पश्चिम बंगाल की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा में जेसोर रोड के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे एक संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक और उसके साथी को दबोच लिया है। पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान राणा रऊफ खालिद उर्फ वहाब आलम और मोहम्मद इजाज के रूप में हुई है। एसटीएफ की शुरुआती छानबीन के दौरान आरोपियों के कब्जे से कोलकाता स्थित भारतीय सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय फोर्ट विलियम का बेहद संवेदनशील नक्शा और कई तस्वीरें बरामद की गई हैं। इस गंभीर खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं और दोनों आरोपियों को बारासात स्थित अदालत में पेश करके 14 दिनों की पुलिस कस्टडी में ले लिया गया है।
फोर्ट विलियम के नक्शे और तस्वीरों की बरामदगी से बढ़ी चिंता
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे अहम और संवेदनशील पहलू सैन्य ठिकाने से जुड़ी सामग्री की बरामदगी है। फोर्ट विलियम भारतीय सेना की रणनीतिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण पूर्वी कमान का केंद्र है। एसटीएफ अब इस बात का पता लगाने में पूरी ताकत झोंक रही है कि आरोपियों तक फोर्ट विलियम का नक्शा और तस्वीरें किस माध्यम से पहुंचीं और इनका इस्तेमाल किस साजिश को अंजाम देने के लिए किया जाना था। जांचकर्ता इस बात की भी बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या यह गतिविधि भारतीय सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारी एकत्र करने के किसी सुनियोजित खुफिया अभियान का हिस्सा थी।
मोबाइल फोरेंसिक, डिलीट किए गए चैट और विदेशी संपर्क
आरोपियों के डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। उनके पास से मिले मोबाइल फोन की शुरुआती पड़ताल में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट और फोन नंबर पाए गए हैं। इतना ही नहीं, जांचकर्ताओं को यह भी पता चला है कि गिरफ्तारी से ठीक पहले कई संदिग्ध फोन नंबर और चैट संदेशों को जानबूझकर मिटाया गया था। एसटीएफ के तकनीकी विशेषज्ञ अब डिलीट किए गए इस डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी भारत में किन लोगों के संपर्क में थे, उनके बीच किस प्रकार का संवाद हुआ था और क्या रक्षा तंत्र से जुड़ी कोई अति-गोपनीय सूचना देश के बाहर भेजी गई थी।
आईएसआई से संभावित संबंध और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी
जांच एजेंसी को शक है कि मुख्य आरोपी राणा रऊफ खालिद के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से जुड़े हो सकते हैं। इसी आशंका के आधार पर भारत के भीतर उसकी गतिविधियों, उसकी आवाजाही के रूट और उसके नेटवर्क का ब्योरा खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही पेट्रापोल और घोजाडांगा सीमावर्ती क्षेत्रों के आसपास सैन्य गतिविधियों और बुनियादी ढांचों के संबंध में जानकारी जुटाए जाने की कोशिशों की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या सीमा पार से संचालित किसी बड़े तंत्र के जरिए भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने की कोशिश की जा रही थी।
15 अगस्त से पहले अलर्ट और फर्जी पहचान पत्र नेटवर्क की जांच
आगामी 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर किसी भी तरह की बड़ी अप्रिय घटना या आतंकी मंसूबों की आशंका को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। एसटीएफ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और सभी कोणों से तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। इस मामले में सेना की सैन्य खुफिया (मिलिट्री इंटेलिजेंस) एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया गया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा व्यवस्था और जाली भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार करने वाले अवैध गिरोहों की भूमिका की भी समानांतर रूप से जांच की जा रही है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी रऊफ का हाबरा अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया था, जिसके बाद दोनों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।



















