उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है। राज्य में गोरखा समुदाय के अधिकारों और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उठाने के उद्देश्य से गठित गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट का बृहस्पतिवार को भाजपा में आधिकारिक रूप से विलय हो गया। देहरादून स्थित राज्य भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष सूर्य विक्रम शाही ने अपने अनेक समर्थकों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उनका पार्टी में औपचारिक स्वागत किया और इसे संगठन के विस्तार के लिहाज से एक अहम कदम बताया।
सूर्य विक्रम शाही की भाजपा में 'घर वापसी' और राजनीतिक जुड़ाव
उत्तराखंड के राजनीतिक विश्लेषक इस विलय को सूर्य विक्रम शाही के लिए एक तरह की 'घर वापसी' मान रहे हैं। शाही पूर्व में भी भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे थे, हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने अलग होकर फ्रंट का गठन किया था। वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भी गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के बजाय भाजपा को अपना खुला समर्थन देने का ऐलान किया था। अब 2027 के चुनावी मुकाबले से पहले शाही ने अपने संगठन का अस्तित्व समाप्त कर पूरी तरह भाजपा के साथ चलने का फैसला लिया है। सदस्यता ग्रहण करने के उपरांत सूर्य विक्रम शाही ने विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा सरकार जनता की उम्मीदों और विकास की आकांक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतरेगी।
चुनाव आयोग द्वारा मान्यता रद्द किए जाने के बाद उठाया कदम
इस विलय के पीछे एक प्रमुख प्रशासनिक पहलू भारत निर्वाचन आयोग की हालिया कार्रवाई भी है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गैर-मान्यता प्राप्त दल के रूप में पंजीकृत गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपने गठन के बाद से राज्य में कोई भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहने और निष्क्रिय रहने के कारण आयोग ने इसी महीने इस संगठन की राजनीतिक मान्यता समाप्त कर दी थी। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के बाद दल के पास स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प सीमित हो गए थे, जिसके बाद नेतृत्व ने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया।
2027 के विधानसभा चुनाव और गोरखा मतदाताओं का प्रभाव
भारतीय जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से इस विलय को काफी महत्वपूर्ण मान रही है। उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में गोरखा समुदाय की आबादी और उनका मतदान पैटर्न एक असरदार भूमिका निभाता है। खासतौर पर राजधानी देहरादून, गढ़वाल मंडल और आसपास के शहरी तथा अर्ध-शहरी इलाकों में गोरखा मतदाताओं की संख्या निर्णायक स्थिति में है। भाजपा को उम्मीद है कि सूर्य विक्रम शाही के जुड़ने से गोरखा समाज में पार्टी की पैठ और अधिक मजबूत होगी तथा आगामी चुनावों में समुदाय का समर्थन हासिल करने में मदद मिलेगी।




















