कैस्पियन सागर में रूसी और ईरानी सैन्य रसद आपूर्ति मार्गों पर यूक्रेन ने सीधा प्रहार किया है। इस समुद्री कार्रवाई के बाद भड़की तेहरान की चेतावनियों को कीव ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह पहली बार है जब रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का सीधा संबंध पश्चिम एशिया के मोर्चे से जुड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। शनिवार को हुए इस हमले के तुरंत बाद यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्रेई सिबीहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान की ओर से दी जा रही धमकियां पूरी तरह से निराधार और अन्यायोचित हैं।
रूस की सैन्य मदद और ईरानी हथियारों का उपयोग
विदेश मंत्री ने अपने बयान में तेहरान के प्रशासन को रूसी आक्रामकता का सीधा साझेदार करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2022 में शुरू हुए इस भीषण संघर्ष के बाद से ही ईरानी हथियारों ने मास्को की युद्ध मशीन को ईंधन मुहैया कराया है, जिसके कारण कई यूक्रेनी नागरिकों की जान जा चुकी है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी शनिवार को इस बात की पुष्टि की थी कि यूक्रेनी सुरक्षा बलों ने कैस्पियन सागर क्षेत्र में लंबी दूरी के हमलों के दौरान उत्कृष्ट परिणाम हासिल किए हैं, जिसमें सैन्य रसद ले जाने वाले पोत भी शामिल थे।
यूक्रेन की खुफिया और सुरक्षा एजेंसी एसबीयू ने जानकारी दी कि उनके ड्रोनों ने उत्तरी कैस्पियन सागर में स्थित एक तेल रिग, एक रूसी मिसाइल पोत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले कई मालवाहक जहाजों को सफलतापूर्व निशाना बनाया। ईरान के सरकारी समाचार माध्यमों से बातचीत करते हुए मास्को में तैनात ईरानी राजदूत काज़म जलाली ने बताया कि जिस 'अन्ना' नामक जहाज को निशाना बनाया गया, वह वोल्गा नदी के मुहाने से लगभग पांच किलोमीटर यानी तीन मील की दूरी पर लंगर डाले हुए था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती बयानबाजी और कूटनीतिक मोर्चेबंदी
इजराइल में यूक्रेन के राजदूत येवगेन कोर्नीइचुक ने दावा किया कि यह पोत किसी भी तरह का नागरिक सामान नहीं ढो रहा था, बल्कि इसके जरिए ईरान से रूस के लिए ड्रोन और मिसाइल के कलपुर्जे ले जाए जा रहे थे। उन्होंने इजराइली मीडिया संस्थान एन12 से बात करते हुए यह भी रेखांकित किया कि यूक्रेन और इजराइल दोनों ही अलग-अलग मोर्चों पर एक ही बुराई की धुरी का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग काफी पुराना और गहरा रहा है। साल 2022 से ही ईरान ने रूस को अपने घरेलू स्तर पर निर्मित शाहेद ड्रोन की आपूर्ति शुरू कर दी थी, जिन्हें बाद में रूसी सेना ने अपने हिसाब से संशोधित कर यूक्रेनी शहरों को दहलाने के लिए इस्तेमाल किया।
सप्ताहांत में स्काई न्यूज को दिए गए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने खुलासा किया कि तेहरान अब रूस को बैलिस्टिक मिसाइलें भेजने की योजना बना रहा है, हालांकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि कम दूरी की मिसाइलों की आपूर्ति साल 2024 से ही शुरू हो चुकी थी। कैस्पियन सागर हमेशा से मास्को और तेहरान के बीच एक रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक और आपूर्ति मार्ग रहा है। कीव लंबे समय से तेहरान पर उन ड्रोन हमलों में मिलीभगत का आरोप लगाता आया है जिनकी वजह से सैकड़ों यूक्रेनी नागरिकों की मौत हो चुकी है, लेकिन कैस्पियन सागर में हुआ यह ताजा हमला ऐसा पहला मौका है जब यूक्रेन ने सीधे तौर पर किसी ईरानी जहाज को अपनी कार्रवाई का केंद्र बनाया है।
तेहरान का तीखा रुख और प्रतिबंधों का दौर
इस हमले से भड़के ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इस कार्रवाई में एक नाविक की मौत हो गई है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने कभी भी रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में सीधा हस्तक्षेप नहीं किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस हमले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार देते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई इजराइल के इशारे पर यूरोप को इस युद्ध में घसीटने के लिए की गई है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि इस घटना को यूं ही जाने नहीं दिया जा सकता। इसके जवाब में आंद्रेई सिबीहा ने अरागची के उस पोस्ट को साझा करते हुए उस पर ईरानी झूठ करार दिया।
इसके साथ ही यूक्रेनी विदेश मंत्री ने तेहरान पर यह भी आरोप लगाया कि वह दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है ताकि यूक्रेनी बंदरगाहों से अनाज ले जाने वाले जहाजों पर रूस द्वारा किए जा रहे हमलों से पर्दा डाला जा सके। कीव का तर्क है कि रूस के ये हमले वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन लगातार रूस के उन तेल टैंकरों के बेड़े को निशाना बना रहा है जिन्हें शैडो फ्लीट कहा जाता है, ताकि क्रेमलिन की कमाई के सबसे बड़े स्रोत पर लगाम लगाई जा सके। तेल भंडारों पर ड्रोन हमलों के साथ-साथ ऑनलाइन खुदरा स्टोर वाइबररीज के गोदामों को निशाना बनाने जैसी कार्रवाइयों को राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की लंबी दूरी का प्रतिबंध अभियान बताते हैं, जिसका रूसी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है।
रणनीतिक नफा-नुकसान पर विशेषज्ञों की राय
हालांकि, कुछ रक्षा विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यूक्रेन के लिए ईरान के साथ सीधे टकराव के मैदान में उतरना एक जोखिम भरा कदम हो सकता है। पूर्व खुफिया अधिकारी इवान स्टुपैक ने बीबीसी को बताया कि इस पूरी रणनीति का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक मार्गों को बाधित करना और दुश्मन को अधिकतम क्षति पहुंचाना है, लेकिन कीव के लिए ईरान के साथ एक और नया मोर्चा खोलना समझदारी नहीं है। दूसरी ओर, आर्मड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट से जुड़ी ओल्गा पोलिशचुक का कहना है कि कैस्पियन सागर पर हुआ यह हमला तेहरान के खिलाफ कोई नया मोर्चा खोलने की कोशिश कम और रूसी युद्ध मशीन का समर्थन करने वाले नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति का विस्तार अधिक है। उनके अनुसार, इस आपूर्ति मार्ग को बाधित करके कीव पारंपरिक युद्धक्षेत्र के दायरे से बाहर भी मास्को की रसद श्रृंखला पर दबाव बढ़ाने में सफल हो रहा है.



















