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पर्वतारोहण का रखते हैं शौक? शिक्षिका आराधना कुमारी से जानिए कैसे करें ट्रेनिंग और शुरुआतसक्सेस स्टोरी
30 अग॰ 2026, 11:08 pm (60 दिन पहले)· 4

पर्वतारोहण का रखते हैं शौक? शिक्षिका आराधना कुमारी से जानिए कैसे करें ट्रेनिंग और शुरुआत

बिहार के भोजपुर जिले की सरकारी स्कूल शिक्षिका और पर्वतारोही आराधना कुमारी ने पहाड़ फतह करने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए ट्रेनिंग और तैयारी का पूरा खाका साझा किया है।

बिहार के भोजपुर जिले से ताल्लुक रखने वाली आराधना कुमारी ने माउंटेन क्लाइम्बिंग की दुनिया में एक खास मुकाम हासिल किया है। एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी आराधना अपनी कड़ी मेहनत और बुलंद हौसलों के बल पर देश और विदेश की कई दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी हैं। अपने पेशेवर जीवन में वे एक सरकारी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने पर्वतारोहण के सफर की शुरुआत करने वाले नौजवानों के लिए इसके शुरुआती चरणों, जरूरी तैयारियों और पेशेवर ट्रेनिंग से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की हैं।

शिक्षण कार्य के साथ पर्वतारोहण का सफर

आराधना कुमारी वर्तमान में बिहार के भोजपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का काम करती हैं। अपनी शिक्षण ड्यूटियों को पूरी निष्ठा से निभाने के साथ-साथ उन्होंने एक मंजे हुए पर्वतारोही के तौर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने उन तमाम बुलंदियों को छुआ है, जिनके बारे में सोचकर आम आदमी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि अगर इंसान के भीतर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो वह अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है。

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मानसिक और शारीरिक तैयारी है पहली शर्त

आराधना के मुताबिक पहाड़ों की चढ़ाई करना महज सैर-सपाटा नहीं है, बल्कि इसके लिए इंसान को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर पूरी तरह मजबूत होना पड़ता है। इसमें सफलता हासिल करने के लिए फौलादी इरादों की सख्त जरूरत होती है। उनका यह साफ तौर पर कहना है कि जो लोग ऊंची चोटियों को छूने की ख्वाहिश रखते हैं, उनके लिए इस क्षेत्र में कदम रखने का शुरुआती दौर सबसे ज्यादा चुनौतियों से भरा और कठिन होता है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले अपने भीतर के डर पर पूरी तरह काबू पाना सीखना होता है।

प्रमुख संस्थानों से लें पेशेवर ट्रेनिंग

पर्वत शिखरों को फतह करने के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताते हुए आराधना कहती हैं कि देश में इस खेल की व्यवस्थित ट्रेनिंग के लिए प्रतिष्ठित और प्रमुख संस्थानों से प्रशिक्षण लेना बहुत जरूरी होता है। इस तरह के प्रशिक्षण कैंपों में नौसिखियों को शारीरिक रूप से फिट रहने के गुर सिखाए जाते हैं। इसके अलावा पहाड़ों पर चढ़ने की तकनीकी बारीकियां, विभिन्न प्रकार की रस्सियों का सही इस्तेमाल करना, रॉक क्लाइंबिंग के हुनर, बर्फ से ढकी चोटियों पर आगे बढ़ने के तरीके, आपात स्थिति में बचाव तकनीक और बेहद विपरीत मौसम के बीच खुद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कौशल सिखाए जाते हैं।

कठिन हालात और मजबूत इच्छाशक्ति

चढ़ाई के दौरान कई बार रास्ते बेहद खतरनाक और बीहड़ हो जाते हैं, मौसम अचानक बदल जाता है और शरीर की ऊर्जा भी तेजी से कम होने लगती है। ऐसे नाज़ुक पलों में केवल एक मजबूत इच्छाशक्ति ही ऐसी ताकत होती है जो किसी भी पर्वतारोही को रुकने नहीं देती और लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। अपने अब तक के सफर के अनुभवों से सीख लेते हुए, आराधना आज के युवाओं को यह संदेश देती हैं कि यदि दिल में ऊंचाइयों को छूने का जुनून हो, तो आपकी शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हो, लेकिन आपका मुख्य लक्ष्य हमेशा बड़ा होना चाहिए। उनका मानना है कि असल पहाड़ पर कदम रखने से पहले इंसान को अपने मन और शरीर को उस माहौल के अनुकूल ढालना पड़ता है।

परिस्थितियां नहीं, जुनून तय करता है मुकाम

एक सरकारी विद्यालय की शिक्षिका के रूप में नौनिहालों का भविष्य गढ़ने वाली आराधना आज अपने निजी जीवन और अनुभवों के जरिए देश के युवाओं को यह बड़ा सबक दे रही हैं कि इंसानी सपने कभी भी उसकी आर्थिक या पारिवारिक परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते। इंसान की जिंदगी की दिशा उसके हालात नहीं, बल्कि उसके सपनों को सच करने की जिद और उसका जुनून तय करता है। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो जीवन में किसी भी क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की इच्छा रखते हैं।

सवाल-जवाब

आराधना कुमारी का पेशा क्या है?
आराधना कुमारी एक सरकारी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।
वे मूल रूप से किस जिले की रहने वाली हैं?
वे बिहार के भोजपुर जिले की निवासी हैं।
पर्वतारोहण के लिए किन कौशलों की आवश्यकता होती है?
इसमें शारीरिक फिटनेस, रस्सियों का उपयोग, रॉक क्लाइंबिंग, बर्फ पर चढ़ाई और बचाव तकनीक सीखनी पड़ती है।
पर्वतारोहण में सबसे कठिन क्या माना गया है?
पर्वतों की ऊंचाइयों को छूने का सपना देखने वालों के लिए शुरुआत का दौर सबसे कठिन होता है।
आराधना युवाओं को क्या संदेश देती हैं?
उनका संदेश है कि शुरुआत छोटी हो सकती है लेकिन लक्ष्य हमेशा बड़ा होना चाहिए।
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