अमेरिका की पल-पल बदलती रणनीति के बीच समंदर में अपने नाविकों को कैसे सुरक्षित रख रहा है भारत, समझिए पूरा मामलादुनिया
14 घंटे पहले· 1

अमेरिका की पल-पल बदलती रणनीति के बीच समंदर में अपने नाविकों को कैसे सुरक्षित रख रहा है भारत, समझिए पूरा मामला

ईरान-अमेरिका टकराव से खाड़ी में बढ़ी टेंशन के बीच भारत ने अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक और समुद्री स्तर पर कदम तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय ने इस हफ्ते दूसरी बार अमेरिकी प्रतिनिधि को तलब किया है।

खाड़ी के इलाके में ईरान और अमेरिका की जंग से लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत ने समंदर में काम कर रहे अपने नागरिकों की हिफाजत को लेकर कूटनीतिक और समुद्री, दोनों मोर्चों पर सक्रियता बढ़ा दी है। हकीकत यह है कि Strait Of Hormuz में तैनात भारतीय नाविक रह-रहकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य कार्रवाइयों की जद में आ रहे हैं, और यही बात भारत की चिंता का सबसे बड़ा कारण बन गई है। यही वजह है कि अब खाड़ी और अरब सागर से होकर गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर सवार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा देश की प्राथमिकताओं में शामिल हो चुकी है।

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिनिधि को किया तलब

भारत के विदेश मंत्रालय ने आज शुक्रवार को इस हफ्ते दूसरी बार अमेरिकी दूतावास के उप मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया। यह कदम उस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उठाया गया, जिसमें ओमान तट के पास करीब 20 भारतीय चालक दल वाले एक व्यापारिक जहाज पर हमले की बात कही गई थी। इस घटना ने भारत सरकार की परेशानी को और गहरा कर दिया है।

बार-बार हो रहे हमलों से गहराई भारत की चिंता

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्रालय में अमेरिकी मामलों के एडिशनल सेक्रेटरी ने जेसन मीक्स से मुलाकात की और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर भारत की गहरी चिंता उनके सामने रखी। भारत ने दो-टूक कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक व्यापारिक जहाजों को नुकसान से बचाना बेहद आवश्यक है।

दुनिया के कुल समुद्री कर्मियों में करीब 10 फीसदी भारतीय

ध्यान देने योग्य है कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान-अमेरिका के टकराव की वजह से समुद्री कारोबार को पहले से ही बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती टेंशन को देखते हुए कई शिपिंग कंपनियां अपने समुद्री रास्तों और सुरक्षा इंतजामों की दोबारा समीक्षा कर रही हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया भर के कुल समुद्री कर्मियों में करीब 10 फीसदी भारतीय हैं। हजारों भारतीय नाविक कार्गो शिप, तेल टैंकरों और दूसरे व्यापारिक जहाजों पर तैनात हैं, जो नियमित रूप से खाड़ी और अरब सागर के Strategic Maritime Routes से होकर गुजरते हैं।

नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा की मांग तेज

MT Jalveer पर हाल ही में हुए कथित मिसाइल हमले ने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स की मानें तो बीते दिनों के हमलों में कई भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। इसी के चलते यह मांग भी जोर पकड़ने लगी है कि सैन्य अभियानों में और अधिक पारदर्शिता बरती जाए तथा व्यावसायिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

समुद्री सुरक्षा तंत्र बनाने पर भारत का जोर

खास बात यह है कि जहाजों पर मंडराते बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत एक पारदर्शी Maritime De-confliction Mechanism बनाने की पुरजोर वकालत कर रहा है। इस व्यवस्था के तहत सैन्य बलों और कमर्शियल शिपिंग कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल कायम हो सकेगा, ताकि संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रू वाले जहाज गलती से किसी हमले का निशाना न बन जाएं।

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