पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के खुजदार जिले के भीतर जमीनी और हवाई हमलों का सिलसिला काफी तेज कर दिया है। वाध, ओरनाच और जेहरी जैसे इलाकों में सैन्य हेलीकॉप्टरों के जरिए लगातार शेलिंग और बमबारी की जा रही है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में भयानक दहशत का माहौल बना हुआ है। हाल ही में वाध इलाके में हुई ताजा गोलाबारी में एक आम नागरिक की जान जाने की बात सामने आई है। इससे ठीक एक हफ्ते पहले भी सेना की इसी तरह की हिंसक कार्रवाई में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई महिलाएं तथा मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
हेलीकॉप्टरों से निगरानी और तेज हमले
विभिन्न स्थानीय माध्यमों से मिली जानकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य हेलीकॉप्टरों ने ओरनाच के सुरगढ़ क्षेत्र में कई स्थानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। पूरे इलाके में इन सैन्य हेलीकॉप्टरों की लगातार उड़ानें और निगरानी का दौर बदस्तूर जारी है। रिपोर्टों से पता चलता है कि वाध, ओरनाच और जेहरी के इन तमाम क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से लगातार सैन्य अभियान चलाया जा रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
रिहायशी बस्तियों को निशाना बनाए जाने के आरोप
स्थानीय निवासियों और मीडिया रिपोर्टों में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि इस सैन्य कार्रवाई के दौरान जानबूझकर आम नागरिकों वाली बस्तियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले हफ्ते जब खुजदार के ड्रखलाव-गस्लैती क्षेत्र में गोलाबारी की गई थी, तब अब्दुल कादिर नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी और महिलाओं तथा बच्चों समेत कई अन्य लोग जख्मी हो गए थे। इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विरोध जताते हुए सड़क पर शव रखकर मुख्य हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया था। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर यह कहना था कि सेना ने नागरिकों को टारगेट किया है।
चौदह साल के छात्र की हत्या का गंभीर दावा
मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले संगठन बलूच यकजेहती कमेटी ने एक बेहद संगीन दावा पेश करते हुए कहा है कि चौदह साल के एक छात्र शहजाद की पच्चीस जुलाई को हत्या कर दी गई थी। संगठन का आरोप है कि शहजाद पिछले एक साल से अधिक समय से लापता चल रहा था और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस वीभत्स घटना के लिए बीवाईसी ने सीधे तौर पर पाकिस्तान समर्थित तथाकथित डेथ स्क्वाड को जिम्मेदार ठहराया है।
छात्र कार्यकर्ता के अपहरण और लापता होने की बात
एक अन्य मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने भी गंभीर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि यूनुस बलूच नामक एक छात्र कार्यकर्ता को पच्चीस जुलाई को क्वेटा में स्थित उनके अपने घर से सुरक्षा बलों द्वारा जबरन उठा लिया गया था। संगठन का कहना है कि तब से लेकर अब तक उनका कोई अता-पता नहीं चल पाया है और उनके परिवार को भी उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
मानवाधिकार संगठनों की गहरी चिंता
बीवाईसी और बीवीजे जैसे प्रमुख मानवाधिकार संगठनों का ऐसा मानना है कि बलूचिस्तान के भीतर लोगों को जबरन गायब किए जाने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लोगों की हत्या करने और आम नागरिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इन संगठनों ने महिलाओं, बच्चों और सामान्य नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का रुख
दूसरी ओर, पाकिस्तान की सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियों का पारंपरिक रूप से यही कहना रहा है कि बलूचिस्तान में चलाए जा रहे इन सैन्य अभियानों का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों तथा सशस्त्र उग्रवादी समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना और पूरे क्षेत्र में शांति व सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में नागरिकों को निशाना बनाए जाने, लोगों को जबरन गायब करने और डेथ स्क्वाड से जुड़े तमाम आरोपों की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है। इस पूरे मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।



















