घर के भीतर रखी हर एक वस्तु का संबंध सकारात्मक अथवा नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह से जुड़ा होता है। वास्तु शास्त्र के स्थापित नियमों के मुताबिक, किसी भी सामग्री को सही दिशा और उपयुक्त स्थान पर रखने से जीवन में शुभता और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसके विपरीत, यदि पवित्र और संवेदनशील वस्तुओं को उनके निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के बजाय लापरवाही से रख दिया जाए, तो घर में गहरा वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से कुछ ऐसी पूजनीय चीजें हैं जिन्हें भूलकर भी फर्श या सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पारिवारिक शांति भंग होती है और आर्थिक तंगी घेर सकती है।
शिवलिंग को फर्श पर स्थापित करने से बचें
भगवान शिव के निराकार स्वरूप शिवलिंग को अत्यधिक संवेदनशील और पूजनीय माना जाता है। घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने के लिए नर्मदेश्वर अथवा पारद शिवलिंग को स्थापित करने का परामर्श दिया जाता है। इस पावन प्रतीक को सदैव घर के पूजा स्थल में या फिर ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में किसी स्वच्छ और ऊंचे चबूतरे अथवा वेदी पर स्थापित करना चाहिए। एक बार शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा या विधिवत स्थापना हो जाने के बाद उसे बार-बार हटाना उचित नहीं माना जाता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवलिंग को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा चक्र बाधित होता है और जीवन में गंभीर उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
शालिग्राम को जमीन पर कभी न रखें
शालिग्राम शिला को साक्षात भगवान विष्णु का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया है। घर की सुख-समृद्धि के लिए शालिग्राम का पूजन अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है, परंतु इनके रखरखाव को लेकर कड़े नियम निर्धारित हैं। वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, शालिग्राम को पूजा घर के भीतर उपयुक्त स्थान पर प्रतिष्ठित किया जा सकता है या फिर तुलसी के पौधे के समीप स्थापित किया जा सकता है। शालिग्राम को सीधे फर्श अथवा जमीन पर रख देना भारी दोष माना जाता है, जिससे घर की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण होने लगती है।
देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और तस्वीरें
घर में मौजूद देवी-देवताओं की तस्वीरों और मूर्तियों को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। कई बार सफाई या पूजा के दौरान लोग मूर्तियों अथवा चित्रों को फर्श पर रख देते हैं, जो वास्तु के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। किसी भी देवी अथवा देवता की मूर्ति या तस्वीर को सीधे जमीन पर रखने से वास्तु दोष का प्रभाव झेलना पड़ता है, जो घर के सदस्यों की प्रगति में रुकावट बन सकता है।
शंख और दैवीय यंत्रों का मान-सम्मान
पूजा-पाठ में प्रयुक्त होने वाला शंख और विभिन्न यंत्र आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। शंख को भगवान विष्णु का प्रिय प्रतीक माना गया है, इसलिए इसे फर्श पर रखना उनके प्रति अनादर दर्शाने के समान माना जाता है। इसी प्रकार, देवी-देवताओं से जुड़े श्रीयंत्र अथवा अन्य यंत्र दैवीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत होते हैं। जब इन यंत्रों या शंख को अनुचित तरीके से सीधे जमीन पर रख दिया जाता है, तो इनसे मिलने वाली सकारात्मक तरंगे बाधित होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप घर में कलह, अशांति और गंभीर आर्थिक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पवित्र धार्मिक ग्रंथों और पुस्तकों का रखरखाव
वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे पवित्र ग्रंथ ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के सर्वोच्च स्रोत हैं। इन पावन पुस्तकों को कभी भी फर्श अथवा जमीन पर नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, धार्मिक पुस्तकों को जमीन पर रखने की भूल करने से ज्ञान, विवेक और निर्णय लेने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है। इन्हें सदैव किसी स्वच्छ आसन, चौकी या अलमारी में सम्मानपूर्वक ही रखा जाना चाहिए।



















