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मानसून में तेजी से बढ़ रहे हैं पीलिया के मामले: केसरी राज अस्पताल के डॉक्टर ने दिए बचाव और सही इलाज के अहम सुझावस्वास्थ्य
14 अग॰ 2026, 6:52 am (75 दिन पहले)· 4

मानसून में तेजी से बढ़ रहे हैं पीलिया के मामले: केसरी राज अस्पताल के डॉक्टर ने दिए बचाव और सही इलाज के अहम सुझाव

बरसात के मौसम में दूषित पानी और भोजन के कारण पीलिया का खतरा बढ़ जाता है। केसरी राज अस्पताल के चिकित्सक ने इसके शुरुआती लक्षणों, वायरल कारणों और जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया है।

मानसून का मौसम आते ही देश भर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। विशेष रूप से छोटे बच्चों से लेकर वयस्कों तक पीलिया के रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बारिश के इस दौर में पीलिया एक आम लेकिन बेहद संवेदनशील बीमारी के रूप में उभरता है, जहां थोड़ी सी लापरवाही भी मरीज के लिए बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मौसम में लोगों को खान-पान और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है ताकि संक्रमण को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।

मानसून के दौरान क्यों तेजी से फैलते हैं पीलिया के मामले?

बारिश के दिनों में पीलिया के रोगियों की संख्या बढ़ने के पीछे मुख्य कारण पर्यावरणीय परिस्थितियां और दूषित जल आपूर्ति हैं। केसरी राज अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर सुमन्त कुमार गुप्ता के अनुसार, मानसून के समय में हवा और पानी में बैक्टीरिया तथा वायरस की वृद्धि बहुत तेजी से होती है। इस मौसम में मौसमी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अधिकांश पीलिया के मामले गंदे हाथों से खाना खाने अथवा दूषित पानी का सेवन करने की वजह से सामने आते हैं। बारिश के दौरान पीने का पानी आसानी से दूषित हो जाता है और खुले में रखे खाद्य पदार्थ भी बैक्टीरिया की चपेट में आ जाते हैं, जिससे पीलिया का प्रकोप बढ़ जाता है।

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पीलिया के प्रमुख लक्षण और प्रभावित होने वाली मुख्य उम्र सीमा

पीलिया के लक्षणों की पहचान शुरुआती समय में ही करना बेहद आवश्यक होता है। डॉक्टर सुमन्त कुमार गुप्ता बताते हैं कि इस बीमारी की शुरुआत में बच्चों और वयस्कों में कुछ स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इनमें सबसे पहले भूख न लगना, लगातार उल्टी जैसा मन होना या मिचली आना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द रहना, आंखों में पीलापन आना, पेशाब का रंग गहरा पीला होना और शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस होना शामिल है।

यह बीमारी मुख्य रूप से 1 साल से अधिक और 18 साल से कम उम्र के बच्चों तथा किशोरों में सबसे ज्यादा देखी जाती है। हालांकि, वयस्क लोगों को भी इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। यद्यपि वयस्कों में पीलिया होने की दर या आवृत्ति बच्चों की तुलना में कम होती है, फिर भी उन्हें संक्रमण से बचने के लिए लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।

पीलिया से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां और खान-पान के नियम

पीलिया जैसे जल जनित रोग से बचने के लिए सबसे कारगर तरीका स्वच्छता और सही खान-पान का पालन करना है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में हमेशा पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा करने के बाद ही पीना चाहिए। पानी को उबालने से उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, भोजन करने से पूर्व और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना अनिवार्य है। केवल ताजा और स्वच्छ फलों का ही सेवन करें। बाजार में पहले से कटे हुए रखे फल अथवा बासी भोजन का सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और दूषित पानी पीलिया के वायरस को फैलाने के प्रमुख माध्यम होते हैं।

झाड़-फूंक के खतरे, वायरस के प्रकार और समय पर इलाज का महत्व

चिकित्सकीय अध्ययन के अनुसार, पीलिया के अधिकतर मामले हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E वायरस के संक्रमण के कारण उत्पन्न होते हैं। यदि समय रहते इन वायरसों से होने वाले संक्रमण की पहचान कर ली जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज बहुत आसानी से और कम समय में पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

इसके विपरीत, यदि बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह स्थिति काफी घातक रूप ले सकती है। पीलिया का सही इलाज न होने पर मरीज का लिवर गंभीर रूप से डैमेज हो सकता है, जो कुछ गंभीर परिस्थितियों में जानलेवा साबित होता है। दुर्भाग्य से, कई बार लोग चिकित्सकीय सलाह लेने के बजाय पारंपरिक झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में पड़ जाते हैं। इससे सही इलाज में अनावश्यक देरी हो जाती है और मरीज की हालत बिगड़ती चली जाती है। इसलिए किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर बिना समय गंवाए योग्य डॉक्टर के पास जाकर तुरंत इलाज शुरू करवाना चाहिए।

सवाल-जवाब

मानसून के मौसम में पीलिया के मामले क्यों बढ़ जाते हैं?
बारिश में बैक्टीरिया और वायरस का विकास तेजी से होता है तथा पानी एवं खाद्य पदार्थ आसानी से दूषित हो जाते हैं, जिससे पीलिया का फैलाव बढ़ता है।
पीलिया के शुरुआती मुख्य लक्षण क्या हैं?
भूख न लगना, उल्टी जैसा लगना, पेट दर्द, आंखों में पीलापन, पेशाब का गहरा पीला रंग और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना इसके मुख्य लक्षण हैं।
पीलिया से सबसे ज्यादा कौन सा आयु वर्ग प्रभावित होता है?
यह बीमारी 1 साल से अधिक और 18 साल से कम उम्र के बच्चों एवं किशोरावस्था के लोगों में सबसे ज्यादा पाई जाती है, हालांकि वयस्क भी इससे संक्रमित हो सकते हैं।
पीलिया मुख्य रूप से किस वायरस के कारण होता है?
अधिकतर पीलिया के मामले हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E वायरस के संक्रमण के कारण होते हैं।
मानसून में पीलिया से बचने के लिए क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
हमेशा उबला हुआ पानी पीएं, खाने से पहले हाथ साबुन से धोएं, ताजा फल खाएं और खुले में कटे हुए या बासी फलों के सेवन से बचें।
पीलिया होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में क्यों नहीं पड़ना चाहिए?
झाड़-फूंक कराने से इलाज में देरी होती है, जिससे लिवर डैमेज होने और जान जाने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।
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