पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजा में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राज्य में बड़ा बदलाव लाने की बात कही गई। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित सामूहिक भगवद्गीता पाठ के भव्य कार्यक्रम में बोलते हुए यह घोषणा की गई कि आने वाले समय में धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर कोई पाबंदी नहीं होगी और सनातन संस्कृति से जुड़े लोगों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा। इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर भगवद्गीता के श्लोकों का उच्चारण किया और राज्य के वर्तमान राजनीतिक माहौल पर अपनी बात रखी।
गौमाता की सुरक्षा और संतों का सम्मान
कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में बांगुर जागरण मंच के तत्वावधान में इस विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर यह घोषणा की गई कि राज्य के हालात अब पूरी तरह बदल चुके हैं और अब किसी भी स्थिति में गौमाता की रक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जो लोग भी साधु-संतों का अपमान करने का दुस्साहस करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और सीधा जेल भेजा जाएगा। आयोजकों और वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बंगाल की धरती पर अब संस्कृति और धर्म का पालन करने वालों को किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है।
खुले तौर पर धार्मिक अनुष्ठान करने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान वक्ता ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि अपने धर्म का पालन करने या उसका प्रचार-प्रसार करने में किसी भी प्रकार की झिझक या डर की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। लोगों से खुलकर भगवद्गीता का पठन करने, उसका वितरण करने तथा हनुमान चालीसा बांटने की अपील की गई। इसके अलावा हरे कृष्ण मंत्र का निरंतर जाप करने और शंख ध्वनि करने का भी आह्वान किया गया। यह रेखांकित किया गया कि अब मौसम और राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं, इसलिए सनातन प्रेमियों को भयभीत होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
संस्कृति के प्रतीकों और एकता पर जोर
संबोधन के दौरान इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया कि राज्य में अब एक ऐसी सरकार आ चुकी है जो टीका, शिखा, धोती और तुलसी के मूल्यों का सम्मान करती है और गौमाता की संरक्षिका है। इस धार्मिक महाकुंभ में करीब 11 हजार लोगों ने एक साथ समवेत स्वर में भगवद्गीता का पाठ कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। सभा में मौजूद विशाल जनसमूह को यह विश्वास दिलाया गया कि संतों और गुरुओं का अनादर करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल की हवा खिलाई जाएगी।
विभाजनकारी ताकतों और नारेबाजों से सतर्कता
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ-साथ इस सभा में राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उपस्थित नागरिकों से अपील की गई कि वे उन विभाजनकारी ताकतों के प्रति पूरी तरह सतर्क और चौकस रहें जो समाज को पांतने का प्रयास करती हैं। उन ताकतों से सावधान रहने की हिदायत दी गई जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ अनुचित नारे लगाती हैं। विशेष तौर पर देश विरोधी मानसिकता वाले समूहों का हवाला देते हुए कहा गया कि जो लोग राष्ट्र विरोधी बातें करते हैं, उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
टुकड़े-टुकड़े गैंग के खिलाफ एकजुट होने की अपील
भाषण के अंत में देश के भीतर सक्रिय उन तत्वों पर तीखा प्रहार किया गया जो देश की अखंडता को खंडित करने का प्रयास करते हैं। यह कहा गया कि समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर उन ताकतों का मुकाबला करना होगा जिन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग के रूप में जाना जाता है। ऐसे लोगों पर नजर रखने की बात कही गई जो कश्मीर की स्वतंत्रता जैसे अलगाववादी और देश विरोधी नारे लगाते हैं। यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र विरोधी और विभाजनकारी सोच रखने वाले संगठनों के खिलाफ हर भारतीय को अपनी वैचारिक और सामाजिक एकजुटता बनाए रखनी होगी ताकि देश की सुरक्षा पर कोई आंच न आ सके।





















