नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और आपदा के बीच यात्रा के दौरान लापता हुए मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जज और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट जस्टिस वी. शिवगणनम की सुरक्षित वापसी और तलाश के लिए दिल्ली तमिल एडवोकेट्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे इस गंभीर मामले को भारत सरकार और नेपाल के संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से उठाएं ताकि लापता न्यायविद् को जल्द से जल्द खोजा जा सके।
26 अगस्त की सुबह पत्नी से हुई थी आखिरी बात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जस्टिस वी. शिवगणनम तमिल तीर्थयात्रियों के एक जत्थे के साथ नेपाल यात्रा पर गए थे। यात्रा के दौरान ली गई एक बस की तस्वीर में उनकी मौजूदगी भी दर्ज की गई है। उन्होंने अपनी पत्नी को 26 अगस्त की सुबह व्हाट्सऐप के जरिए फोन किया था, जिसके बाद से परिवार का उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो पाया है और फोन बंद आ रहा है।
तिमुरे इलाके के पास मिली थी दूसरी बस
एसोसिएशन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, एक अन्य बस में सफर कर रहे कुछ यात्रियों को नेपाल के तिमुरे क्षेत्र में स्थित एपीएफ नेपाल बॉर्डर आउटपोस्ट के पास सुरक्षित बचा लिया गया था। इन बचाए गए लोगों ने परिजनों को अवगत कराया कि जस्टिस वी. शिवगणनम जिस बस में सवार थे, वह उनकी बस से महज 100 से 200 मीटर की ही दूरी पर थी। इस खुलासे के बाद से उनके परिवार के सदस्यों की चिंता उनकी सुरक्षा और वर्तमान ठिकाने को लेकर लगातार बढ़ती जा रही है।
भारत सरकार और नेपाल अधिकारियों से मदद की मांग
दिल्ली तमिल एडवोकेट्स एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए अपने पत्र में आग्रह किया है कि राजनयिक स्तर पर और प्रशासनिक माध्यमों से भारत सरकार तथा नेपाल के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। एसोसिएशन ने मांग की है कि जस्टिस शिवगणनम का पता लगाने के लिए तमामसंभव प्रयास किए जाएं और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की दिशा में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
न्यायपालिका में लंबा कार्यकाल और सीनियर एडवोकेट का पद
जस्टिस वी. शिवगणनम ने भारतीय न्याय प्रणाली में लगभग 34 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। उनकी कानूनी सेवाओं और अनुभव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 23 जुलाई 2025 से सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया था। यह औपचारिक अपील दिल्ली तमिल एडवोकेट्स एसोसिएशन के सचिव डॉक्टर राम शंकर द्वारा 30 अगस्त 2026 को देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को प्रेषित की गई है।
नेपाल में बाढ़ और आपदा से 788 लोगों की मौत
उल्लेखनीय है कि नेपाल में अचानक आई भयंकर बाढ़ के कारण मरने वालों की कुल संख्या रविवार को बढ़कर 788 तक पहुंच गई है। जैसे-जैसे बचाव दल मलबे से शवों को बाहर निकाल रहे हैं, आंकड़ों में इजाफा हो रहा है। इस बीच, प्रशासनिक अधिकारियों ने भोटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित जिलों में रह रहे आम नागरिकों तथा राहत कार्यों में जुटे बचावकर्मियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 9500 लोग सुरक्षित निकाले गए
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) की ओर से दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण त्रासदी में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 788 हो चुका है, जबकि लगभग 9500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक स्थित हिमनद के टूटने के कारण 26 अगस्त को अचानक हिमस्खलन जैसी स्थिति पैदा हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा तेज बहाव के साथ नीचे की ओर आ गया। इस जलप्रलय ने मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को पूरी तरह तबाह कर दिया, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंचाई और कई जलविद्युत परियोजनाओं को नष्ट कर दिया।





















