ईरान संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक कूटनीतिक और सैन्य परिदृश्य में दो मुख्य ध्रुव स्पष्ट रूप से उभर चुके हैं। एक ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देश खड़े हैं, तो दूसरी तरफ रूस और चीन जैसे राष्ट्रों का गठजोड़ सक्रिय है। मौजूदा स्थिति एक नए शीत युद्ध जैसा माहौल तैयार कर रही है, जिसके प्रत्यक्ष प्रभाव स्वरूप विभिन्न देशों के बीच अत्याधुनिक हथियारों को विकसित करने और जुटाने की होड़ तेज हो गई है। युद्ध के हालिया स्वरूप को देखते हुए वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। यही कारण है कि कई राष्ट्र अपनी रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए नए घातक अस्त्र तैयार कर रहे हैं या उनका आयात कर रहे हैं। भारत भी अपनी सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगातार उन्नत मिसाइल परीक्षण कर रहा है। इसके लिए अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में नियमित रूप से नोटाम (NOTAM) जारी किए जाते रहे हैं। इसी वैश्विक सैन्य हलचल के बीच रूस की P-800 ओनिक्स सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमताओं की तुलना विशेषज्ञों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
तटीय रक्षा रणनीति में P-800 ओनिक्स की भूमिका और क्षमताएं
रूसी नौसेना की तटीय मारक रणनीति में P-800 ओनिक्स सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल एक मुख्य आधार स्तंभ के रूप में उभरी है। रूस के प्रशांत बेड़े ने हालिया सैन्य अभ्यासों के दौरान बैल और बास्तियन तटीय मिसाइल प्रणालियों के माध्यम से इस मिसाइल का उपयोग किया। इन अभ्यासों के दौरान रूसी नौसेना का दावा रहा कि ओनिक्स मिसाइल आधुनिक जहाजरोधी रक्षा तंत्र को चकमा देने की उच्च क्षमता रखती है और कई सौ किलोमीटर की दूरी से किसी भी आकार के विरोधी युद्धपोत को बेअसर कर सकती है।
तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, P-800 ओनिक्स मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर ध्वनि की रफ्तार से लगभग 2.5 गुना तेजी से यानी मैक 2.5 की गति से बढ़ती है। इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर से लेकर 600 किलोमीटर तक आंकी जाती है। मिसाइल की उच्च गति के कारण विरोधी युद्धपोतों पर लगे रडार और ट्रैकिंग सिस्टम को खतरे की पहचान करने तथा इंटरसेप्टर लॉन्च करने के लिए बेहद सीमित समय मिल पाता है। जब यह मिसाइल उड़ान के अंतिम चरण में समुद्र की सतह के ठीक ऊपर (सी-स्कीमिंग) कम ऊंचाई पर उड़ती है, तो इसे आधुनिक एयर डिफेंस सेंसर के लिए पकड़ पाना और भी कठिन हो जाता है।
ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की गति, रेंज और वास्तविक युद्ध क्षमता
दूसरी तरफ, भारत की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल अपनी बेजोड़ गति और सटीकता के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है। ब्रह्मोस की उड़ान गति मैक 2.8 से मैक 3 के बीच (लगभग 3400 से 3700 किलोमीटर प्रति घंटा) है, जो इसे P-800 ओनिक्स की तुलना में अधिक तीव्र बनाती है। ब्रह्मोस की वर्तमान अधिकतम सीमा 500 किलोमीटर तक है, जिसे भविष्य में और अधिक बढ़ाने की दिशा में निरंतर काम चल रहा है।
ब्रह्मोस की मारक क्षमता का प्रमाण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देखा गया था, जब इसने चीनी मूल के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह निष्प्रभावी बनाते हुए संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर सटीक निशाना साधा था। गति और रडार से बचने की तकनीक का यह संयोजन ब्रह्मोस को आधुनिक नौसैनिक और जमीनी अभियानों में अत्यधिक विनाशकारी हथियार बनाता है।
रूस के सुदूर पूर्व में बास्तियन मिसाइल प्रणालियों की तैनाती
रूस ने प्रशांत बेड़े के सैन्य अभ्यास के दौरान बास्तियन प्रणालियों को अपने सुदूर पूर्वी तटीय क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर तैनात किया था। इनमें प्रिमोर्स्की क्षेत्र, कामचटका, चुकोटका और कुरील द्वीप समूह शामिल हैं। रूसी नौसैनिक रणनीति में ये जमीन आधारित तटीय मिसाइल प्रणालियां तटीय जलक्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नियंत्रण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इन मिसाइल प्रणालियों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इन्हें केवल कुछ ही मिनटों में युद्ध के लिए पूरी तरह तैनात किया जा सकता है। रूस के विशाल प्रशांत समुद्री तट रेखा को देखते हुए इस तरह के जमीनी मिसाइल नेटवर्क अत्यधिक किफायती और प्रभावी साबित होते हैं। ये प्रणाली रूस को हर क्षेत्र में लगातार महंगे युद्धपोतों या पनडुब्बियों को गश्त पर रखने की आवश्यकता से बचाती हैं, जबकि संभावित विरोधी बेड़ों के प्रवेश पर प्रभावी अंकुश बनाए रखती हैं।
ओनिक्स से हाइपरसोनिक जिरकॉन की ओर कदम
P-800 ओनिक्स मिसाइल रूस की तटीय सुरक्षा क्षमताओं की अंतिम सीमा नहीं है। मास्को अब बास्तियन मिसाइल परिसर के साथ अधिक अत्याधुनिक और अति-तीव्र जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल को एकीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध रक्षा जानकारियों के मुताबिक, रूस बास्तियन प्रणाली पर आधारित जमीनी लॉन्चरों से जिरकॉन का प्रक्षेपण करने की क्षमता विकसित कर चुका है।
जिरकॉन को ओनिक्स की तुलना में कहीं अधिक उन्नत माना जाता है। रूसी दावों के अनुसार, जिरकॉन मिसाइल लगभग 1,000 किलोमीटर की दूरी तक वार कर सकती है और यह मैक 9 की हाइपरसोनिक रफ्तार हासिल करने में सक्षम है। इसके अलावा, उड़ान के अंतिम चरण में इसकी दिशा बदलने (मैनूवरिंग) की क्षमता इसे मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग अभेद्य बनाती है। हालांकि, जिरकॉन की निर्माण लागत ओनिक्स मिसाइल की तुलना में काफी अधिक अनुमानित की गई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी जुलाई के अंत में स्पष्ट किया था कि जिरकॉन के विकास पर काम लगातार जारी है और हाल के युद्ध अनुभवों के आधार पर इसकी सटीकता में और सुधार किया गया है।
ओनिक्स से जिरकॉन की ओर यह तकनीकी बदलाव यह दिखाता है कि रूस प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में केवल नौसैनिक जहाजों की उपस्थिति पर निर्भर रहने के बजाय लंबी दूरी की जमीनी मिसाइल प्रणालियों को अपनी समग्र रक्षा रणनीति का केंद्रीय हिस्सा मानकर आगे बढ़ रहा है।




















