर स्थानीय संस्था, जानिए इसकी जबरदस्त कमाई के जरिए

सिरोही जिले में स्थित प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की नगरपालिका सालाना 42 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखती है, जिसकी मुख्य वजह एंट्री टोल, नक्की झील का ठेका और पर्यटन व्यवसाय हैं।

सिरोही जिले में स्थित राजस्थान का इकलौता पर्वतीय पर्यटन केंद्र माउंट आबू न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां का स्थानीय निकाय भी अपनी वित्तीय संपन्नता के मामले में पूरे प्रदेश में शीर्ष पर गिना जाता है। महज 25 हजार के आसपास आबादी वाले इस छोटे से पहाड़ी शहर की नगरपालिका का सालाना वित्तीय बजट 42 करोड़ रुपये से भी अधिक का पारित होता है। बजट का यह विशाल आकार राज्य की कई बड़ी नगर परिषदों के बराबर ठहरता है। एक छोटी आबादी वाले कस्बे के स्थानीय प्रशासन का इतना साधन संपन्न होना किसी भी सामान्य नागरिक को हैरत में डाल सकता है, लेकिन इसके पीछे इस हिल स्टेशन की अनूठी भौगोलिक स्थिति और विशाल पर्यटन तंत्र काम करता है।

प्रवेश द्वार पर टोल टैक्स से होती है भारी भरकम कमाई

माउंट आबू नगरपालिका की तिजोरी भरने में सबसे बड़ा योगदान शहर के प्रवेश द्वार पर वसूला जाने वाला टोल टैक्स निभाता है। बाहर से आने वाले प्रत्येक पर्यटक वाहन को शहर की सीमा में दाखिल होते ही यह शुल्क चुकाना होता है। इस सिंगल चेकपोस्ट से पालिका को पूरे साल करोड़ों रुपये का सीधा राजस्व प्राप्त होता है। उदाहरण के तौर पर, सामान्य तौर पर कम आवाजाही वाले पिछले जुलाई के महीने में ही इस नाके से लगभग 60 लाख रुपये का संग्रह दर्ज किया गया था। गर्मियों की छुट्टियों और दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान यह आमदनी कई गुना बढ़ जाती है।

ये भी पढ़ें

साल के आम दिनों और ऑफ सीजन के दौरान भी इस टोल नाके से हर महीने औसतन 20 से 25 लाख रुपये की नियमित आमदनी बनी रहती है। त्योहारी छुट्टियों और लंबे वीकेंड्स पर वाहनों की कतारें इतनी लंबी हो जाती हैं कि महज चंद दिनों के भीतर ही 15 लाख रुपये तक का राजस्व एकत्र हो जाता है। पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार, वीकेंड पर केवल एक दिन में सर्वाधिक 6.7 लाख रुपये की ऐतिहासिक कमाई भी दर्ज हो चुकी है। पूरे वित्तीय वर्ष में अकेले इस टोल व्यवस्था से पालिका को 5 से 7 करोड़ रुपये की बंपर राशि मिलती है, जिसका कुछ निर्धारित हिस्सा वन विभाग को भी हस्तांतरित किया जाता है।

नक्की झील के बोटिंग ठेके से मिलता है करोड़ों का राजस्व

टोल के बाद इस पर्वतीय निकाय के लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय आधार यहां की मशहूर नक्की झील है। झील में नौकायन और उससे जुड़ी अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का ठेका करोड़ों रुपये की ऊंची बोली में नीलाम होता है। कुछ वर्ष पहले नक्की लेक के संचालन का 3 साल का अनुबंध 7.61 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि में छोड़ा गया था। देश और विदेश से आने वाले लाखों सैलानी इस झील में नौकायन का आनंद लेने पहुंचते हैं। इस प्राकृतिक जलस्रोत से मिलने वाला यह विशाल राजस्व निकाय को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।

होटल कारोबार, टैक्स और विज्ञापनों का अतिरिक्त सहारा

पर्यटन का बड़ा केंद्र होने के कारण शहर में सैकड़ों होटल, लग्जरी रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट्स संचालित हो रहे हैं। इन तमाम व्यावसायिक परिसरों से नगरपालिका को हर साल मोटा कमर्शियल लाइसेंस शुल्क और अर्बन डेवलपमेंट टैक्स प्राप्त होता है। इसके साथ ही शहर के प्रमुख चौराहों, सर्कलों और मुख्य पार्किंग स्थलों पर बड़े कॉर्पोरेट घरानों तथा ब्रांड्स द्वारा लगाए जाने वाले विज्ञापन होर्डिंग्स से भी निकाय को भारी राजस्व की प्राप्ति होती है। संपत्ति कर और यूजर चार्ज जैसे आंतरिक साधन इस बजट को और मजबूत करते हैं।

ब्रिटिश दौर में 1864 में रखी गई थी प्रशासनिक नींव

आर्थिक रूप से राज्य का सबसे समृद्ध निकाय होने के साथ ही यह राजस्थान की सबसे पुरानी नगरपालिका का दर्जा भी रखता है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1864 में इसकी स्थापना की गई थी। उन्नीसवीं सदी के मध्य में मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी और संक्रामक महामारियों से राहत पाने के लिए अंग्रेज अधिकारियों ने माउंट आबू को अपना ग्रीष्मकालीन ठिकाना बनाया था। उसी दौर में यहां सुचारू स्वच्छता और जनसुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से पहली बार इस आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, जो आज अपने अनोखे रेवेन्यू मॉडल के बूते चल रही है।

सवाल-जवाब

माउंट आबू नगरपालिका का सालाना बजट कितना है?
माउंट आबू नगरपालिका का वार्षिक बजट 42 करोड़ रुपये से भी अधिक का पारित होता है, जो राज्य की कई बड़ी नगर परिषदों के बराबर है।
इस नगरपालिका की कमाई का सबसे बड़ा जरिया क्या है?
शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित चेकपोस्ट से वसूला जाने वाला टोल टैक्स सबसे बड़ा स्रोत है, जिससे सालाना 5 से 7 करोड़ रुपये मिलते हैं।
नक्की झील से पालिका को कितनी आमदनी होती है?
नक्की झील में नौकायन और व्यावसायिक गतिविधियों का तीन साल का ठेका कुछ साल पहले 7.61 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ था।
माउंट आबू नगरपालिका की स्थापना कब हुई थी?
इसकी स्थापना ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1864 में हुई थी और यह राजस्थान की सबसे पुरानी नगरपालिका है।
एक दिन में टोल नाके से अधिकतम कितनी कमाई दर्ज की गई है?
सैलानियों की भारी भीड़ वाले एक वीकेंड पर सिंगल डे में रिकॉर्ड 6.7 लाख रुपये की टोल वसूली दर्ज की जा चुकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp