पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के परिवार पर कानूनी शिकंजा और कड़ा हो गया है। लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद उनकी तीनों बहनों अलीमा खान, नोरीन नियाजी और डॉ. उज्मा खान को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिलेगी। पंजाब की प्रांतीय सरकार ने प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए तीनों की हिरासत को अगले 30 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है। एक महीने से अधिक समय से सलाखों के पीछे मौजूद इन तीनों महिलाओं की तत्काल रिहाई की कोशिशों को इस प्रशासनिक कदम से बड़ा झटका लगा है।
लाहौर हाई कोर्ट में दी गई प्रशासनिक आदेश की सूचना
इस प्रशासनिक फैसले का खुलासा उस वक्त हुआ जब अदालत में उनकी रिहाई को लेकर सुनवाई चल रही थी। पंजाब के एक सहायक महाधिवक्ता ने सोमवार को लाहौर हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर यह आधिकारिक बयान दिया कि लाहौर के उपायुक्त की सिफारिश के आधार पर प्रांतीय प्रशासन ने तीनों बहनों की हिरासत अवधि में 30 दिनों का विस्तार कर दिया है। राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए विधि अधिकारी द्वारा हिरासत बढ़ाने का आदेश प्रस्तुत किए जाने के बाद अदालत ने उनकी रिहाई की मांग से जुड़ी याचिका का औपचारिक रूप से निपटारा कर दिया।
भांजे शहरेज ने अदालत में दी थी गिरफ्तारी को चुनौती
हाई कोर्ट में यह कानूनी अर्जी अलीमा खान के बेटे शहरेज की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी मां और दोनों मौसियों की कानूनी कस्टडी को अनुचित बताते हुए अदालत से उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। हालांकि, प्रांतीय सरकार द्वारा सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों के तहत हिरासत की मियाद बढ़ाए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया एक नए मोड़ पर पहुंच गई है, जिससे परिवार की तुरंत राहत पाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश के तहत की गई थी कार्रवाई
प्रशासन ने तीनों बहनों को पंजाब सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश, 1960 के कानूनी प्रावधानों के तहत निररुद्ध किया हुआ है। इस कानून का उपयोग स्थानीय प्रशासन कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से करता है। मामले के विवरण के अनुसार, अलीमा खान को 20 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। इसके ठीक अगले दिन प्रशासन ने डॉ. उज्मा खान और नोरीन नियाजी को भी अपनी कस्टडी में ले लिया था।
समर्थकों की लामबंदी और राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि
प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई उस वक्त सामने आई थी जब ये बहनें जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने और कार्यकर्ताओं को लामबंद करने का प्रयास कर रही थीं। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से ही उनके समर्थक और पार्टी कैडर लगातार देशव्यापी प्रदर्शनों और उनकी रिहाई की मांग में जुटे हैं। इस ताजा आदेश के बाद इमरान खान के परिजनों, पीटीआई के नेताओं और उनके समर्थकों की निगाहें अब अगले कानूनी विकल्पों और अदालती कदमों पर टिकी हैं।



















