बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर 2026 में अपने वतन लौटने के फैसले को फिर से सार्वजनिक किया है। उन्होंने साफ किया है कि वह अपने मुल्क और वहां के बाशिंदों के बीच जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें अपनी निजी हिफाजत को लेकर कोई खौफ नहीं है। उनका कहना है कि अगर उनके मुकद्दर में कुछ और लिखा हुआ है, तो वह उसे भी सहने और अपनाने को तैयार हैं।
बांग्लादेश के मौजूदा हालात और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल
शेख हसीना ने बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर फिक्र जाहिर की है। उन्होंने अवामी लीग के नेताओं के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं पर हो रही कड़ी कार्रवाइयों का जिक्र किया और राजनीतिक आजादी व लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े गंभीर पहलू सामने रखे। हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को तुरंत खत्म करने और सभी राजनीतिक अधिकारों को बहाल किए जाने की जोरदार वकालत की है। इसके साथ ही उन्होंने देश में कानून के राज, अदालतों की स्वतंत्रता और लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी पर भी सवाल उठाए हैं।
वैश्विक समुदाय से दखल की मांग और क्षेत्रीय असर
हसीना ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अपील की है कि वह बांग्लादेश में लोकतंत्र, निष्पक्ष न्याय और बुनियादी मानवाधिकारों की हिफाजत के लिए खुलकर आगे आए और अपनी आवाज बुलंद करे। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बांग्लादेश के भीतर अमन और स्थिरता केवल उसी देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरे दक्षिण एशिया और बंगाल की खाड़ी के इलाके पर पड़ता है।
सत्ता की लालसा नहीं, कानूनी चुनौतियों के बीच वापसी का दावा
अपनी वापसी के मकसद को स्पष्ट करते हुए हसीना ने कहा कि वह दोबारा हुकूमत हासिल करने के लिए नहीं लौट रही हैं, बल्कि अपने लोगों के समर्थन में खड़े होने और मुल्क को फिर से जम्हूरियत की राह पर लाने के लिए जा रही हैं। उन्होंने देश में राष्ट्रीय सुलह कायम करने और सियासी मुख्यधारा में अवामी लीग को शामिल करने पर जोर दिया है। हालांकि, उनके स्वदेश लौटने की राह आसान नहीं होगी क्योंकि वहां उन्हें बेहद सख्त कानूनी मुकदमों और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश से निकलकर भारत पहुंची थीं। उसके बाद बांग्लादेश की एक अदालत ने उनकी गैरहाजिरी में उन्हें मौत की सजा मुकर्रर की, जिसे हसीना ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। इधर, बांग्लादेश की मौजूदा सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी लगातार दोहरा रही है।



















