जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर वायुसेना दिवस के विशेष अवसर पर गुरुवार को बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति-2026 के तहत एक भव्य और रोमांचक एयर शो का आयोजन संपन्न हुआ. नीले गगन में भारतीय वायुसेना के जांबाजों ने अपने अदम्य शौर्य, कठोर अनुशासन और तकनीकी दक्षता का ऐसा नमूना पेश किया कि उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए. इस आयोजन का मुख्य आकर्षण सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम रही, जिसके विमानों ने आसमान में उड़ान भरते ही हवा में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं की लकीरें खींचकर भव्य तिरंगा फॉर्मेशन बनाई. लड़ाकू विमानों की गगनभेदी गर्जना, स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की सधी हुई उड़ान और विदेशी सैन्य विमानों के जमावड़े ने पूरे कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया.
सूर्यकिरण के हॉक एमके-132 विमानों का सटीक संतुलन और तिरंगा फॉर्मेशन
हवाई प्रदर्शन की शुरुआत में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने दर्शकों के दिलों की धड़कनें तेज कर दीं. टीम में शामिल नौ हॉक एमके-132 विमानों ने एक-दूसरे के बेहद करीब रहकर अत्यंत सधी हुई फॉर्मेशन में उड़ान भरी. इन नौ विमानों ने हवा में एक साथ आगे बढ़ते हुए और फिर पलक झपकते ही अलग-अलग दिशाओं में बंटकर दोबारा सटीक दूरी पर एकजुट होने का हैरतअंगेज हुनर दिखाया. विमानों द्वारा किए गए वर्टिकल क्लाइंब, क्रॉसओवर और कलाबाजियों के दौरान पायलटों के बीच गजब का सामंजस्य देखने को मिला. कुछ ही पलों में आसमान में नई आकृतियां गढ़ते और तिरंगे के तीन रंगों का धुआं छोड़ते इन विमानों के हर मूव पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही, जिसने जांबाज पायलटों की उच्चस्तरीय ट्रेनिंग और अनुशासन को प्रत्यक्ष प्रमाणित किया.
सारंग टीम के ध्रुव हेलिकॉप्टरों का हैरतअंगेज हवाई नृत्य
लड़ाकू विमानों की तीव्र गति के बाद एयर शो के अगले चरण में सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने आसमान की कमान अपने हाथों में ली. स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव पर आधारित सारंग टीम ने अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अत्यंत नियंत्रित और सधे हुए करतब दिखाए. चार ध्रुव हेलिकॉप्टरों का हवा में एक-दूसरे के आमने-सामने से बेहद करीब से गुजरना, दिशा बदलना और फिर से एक अनुशासित घेरे में लौट आना देखने वालों के लिए रोमांचकारी अनुभव साबित हुआ. इस शानदार प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया कि भारतीय वायुसेना केवल जेट विमानों की गति में ही नहीं, बल्कि रोटरी-विंग यानी हेलिकॉप्टर संचालन और एरोबेटिक्स में भी वैश्विक स्तर का कौशल रखती है.
तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और प्रचंड ने कराई मारक क्षमता की अनुभूति
हवाई करतबों के साथ-साथ इस एयर शो में आधुनिक युद्धक शक्ति का व्यापक प्रदर्शन भी हुआ. भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी फाइटर जेट तेजस ने जब लो-लेवल फ्लाइंग की, तो उनकी प्रचंड आवाज से पूरा जोधपुर एयरबेस थर्रा उठा. तेज रफ्तार से नीची उड़ान भरते इन लड़ाकू विमानों ने वास्तविक युद्धक्षेत्र जैसी परिचालन तत्परता की झलक दिखाई. इसके अतिरिक्त भारत में ही विकसित लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड ने भी अपनी विशिष्ट उड़ान क्षमताओं, गतिशीलता और युद्धक संतुलन का शानदार मुजाहिरा किया. एक तरफ जहां एरोबेटिक दल कलाबाजी में पारंगत दिखे, वहीं इन फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों ने भारत की सामरिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता को रेखांकित किया.
स्टैटिक डिस्प्ले में दुनिया भर के सैन्य प्लेटफॉर्म्स का जमावड़ा
तरंग शक्ति-2026 के इस आयोजन की विशेषता केवल उड़ान तक सीमित नहीं रही, बल्कि एयर फोर्स स्टेशन पर एक वृहद स्टैटिक डिस्प्ले भी स्थापित किया गया. इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा ले रही विभिन्न विदेशी वायु सेनाओं के आधुनिक लड़ाकू विमानों और सैन्य प्लेटफॉर्म्स को जमीन पर प्रदर्शित किया गया. आमंत्रित अतिथियों और दर्शकों को इन विदेशी विमानों को नजदीक से देखने, उनके एरोडायनामिक ढांचे को समझने तथा उनकी तकनीकी विशेषताओं को जानने का दुर्लभ मौका मिला. बहुराष्ट्रीय सेनाओं की एक ही एयरबेस पर उपस्थिति ने जोधपुर के इस आयोजन को वैश्विक सैन्य परिदृश्य में स्थापित कर दिया.
एयरबेस से लेकर शहर की छतों तक छाया रहा रोमांच
इस ऐतिहासिक एयर शो को देखने के लिए एयर फोर्स स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र, एनसीसी कैडेट्स, सैन्य कर्मी, वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट आमंत्रित लोग मौजूद थे. सुरक्षा मानकों के चलते एयरबेस में प्रवेश सीमित होने के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों ने अपने घरों की छतों से ही आसमान में होने वाले रोमांचक कारनामों का दीदार किया. जैसे ही नीले आसमान में तेजस और सुखोई की गर्जना गूंजी, पूरा शहर मानों आसमान की ओर निहारने लगा. सूर्यकिरण द्वारा छोड़ी गई तिरंगे की लकीरों और हेलिकॉप्टरों के करतबों ने सूर्यनगरी के इस वायुसेना दिवस को हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
























