ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव की सियासी जंग अब दो प्रमुख चेहरों के सीधे टकराव में तब्दील हो चुकी है। पहले दौर के मतदान के नतीजे आने के बाद यह तय हो गया है कि देश के अगले राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव 25 अक्टूबर को होने वाले दूसरे दौर की वोटिंग से होगा। पहले चरण में मैदान में उतरे प्रत्याशियों में से कोई भी 50 प्रतिशत से अधिक मत जुटाने में सफल नहीं रहा। लगभग 97 प्रतिशत मतपत्रों की गणना पूरी होने तक दक्षिणपंथी रुझान वाले नेता फ्लावियो बोल्सोनारो ने 47.45 प्रतिशत वोट हासिल कर पहली पोजिशन हासिल की, वहीं वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को 44.66 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
दो पीढ़ियों और विरोधी विचारधाराओं की चुनावी जंग
यह चुनावी मुकाबला ब्राजील के राजनीतिक भविष्य को तय करने वाली दो सर्वथा भिन्न दिशाओं के बीच सिमट गया है। मैदान के एक छोर पर 80 वर्षीय लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा खड़े हैं, जो चौथी मर्तबा राष्ट्रपति भवन की कमान संभालने का लक्ष्य लेकर उतरे हैं। दूसरी तरफ 45 साल के फ्लावियो बोल्सोनारो हैं, जो अपने पिता एवं पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो की दक्षिणपंथी विरासत को आगे बढ़ाते हुए शीर्ष पद पर काबिज होने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
ब्राजील की दो चरणीय चुनावी प्रक्रिया का गणित
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनने के लिए दो दौर की मतदान व्यवस्था लागू है। चुनावी समर के पहले चक्र में कई दावेदार अपनी किस्मत आजमाते हैं। यदि इस चरण में किसी एक दावेदार को कुल वैध मतों का 50 प्रतिशत से अधिक समर्थन हासिल हो जाए, तो वह उसी वक्त विजेता घोषित होकर सीधे राष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है। पूर्ण बहुमत किसी को न मिलने की दशा में, शीर्ष दो स्थान पाने वाले प्रत्याशियों को लेकर दूसरे दौर का मुकाबला कराया जाता है। इस निर्णायक चक्र में जो प्रत्याशी अधिक वोट जुटाता है, वही अगले चार साल के कार्यकाल के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति पद की शपथ लेता है।
पहले दौर के नतीजे और लूला के सामने चुनौतियां
इस बार पहले चक्र के दौरान कुल 12 प्रत्याशी चुनावी ताल ठोक रहे थे। मतों की गिनती पूरी होते ही स्थिति बिल्कुल स्पष्ट हो गई कि मुकाबला सिर्फ लूला और फ्लावियो के इर्द-गिर्द सिमट चुका है। फ्लावियो बोल्सोनारो ने पूर्व अनुमानों और चुनावी सर्वे के आकलन को पीछे छोड़ते हुए बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया और उम्मीद से कहीं ज्यादा समर्थन जुटाने में कामयाब रहे। इसके उलट, वर्तमान राष्ट्रपति लूला को मतदाताओं का भरोसा जीतने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि देश की जनता महंगाई, घरेलू कर्ज के बढ़ते बोझ, अपराध की स्थिति और टैक्स से जुड़े मसलों को लेकर गंभीर चिंताओं से घिरी रही।
25 अक्टूबर के रन-ऑफ पर टिकीं निगाहें
अब दोनों शीर्ष दावेदार 25 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दूसरे दौर के रण में सीधे मुकाबले के लिए तैयार हैं। इस अंतिम चरण में उन अन्य 10 प्रत्याशियों के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे, जिन्होंने पहले दौर में लूला या फ्लावियो को वोट नहीं दिया था। यही तटस्थ और अन्य रुझान वाले मत तय करेंगे कि लूला अपने नाम एक और कार्यकाल दर्ज करा पाते हैं या फिर सत्ता की बागडोर एक बार फिर बोल्सोनारो परिवार के हाथों में लौटती है।



















