देश के प्रति प्रेम और निष्ठा दिखाने के लिए उम्र कभी भी आड़े नहीं आती, इस बात को उदयपुर के रहने वाले 62 वर्षीय श्रीरत्न मोहता ने पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवा-निवृत्त होने वाले मोहता पिछले लगभग 13 वर्षों से लगातार आम जनता को तिरंगा सौंपकर एक अनूठी देशभक्ति की मिसाल पेश कर रहे हैं। उनका यह अनूठा सफर पिछले 6 साल से बिना रुके लगातार आगे बढ़ रहा है। वह रोज सुबह से नए-नए लोगों से मुलाकात करते हैं, उन्हें आदर के साथ राष्ट्रीय ध्वज भेंट करते हैं और भारत माता की जय के नारे लगवाकर उनके भीतर देश के सम्मान की भावना को और मजबूत करते हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के विशेष अवसर पर भी उन्होंने शहर के विभिन्न कोनों में जाकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने नागरिकों के कपड़ों पर तिरंगा बैज लगाया और उन्हें भारतीय होने पर गर्व महसूस करने की प्रेरणा दी। इसके साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों में अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की पुरजोर अपील भी की। मोहता का साफ तौर पर मानना है कि तिरंगा उनके लिए केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह इस महान राष्ट्र की एकता, अखंडता, मान-सम्मान और देश के हर एक नागरिक के कर्तव्य का सर्वोच्च प्रतीक है।
राष्ट्रीय पर्वों से शुरू हुआ सफर अब रोजाना की दिनचर्या बना
इस सराहनीय पहल की शुरुआत उन्होंने गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और करगिल विजय दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उत्सवों के दिनों से की थी। शुरुआती दौर में वे अपने निजी पैसों से तिरंगे खरीदते थे और उन्हें लोगों के बीच वितरित करते थे। धीरे-धीरे यह सिलसिला उनके दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया। अब उनकी कोशिश यह रहती है कि वे हर दिन कम से कम तीन नए लोगों को तिरंगा जरूर भेंट करें। कई बार तो ऐसा भी होता है कि वे एक ही दिन में 15 से 20 अलग-अलग लोगों तक इस राष्ट्रीय संदेश को पहुंचा देते हैं। जब देश ने चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक और गौरवशाली सफलता हासिल की थी, तब भी उन्होंने हर आयु वर्ग और समाज के हर तबके के लोगों को पूरे जोश के साथ तिरंगा भेंट किया था। उनका अटूट विश्वास है कि देश की बड़ी सफलताओं का जश्न समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर मनाया जाना चाहिए, जिससे आपसी भाईचारा और राष्ट्रीय एकता और अधिक मजबूत होती है।
विदेशों तक पहुंचाई राष्ट्रध्वज की गरिमा
श्रीरत्न मोहता का यह राष्ट्रभक्ति से सराबोर अभियान केवल उदयपुर शहर या राजस्थान की भौगोलिक सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। वे देश के कई बड़े महानगरों और विभिन्न राज्यों का दौरा करके लोगों से मिल चुके हैं और वहां भी देशभक्ति की अलख जगा चुके हैं। सबसे खास और गौरवान्वित करने वाली बात यह है कि अपनी निजी विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने श्रीलंका, बैंकॉक और दुबई जैसे देशों में पहुंचकर वहां के स्थानीय निवासियों और घूमने आए पर्यटकों को भी तिरंगा भेंट किया। उन्होंने विदेशी सरजमीं पर रह रहे प्रवासी भारतीयों को विशेष तौर पर तिरंगा बैज लगाकर उनका सम्मान किया। एक विशेष अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि मात्र दो दिनों के भीतर उन्होंने लगभग 125 प्रवासी भारतीयों को तिरंगा बैज पहना दिया था, जिससे वहां का पूरा माहौल पूरी तरह से देशभक्ति के रंग में रंग गया था।
मतदाता जागरूकता और लोकतांत्रिक कर्तव्य
देश के प्रति प्रेम जताने के साथ-साथ श्रीरत्न मोहता देश में चुनावी सहभागिता और मतदाता जागरूकता को अपना एक बहुत बड़ा सामाजिक उत्तरदायित्व मानते हैं। वे 25 जनवरी 2020 से लगातार हर रोज कम से कम एक व्यक्ति को वोट डालने के लिए अनिवार्य रूप से प्रेरित करने का संकल्प निभा रहे हैं। इस नेक काम को अंजाम देने के लिए वे हमेशा अपने साथ एक विशेष फोल्डर रखते हैं, जिस पर स्पष्ट अक्षरों में यह बात दर्ज होती है कि कृपया मतदान अवश्य करें और अपने आस-पास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करते रहें। वे रास्ते में आते-जाते लोगों के सामने हाथ जोड़कर विनती करते हैं और उनसे आगामी चुनावों में अपने मत का प्रयोग करने की अपील करते हैं। सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि वे बड़े कारोबारियों और दुकानदारों से भी यह आग्रह करते हैं कि मतदान के दिन वे अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दें, ताकि कोई भी नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित न रह जाए। उनके अनुसार, वे अब तक व्यक्तिगत रूप से लगभग 13 हजार लोगों से मतदान करने का वादा ले चुके हैं। मतदाता जागरूकता के क्षेत्र में उनके इन उल्लेखनीय और प्रेरणादायक प्रयासों को देखते हुए जिला स्तर पर राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। उनका कहना है कि यदि उनके इस छोटे से प्रयास से भी देश के मतदान प्रतिशत में एक या दो प्रतिशत का सुधार होता है, तो वे अपने इस पूरे अभियान और जीवन को पूरी तरह सफल मानेंगे।




















