गर्दन और चेहरे की त्वचा पर उभरने वाले छोटे तिल या मस्से अक्सर लोगों को असहज कर देते हैं। इनसे छुटकारा पाने की जल्दबाजी में कई लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले असत्यापित उपायों को आजमाने लगते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर नींबू का रस, सिरका, लहसुन की कली या बेकिंग सोडा लगाने के अनगिनत दावे किए जाते हैं, लेकिन त्वचा के मामलों में हर नुस्खा सुरक्षित साबित नहीं होता। चेहरे की त्वचा बेहद संवेदनशील और कोमल होती है, जिस पर ऐसे किसी भी तीखे या अम्लीय पदार्थ का प्रयोग फायदे की जगह तेज जलन, लालिमा, गंभीर संक्रमण और जीवनभर रहने वाले दाग का कारण बन सकता है।
तिल और मस्से के अंतर को पहचानना क्यों जरूरी है
ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार के अनुसार सबसे बुनियादी बात यह समझना है कि तिल और मस्से जैविक रूप से एक समान नहीं होते। त्वचा पर उभरने वाला हर दाना या उभार सामान्य मस्सा नहीं माना जा सकता, और न ही हर तिल को घरेलू नुस्खों से हटाने की कोशिश सही है। जन्मजात तिल अलग प्रकृति के होते हैं, जबकि कई तिल उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे सामने आते हैं। इसके विपरीत, सामान्य मस्से अक्सर वायरल कारणों से पनपते हैं और उनकी संरचना अलग होती है। जब तक किसी उभार की सही पहचान न हो, तब तक उस पर किसी भी प्रकार का लेप या नुस्खा आजमाना त्वचा को गहरे संकट में डाल सकता है।
नींबू, सिरका और लहसुन के प्रयोग से होने वाले खतरे
आमतौर पर लोग जिद्दी मस्सों को सुखाने के लिए सिरका या नींबू जैसी अम्लीय चीजों को सीधा त्वचा पर लगा लेते हैं। डॉ. राजकुमार स्पष्ट करते हैं कि इन प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में मौजूद तेज एसिड त्वचा की ऊपरी परत को झुलसा सकते हैं। चेहरे या गर्दन के नाजुक हिस्से पर इनके लगातार प्रयोग से रासायनिक जलन यानी केमिकल बर्न हो सकती है। इसी तरह लहसुन का तीखापन भी संवेदनशील त्वचा पर तीव्र जलन और असहनीय लालपन पैदा कर सकता है। इन गलत प्रयोगों के कारण मस्सा तो अपनी जगह बना रहता है, लेकिन आसपास की स्वस्थ त्वचा जलकर खराब हो जाती है।
काटने, खुरचने या बांधने की जानलेवा गलतियों से बचें
घरेलू स्तर पर सुरक्षित देखभाल का सबसे पहला नियम यह है कि मस्से या तिल को बार-बार छूने, छेड़ने और नोंचने से पूरी तरह परहेज किया जाए। कई लोग मस्से को हटाने के लिए नाखून से खुरचने, धागे से कसकर बांधने, ब्लेड या कैंची से काटने अथवा गर्म वस्तु से दागने जैसी खतरनाक गलतियां करते हैं। ऐसी जबरन कोशिशों से त्वचा कट जाती है, तेज खून बहने लगता है और जीवाणु संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से चेहरे पर की गई इस तरह की नादानी बाद में गहरे और कभी न मिटने वाले निशान छोड़ जाती है।
त्वचा की सुरक्षित देखभाल के लिए क्या करें
डॉ. राजकुमार सलाह देते हैं कि घरेलू स्तर पर किसी आक्रामक उपाय के बजाय त्वचा को साफ-सुथरा और नम रखना ही सबसे बेहतर तरीका है। यदि तिल या मस्से के आसपास की सतह पर सूखापन महसूस होता है, तो वहां सादा एलोवेरा जेल लगाया जा सकता है, जो त्वचा को शीतलता और जरूरी नमी प्रदान करता है। बहुत ज्यादा रूखापन दिखने पर आसपास के हिस्से में हल्का सा नारियल तेल लगाना भी सुरक्षित रहता है। इसके साथ ही धूप की हानिकारक किरणों से बचने के लिए चेहरे और गर्दन पर नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाने की आदत डालनी चाहिए, ताकि पिगमेंटेशन और धूप से जुड़ी अन्य जटिलताएं न बढ़ें।
डॉक्टर से कब संपर्क करना अनिवार्य है
यदि किसी तिल या मस्से के आकार में अचानक तेजी से वृद्धि होने लगे, उसका प्राकृतिक रंग या बनावट बदलने लगे, उसमें लगातार दर्द, असहनीय खुजली होने लगे या उससे खून का रिसाव शुरू हो जाए, तो किसी भी घरेलू टोटके को तुरंत रोक देना चाहिए। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है, इसलिए बिना समय गंवाए किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ से पूरी जांच कराना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।



















