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मक्का की बंपर पैदावार के लिए सिंचाई से लेकर कीट नियंत्रण तक अपनाएं ये जरूरी कृषि उपायभारत
14 अग॰ 2026, 6:52 am (2 घंटे पहले)· 3

मक्का की बंपर पैदावार के लिए सिंचाई से लेकर कीट नियंत्रण तक अपनाएं ये जरूरी कृषि उपाय

मक्का की बेहतरीन फसल और मोटे भुट्टे पाने के लिए सही समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई, मिट्टी चढ़ाने, खाद की टॉप ड्रेसिंग और कीट प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

मक्का की फसल से बंपर पैदावार और बेहतर गुणवत्ता वाले मोटे भुट्टे हासिल करने के लिए सही समय पर खेत की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। मक्का उगाने वाले किसानों को बुवाई के बाद से लेकर कटाई तक कई महत्वपूर्ण चरणों में विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। इनमें सही समय पर सिंचाई देना, जल निकासी का पुख्ता इंतजाम रखना, खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करना, सही मात्रा में यूरिया और पोषक तत्व देना तथा फसलों को खतरनाक कीटों से बचाना शामिल है। अगर किसान भाई खेत का नियमित निरीक्षण करते रहें और सही समय पर जरूरी कृषि कार्य पूरे करें, तो फसल की ग्रोथ शानदार होती है और भुट्टों में दाने पूरी तरह भरते हैं।

क्रिटिकल अवस्थाओं में सिंचाई प्रबंधन और जल निकासी

मक्का की फसल की सिंचाई प्रबंधन प्रणाली बेहद संवेदनशील मानी जाती है। हालांकि फसल को विकास के विभिन्न चरणों में अलग-अलग मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन तीन ऐसी नाजुक अवस्थाएं हैं जहां नमी की थोड़ी सी भी कमी पैदावार पर बहुत बुरा असर डाल सकती है। पहली अवस्था तब आती है जब पौधों में भुट्टे निकलने लगते हैं। दूसरी नाजुक अवस्था तब होती है जब पौधों में रेशे यानी सिल्क आने की शुरुआत होती है। इसके बाद तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण अवस्था दाने भरने के समय की होती है। इन तीनों संवेदनशील पड़ाव पर खेत में नमी का बना रहना अति आवश्यक है। यदि इन दिनों प्राकृतिक बारिश नहीं होती है, तो किसान भाइयों को जरूरत के हिसाब से सिंचाई का प्रबंध तुरंत करना चाहिए ताकि पौधों में पानी का तनाव न पैदा हो।

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सिंचाई के साथ-साथ जल निकासी का इंतजाम करना भी मक्का की खेती में उतना ही आवश्यक है, खासकर बरसात के मौसम में। शुरुआती अवस्था में मक्का के खेत में पानी बिल्कुल भी नहीं जमना चाहिए। यदि खेत में लगातार पानी भरा रहता है, तो पौधों की जड़ों को हवा यानी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके कारण जड़ें सड़ने का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। जब जड़ें सड़ने लगती हैं या कमजोर होती हैं, तो पौधों का संपूर्ण विकास रुक जाता है, पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और अंततः कुल उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है। इस गंभीर समस्या से बचने के लिए किसानों को मानसून या भारी बारिश शुरू होने से पहले ही खेत में जल निकासी की उचित नालियां तैयार कर लेनी चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।

निराई-गुड़ाई और पौधों पर मिट्टी चढ़ाने का सही समय

मक्का के खेत में खरपतवार नियंत्रण करना फसल की अच्छी सेहत के लिए अनिवार्य कदम है। मक्का की फसल में पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद की जानी चाहिए। इस शुरुआती चरण में मक्का के पौधे तेजी से बढ़ना शुरू करते हैं और उसी समय खेत में अवांछित घास-फूस और खरपतवार भी तेजी से फैलने लगते हैं। इसलिए किसानों को अपने खेत का समय-समय पर जायजा लेना चाहिए और जहां भी खरपतवार नजर आएं, उन्हें तुरंत निकाल देना चाहिए। पौधों की पंक्तियों के बीच हल्की गुड़ाई करने से खेत की मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है। भुरभुरी मिट्टी होने से पौधों की जड़ों तक हवा का संचार काफी बेहतर हो जाता है। गुड़ाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि कृषि उपकरणों से मक्का की नाजुक जड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे।

निराई-गुड़ाई के बाद जब मक्का के पौधे तेजी से बढ़ते हुए लगभग घुटने के बराबर ऊंचाई तक पहुंच जाएं, तब एक और महत्वपूर्ण कृषि कार्य करना जरूरी होता है। इस चरण में पौधों के चारों तरफ मिट्टी चढ़ाने का काम अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। मक्का की खेती में मिट्टी चढ़ाने की यह प्रक्रिया पौधों को मजबूती प्रदान करने में बेहद मददगार साबित होती है। बारिश के मौसम में अक्सर तेज हवाएं चलती हैं, जिससे लंबे पौधे गिर सकते हैं। घुटने तक ऊंचे पौधों पर मिट्टी चढ़ा देने से उनकी जड़ों और तने के निचले हिस्से को मजबूत सहारा मिलता है। इससे तेज हवा और बारिश के दौरान पौधों के गिरने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है और फसल सुरक्षित बनी रहती है।

मिट्टी परीक्षण और यूरिया की टॉप ड्रेसिंग से पोषण प्रबंधन

केवल पानी देने और निराई-गुड़ाई करने से ही मक्का का अधिकतम उत्पादन प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि फसल को संतुलित पोषक तत्व उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। पोषक तत्वों की पूर्ति करने से पहले किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। मिट्टी परीक्षण कराने से खेत में मौजूद पोषक तत्वों का सटीक विवरण मिल जाता है और यह स्पष्ट हो जाता है कि जमीन में किस तत्व की कमी है और फसल को कितनी मात्रा में उर्वरक देने की आवश्यकता है। मक्का की खेती में मुख्य रूप से नाइट्रोजन और पोटाश का विशेष योगदान होता है। नाइट्रोजन पौधों को हरा-भरा रखने और उनकी वानस्पतिक वृद्धि को तेज करने में अहम भूमिका निभाता है।

फसल की अच्छी बढ़वार सुनिश्चित करने के लिए सही समय पर टॉप ड्रेसिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है। जब खेत में पहली निराई-गुड़ाई पूरी हो जाए और खरपतवार साफ हो जाएं, उसके बाद किसान भाई फसल की आवश्यकता के अनुसार यूरिया की उचित मात्रा खेत में दे सकते हैं। निराई के तुरंत बाद यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि खेत से खरपतवार पहले ही हट चुके होते हैं, जिससे मक्का के पौधे दिए गए यूरिया और नाइट्रोजन का पूरा इस्तेमाल कर पाते हैं। नाइट्रोजन की सही खुराक से पौधों में नए पत्तों और तनों का विकास तेजी से होता है, जिससे भुट्टे बड़े और दानों से भरपूर बनते हैं।

फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप और उसकी पहचान के उपाय

मक्का की फसल में एक सबसे बड़ी चुनौती कीट प्रकोप की होती है, जिसमें फॉल आर्मी वर्म सबसे खतरनाक कीट माना जाता है। यह कीट मक्का की कोमल पत्तियों और नए बढ़ते पौधों को तेजी से खाकर नष्ट कर देता है। यदि शुरुआती अवस्था में ही इस कीट की पहचान न की जाए और सही कदम न उठाए जाएं, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए किसान भाइयों को अपने खेत का नियमित और सूक्ष्म निरीक्षण करते रहना चाहिए। विशेष रूप से पौधों की नई और कोमल पत्तियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के कीट हमले का तुरंत पता लगाया जा सके।

फॉल आर्मी वर्म के हमले को पहचानने के लिए कुछ स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। यदि मक्का के पौधों की पत्तियों पर छोटे या बड़े छेद बने हुए दिखाई दें, पत्तियां किनारों से कटी हुई नजर आएं या फिर पौधों के बीच वाले हिस्से में कीड़े का मल यानी भुरभुरा कचरा जमा दिखे, तो यह फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप का साफ संकेत होता है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह से कीट नियंत्रण के उचित उपाय लागू करने चाहिए ताकि कीट को पूरे खेत में फैलने से रोका जा सके और मक्का की फसल को सुरक्षित रखकर बेहतर पैदावार हासिल की जा सके।

सवाल-जवाब

मक्का की फसल में सिंचाई की सबसे नाजुक अवस्थाएं कौन सी हैं?
मक्का में भुट्टे निकलने के समय, रेशे (सिल्क) आते वक्त और दाने भरते समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए।
मक्का में पहली निराई-गुड़ाई कब करनी चाहिए?
बुवाई के करीब 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करनी चाहिए जब खरपतवार तेजी से निकलने लगते हैं।
घुटने के बराबर पौधे होने पर मिट्टी चढ़ाना क्यों जरूरी है?
घुटने की ऊंचाई पर मिट्टी चढ़ाने से तेज हवा और बारिश के दौरान पौधों को सहारा मिलता है और उनके गिरने का खतरा कम हो जाता है।
फॉल आर्मी वर्म कीट के लक्षण क्या हैं?
पत्तियों पर छोटे-बड़े छेद होना, पत्तियां कटी दिखना और पौधों के बीच में कीड़े का भुरभुरा कचरा (मल) जमा होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
यूरिया की टॉप ड्रेसिंग कब और क्यों की जाती है?
निराई-गुड़ाई के बाद यूरिया देने से नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है, जिससे खरपतवार हटने के बाद पौधे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·57 मिनट पहले

यह लेख कृषि प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं को गहराई से छूता है। हालांकि एक अपराध संवाददाता के दृष्टिकोण से, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फसल की विफलता या बंपर पैदावार सीधे तौर पर किसानों के आर्थिक संकट, कर्ज के बोझ और कानूनी विवादों से जुड़ी होती है। जब सिंचाई संकट या जल निकासी की विफलता से फसल बर्बाद होती है, तो यह कई बार आत्महत्या और ग्रामीण अपराधों का कारण बनती है। इसलिए, समय पर कृषि इनपुट और सरकारी सहायता सुनिश्चित करना न केवल खाद्य सुरक्षा, बल्कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है।

Ravikash Gupta@ravikash·56 मिनट पहले

व्यावसायिक कृषि अब केवल पारंपरिक तौर-तरीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक कमोडिटी बाजारों और कृषि-तकनीक (एग्री-टेक) निवेशों से सीधे जुड़ चुकी है। मक्का जैसी प्रमुख फसल की पैदावार में उतार-चढ़ाव घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति के साथ-साथ पोल्ट्री और स्टार्च जैसे कॉर्पोरेट क्षेत्रों के मार्जिन को भी गहराई से प्रभावित करता है। डिजिटल सेंसर और आधुनिक सिंचाई प्रबंधन जैसे स्टार्टअप नवाचारों को अपनाकर ही किसान जलवायु अनिश्चितता के दौर में अपने वित्तीय जोखिम को कम कर सकते हैं और सप्लाई चेन को स्थिर रख सकते हैं।

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