उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में 6 अक्टूबर की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब लगभग 10:23 बजे अचानक तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। धरती में कंपन होते ही चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, पौड़ी, बागेश्वर, ऊधम सिंह नगर तथा प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में लोग दहशत में आ गए। झटकों का अहसास होते ही बड़ी संख्या में लोग इमारतों और घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षा के लिहाज से काफी देर तक खुली जगहों पर डटे रहे।
पहाड़ी इलाकों में दिखा सबसे ज्यादा असर
इस भूकंपीय गतिविधि की तीव्रता पहाड़ी जिलों में काफी अधिक महसूस की गई। रुद्रप्रयाग में रहने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने लगभग 5 से 6 सेकेंड तक लगातार जमीन को थरथराते हुए महसूस किया। रात के शांत माहौल में अचानक आए इन झटकों से चमोली जिले में भी लोग सहम गए और तुरंत सुरक्षित स्थानों की तरफ दौड़ पड़े। इसके अलावा उत्तरकाशी और बागेश्वर में भी लोगों ने स्पष्ट कंपन की सूचना दी। कुमाऊं मंडल के नैनीताल और हल्द्वानी शहरों में भी इमारतों के हिलने से नागरिकों में घबराहट फैल गई।
चमोली के पास केंद्र और 4.6 की तीव्रता
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, एंड्रॉइड अर्थक्वेक अलर्ट सिस्टम ने इस भूकंप की तीव्रता 4.6 दर्ज की है। इस झटके का प्राथमिक केंद्र चमोली जनपद के भीतर नंदप्रयाग और नंदा देवी नेशनल पार्क के आसपास के इलाके में बताया गया है। हालांकि, घटना के सटीक केंद्र और रिक्टर पैमाने पर प्रमाणित तीव्रता से जुड़े अंतिम विवरण के लिए आधिकारिक वैज्ञानिक एजेंसियों की विस्तृत रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। इसी दौरान दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी रिक्टर स्केल पर 4.9 तीव्रता के झटके दर्ज किए जाने की सूचना आई, जिससे वहां भी लोग थर्रा उठे।
प्रशासन की सतर्कता और नुकसान की स्थिति
राहत की बात यह रही कि इतनी तीव्र हलचल के बावजूद किसी भी जिले से जान या माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। झटके रुकने के तुरंत बाद लोग इंटरनेट, सोशल मीडिया और पड़ोसियों के संपर्क से हालात का जायजा लेते नजर आए। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी जमीनी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों ने जनता से संयम बरतने, घबराहट से बचने और किसी भी अनपुष्ट अफवाह पर भरोसा न करने की अपील की है। फिलहाल सभी प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और सामान्य बताई गई है।
























