एंथ्रोपिक के आईपीओ दस्तावेजों से खुलासे, जानें कैसे बना रही है अपने कस्टमर्स को लॉयलस्ट्रीट डॉग की जान बचाने में हुई देरी, फिर बॉस की एक बात से बदल गई आरव और सिया की लव स्टोरीबाराबंकी का पौराणिक पारिजात वृक्ष बना शिव भक्तों का केंद्र, भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं इसके सुनहरे फूलवर्ल्ड अंडर-19 बॉक्सिंग में आदित्य का कमाल, खिताबी मुकाबले में पक्की की जगहऐप्पल का फोल्डेबल फोन मार्केट में आते ही विवादों में, स्क्रीन टूटने की शिकायतों के बीच आईफिक्सिट ने खोली सच्चाईअनुराधा पौडवाल ने चरम कामयाबी के बीच क्यों छोड़ दी थी फिल्मी दुनियामौत के बाद अब खाद बनेगा इंसानी शरीर, ऑस्ट्रेलिया के इस राज्य ने दी अनोखी कानूनी मंजूरीसोने की चाल 4,000 डॉलर के पास अटकी, सिस्टमैटिक बिकवाली के बीच केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने संभाला मोर्चाईसीबी की नीतिगत बैठक और फ्रांस के बॉन्ड संकट के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचलरजनीकांत की 'जेलर 2' ने 12वें दिन पार किया 400 करोड़ का आंकड़ा, बनी सबसे बड़ी तमिल फिल्म
उत्तराखंड में भाजपा के साथ हुआ गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का विलय, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सूर्य विक्रम शाही की 'घर वापसी'राजनीति
27 अग॰ 2026, 7:13 pm (60 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड में भाजपा के साथ हुआ गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का विलय, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सूर्य विक्रम शाही की 'घर वापसी'

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का भारतीय जनता पार्टी में आधिकारिक विलय हो गया है। पार्टी अध्यक्ष सूर्य विक्रम शाही ने देहरादून में अपने समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।

उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है। राज्य में गोरखा समुदाय के अधिकारों और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उठाने के उद्देश्य से गठित गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का बृहस्पतिवार को भाजपा में आधिकारिक रूप से विलय हो गया। देहरादून स्थित राज्य भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष सूर्य विक्रम शाही ने अपने अनेक समर्थकों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उनका पार्टी में औपचारिक स्वागत किया और इसे संगठन के विस्तार के लिहाज से एक अहम कदम बताया।

सूर्य विक्रम शाही की भाजपा में 'घर वापसी' और राजनीतिक जुड़ाव

उत्तराखंड के राजनीतिक विश्लेषक इस विलय को सूर्य विक्रम शाही के लिए एक तरह की 'घर वापसी' मान रहे हैं। शाही पूर्व में भी भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे थे, हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने अलग होकर फ्रंट का गठन किया था। वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भी गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के बजाय भाजपा को अपना खुला समर्थन देने का ऐलान किया था। अब 2027 के चुनावी मुकाबले से पहले शाही ने अपने संगठन का अस्तित्व समाप्त कर पूरी तरह भाजपा के साथ चलने का फैसला लिया है। सदस्यता ग्रहण करने के उपरांत सूर्य विक्रम शाही ने विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा सरकार जनता की उम्मीदों और विकास की आकांक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतरेगी।

चुनाव आयोग द्वारा मान्यता रद्द किए जाने के बाद उठाया कदम

इस विलय के पीछे एक प्रमुख प्रशासनिक पहलू भारत निर्वाचन आयोग की हालिया कार्रवाई भी है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गैर-मान्यता प्राप्त दल के रूप में पंजीकृत गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपने गठन के बाद से राज्य में कोई भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहने और निष्क्रिय रहने के कारण आयोग ने इसी महीने इस संगठन की राजनीतिक मान्यता समाप्त कर दी थी। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के बाद दल के पास स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प सीमित हो गए थे, जिसके बाद नेतृत्व ने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया।

2027 के विधानसभा चुनाव और गोरखा मतदाताओं का प्रभाव

भारतीय जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से इस विलय को काफी महत्वपूर्ण मान रही है। उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में गोरखा समुदाय की आबादी और उनका मतदान पैटर्न एक असरदार भूमिका निभाता है। खासतौर पर राजधानी देहरादून, गढ़वाल मंडल और आसपास के शहरी तथा अर्ध-शहरी इलाकों में गोरखा मतदाताओं की संख्या निर्णायक स्थिति में है। भाजपा को उम्मीद है कि सूर्य विक्रम शाही के जुड़ने से गोरखा समाज में पार्टी की पैठ और अधिक मजबूत होगी तथा आगामी चुनावों में समुदाय का समर्थन हासिल करने में मदद मिलेगी।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का किस राजनीतिक दल में विलय हुआ है?
गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आधिकारिक रूप से विलय हो गया है।
विलय कार्यक्रम कहाँ और किस नेता की उपस्थिति में संपन्न हुआ?
यह कार्यक्रम देहरादून स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित हुआ, जहाँ प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की उपस्थिति में सूर्य विक्रम शाही ने पार्टी की सदस्यता ली।
चुनाव आयोग ने गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट पर क्या कार्रवाई की थी?
गठन के बाद से कोई भी चुनाव न लड़ने और निष्क्रिय रहने के कारण निर्वाचन आयोग ने इसी महीने इस गैर-मान्यता प्राप्त दल की मान्यता समाप्त कर दी थी।
2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का क्या रुख था?
2022 के राज्य विधानसभा चुनाव में गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने चुनाव न लड़कर भाजपा को अपना खुला समर्थन दिया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·60 दिन पहले

इस राजनीतिक विलय का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहलू यह भी है कि चुनाव आयोग द्वारा दल की मान्यता रद्द किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि मामला पूरी तरह राजनीतिक और चुनावी है, लेकिन जांच एजेंसियों और प्रशासनिक निकायों के नियमों का पालन न करने से क्षेत्रीय दलों के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो जाता है। 2027 के चुनावों से पहले गोरखा बहुल क्षेत्रों में सुरक्षा और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए इस राजनीतिक समीकरण के जमीनी असर पर हमारी नजर रहेगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp