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एसिड की बेलगाम बिक्री और हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा ठोस जवाबभारत
27 अक्तू॰ 2026, 8:07 pm (3 घंटे पहले)· 1

एसिड की बेलगाम बिक्री और हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा ठोस जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने देश में एसिड हमलों की घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि केवल सर्कुलर जारी करने या सहानुभूति दिखाने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर एसिड के दुरुपयोग को रोकने की ठोस योजना पेश करने का आदेश दिया है।

देशभर में एसिड हमलों के लगातार सामने आ रहे मामलों को लेकर देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई एक अहम सुनवाई के दौरान इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई कि केंद्र सरकार के स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद होने के बावजूद बाजार में एसिड की अनियंत्रित उपलब्धता बनी हुई है। अदालत ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि कागजों पर नियम तैयार होने के बाद भी यदि ऐसी बर्बर घटनाएं नहीं रुक रही हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक स्तर पर अमल की विफलता को दर्शाता है।

सहानुभूति और कागजी आदेशों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने की जरूरत

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि पीड़ितों के प्रति केवल संवेदना जताना या प्रतिबंध संबंधी सर्कुलर निकालकर छोड़ देना समस्या का स्थाई हल नहीं हो सकता। पीठ ने रेखांकित किया कि सरकारी तंत्र को यह सुनिश्चित करना ही होगा कि खुदरा एसिड की बिक्री पर लगाम लगाने वाले कानूनी प्रावधानों का पालन प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पूरी सख्ती से जमीन पर दिखाई दे।

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प्रशासनिक खामियों और लचर निगरानी का उठाया जा रहा फायदा

सुनवाई के दौरान पीठ ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जब एसिड की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था पहले से तय है, तो फिर ये हमले क्यों जारी हैं। अदालत ने कहा कि ये घटनाएं साफ तौर पर साबित करती हैं कि व्यवस्था में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं, जिनका असामाजिक तत्व बेखौफ होकर फायदा उठा रहे हैं। पीठ का मानना था कि यदि ऐसी त्रासदियां बार-बार घट रही हैं, तो यह स्वीकार करना होगा कि मौजूदा नीतियां अपने जमीनी लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम साबित हुई हैं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ किया कि इस संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को आपसी समन्वय से काम करना होगा और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।

केंद्र सरकार ने स्वीकारी जमीनी अमल की कमजोरी, मांगा गया हलफनामा

मामले में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने अदालत को अवगत कराया कि एसिड की खुदरा बिक्री रोकने के लिए सभी राज्यों को विस्तृत दिशानिर्देश पहले ही प्रेषित किए जा चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्यों के स्तर पर इन नियमों को जमीन पर उतारने की वास्तविक स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का औपचारिक निर्देश दिया। इस हलफनामे में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि खुले बाजार में बेचे जाने वाले एसिड के अवैध उपयोग और दुरुपयोग को रोकने के लिए आने वाले दिनों में क्या व्यावहारिक और कड़े उपाय किए जाएंगे।

सजा बढ़ाने का सुझाव और पीड़िता शाहीन मलिक की याचिका

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत पूर्व में भी इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधानों को सख्त करने और मामलों में आरोपी पर ही स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने का कानूनी दायित्व डालने जैसे विकल्पों पर चर्चा कर चुकी है। मंगलवार को यह पूरी सुनवाई एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका के संदर्भ में हुई। इस याचिका में अदालत से यह मानवीय गुहार लगाई गई है कि एसिड हमलों की शिकार महिलाओं और पीड़ितों को दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें शासन की सभी जरूरी सामाजिक और आर्थिक कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। अदालत के ताजा रुख से यह स्पष्ट संदेश गया है कि नियम बनाने के साथ-साथ अब प्रशासनिक जवाबदेही तय करना अनिवार्य होगा।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट में एसिड हमले के मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।
अदालत ने एसिड बिक्री के मौजूदा नियमों को लेकर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि केवल सर्कुलर जारी करने या सहानुभूति दिखाने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि लोग लचर निगरानी का फायदा उठाकर बेरोकटोक एसिड खरीद रहे हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने क्या दलील दी?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने बताया कि राज्यों को दिशानिर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन कमजोर बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने केंद्र को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि खुलेआम बिकने वाले एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
यह जनहित याचिका किसने और किस मांग के साथ दायर की थी?
यह याचिका एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक ने दायर की थी, जिसमें पीड़िताओं को दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल कर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

खुले बाजार में एसिड मिल रहा है, यह तो सीधा प्रशासनिक फेलियर है। सरकारें सिर्फ नियम बना देती हैं पर जमीन पर कोई चेकिंग नहीं होती।

Ravikash Gupta@ravikash·2 घंटे पहले

कल ही चौराहे पर खुलेआम तेज़ाब बिकते देखा था। कानून सिर्फ कागजों पर ही रह गए हैं, डर नाम की कोई चीज़ नहीं बची।

Neha Verma@neha-verma·2 घंटे पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब सरेआम तेज़ाब मिल रहा है, तो फिर इन दुकानों के लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किए जाते और प्रशासन इन पर तुरंत छापा क्यों नहीं मारता?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

अदालत का यह रुख बिल्कुल सही है। साल दो हजार चौदह में जब मैं तीस हजारी कोर्ट में एक तेजाब हमले के मामले की सुनवाई कवर कर रहा था, तब भी यही बहाने सुने थे कि दुकानों पर रोक लग रही है। कागजी आदेशों से कुछ नहीं बदलता जब तक थानेदार खुद जाकर मार्केट में चेकिंग न करें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 घंटे पहले

करण भाई, तीस हजारी कोर्ट वाली आपकी बात सौ फीसदी सही है। संसद में भी कई बार नीतियों और ज़मीनी अमल के इस अंतर पर सवाल उठे हैं, पर पुलिस और प्रशासन की सुस्ती नहीं जाती।

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