मानसून के थमते ही उत्तराखंड का प्रसिद्ध पर्वतीय शहर नैनीताल अपनी प्राकृतिक छटा से हर किसी का मन मोह रहा है। लगातार हो रही बारिश और बादलों का दौर समाप्त होने के बाद वादियों में फैली गहरी हरियाली और साफ नीला आसमान पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। झीलों की नगरी के नाम से मशहूर इस हिल स्टेशन पर इन दिनों न तो चुभने वाली गर्मी है और न ही कंपकंपाने वाली कड़ाके की ठंड, जिससे वातावरण बेहद शांत और मनभावन बन गया है। चारों दिशाओं से आने वाली ठंडी बयार और शांत फिजाएं छुट्टियों का आनंद लेने पहुंचे सैलानियों को तरोताजा कर रही हैं।
साफ आसमान तले निखरीं चोटियां और गहराती हरियाली
बरसात के मौसम में अक्सर नैनीताल के ऊंचे पहाड़ घने कोहरे और बादलों की मोटी चादर में लिपटे रहते थे, जिससे दूर-दूर के नज़ारे ओझल हो जाया करते थे। अब बादलों के छंटने से स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाओं की ऊंची चोटियां स्पष्ट दिखने लगी हैं। मानसून के पानी से नहाई पहाड़ियों की हरियाली पहले से कहीं ज्यादा चमकदार और जीवंत नजर आ रही है। खुले आसमान के नीचे हरे-भरे पर्वतों के बीच बसी बस्तियों का दृश्य अद्भुत प्रतीत होता है। यहां पहुंच रहे पर्यटक इस प्राकृतिक सौंदर्य को घंटों निहारते हुए अपनी यात्रा को तस्वीरों और कैमरों में कैद करते देखे जा रहे हैं।
नैनी झील में बोटिंग का आनंद और पानी में पहाड़ों का अक्स
शहर के केंद्र में स्थित नैनी झील इस समय पर्यटकों के आकर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र बनी हुई है। बारिश के बाद झील का जलस्तर और पानी की स्वच्छता देखते ही बनती है। जब आसपास खड़े हरे-भरे पहाड़ों की परछाई झील के शांत पानी पर पड़ती है, तो वह दृश्य देखते ही बनता है। सैलानी बड़ी तादाद में रंग-बिरंगी नावों में बैठकर नौकायन का आनंद ले रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर नाव चलाने वाले वीरेंद्र पवार का कहना है कि अक्टूबर के दौरान मौसम काफी सुखद रहता है और हल्की ठंडक भी दस्तक दे देती है। ऐसे समय में दोपहर के समय निकलने वाली मीठी और गुनगुनी धूप के बीच काफी संख्या में पर्यटक बोटिंग करने पहुंचते हैं, जिससे झील पर पूरा दिन रौनक बनी रहती है।
खतड़ुवा लोकपर्व के साथ सर्दियों की आहट
कुमाऊं क्षेत्र में लोकपर्व खतड़ुवा मनाए जाने के साथ ही पहाड़ों में पारंपरिक रूप से शीतकाल के आगमन का संकेत माना जाता है। इस त्योहार के बाद से ही वातावरण में क्रमिक बदलाव दर्ज किया जाता है। दिन के समय खिली धूप राहत देती है, जबकि सूरज ढलते ही शाम और तड़के सुबह हल्की सिहरन महसूस होने लगती है। आने वाले हफ्तों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे ठंड का असर और गहराएगा। मैदानी क्षेत्रों में जहां अब भी उमस और गर्मी लोगों को परेशान करती है, वहीं नैनीताल का यह बदला हुआ मिजाज यात्रियों को ताजगी भरा सुकून दे रहा है।
अक्टूबर की सैर सैलानियों के लिए क्यों है खास
अक्टूबर का पूरा महीना नैनीताल भ्रमण के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है। मानसून के बाद धुली-धुली वादियां, शीतल पवन और चारों तरफ फैली प्राकृतिक सुंदरता इस समय अपने चरम पर होती है। झील किनारे पैदल टहलना, प्रमुख पर्यटन स्थलों का दीदार करना और दोपहर की धूप सेकना पर्यटकों को एक यादगार अनुभव प्रदान करता है। यही कारण है कि बारिश का मौसम खत्म होते ही शहर के होटल, मॉल रोड और प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर सैलानियों की खासी चहल-पहल दिखाई दे रही है।























