राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों और कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी प्रशासनिक राहत सामने आई है। राज्य के सरकारी विद्यालयों की दैनिक समय सारणी में 1 अक्टूबर से होने वाले नियमित बदलाव को आगामी पंद्रह दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड निदेशक, बीकानेर द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी एक-पारी वाले सरकारी विद्यालय 15 अक्टूबर 2026 तक अपनी पूर्व निर्धारित ग्रीष्मकालीन व्यवस्था के अनुरूप ही संचालित किए जाएंगे। इस निर्णय के चलते आगामी 15 अक्टूबर तक विद्यार्थियों और शिक्षकों को पहले की भांति सुबह 7:30 बजे ही विद्यालय पहुंचना होगा।
मौसम के कड़े रुख के बाद लिया गया निर्णय
सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अंतर्गत राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में प्रत्येक वर्ष 1 अक्टूबर से शारदीय समय सारणी प्रभावी कर दी जाती है। इस पारंपरिक व्यवस्था के तहत विद्यालयों का संचालन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक तय रहता है। हालांकि, इस वर्ष अक्टूबर माह का आरंभ होने के बावजूद राज्य भर में तीखी धूप, भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप निरंतर बना हुआ है। दोपहर के समय पड़ने वाली तेज धूप और वातावरण की भारी उमस के कारण विशेष रूप से प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चों और अध्यापकों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा था।
अभिभावकों की मांग और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
प्रतिकूल मौसम के बीच विद्यार्थियों की शारीरिक परेशानी को देखते हुए अभिभावकों की ओर से विद्यालय समय में फिलहाल बदलाव न करने की लगातार मांग उठाई जा रही थी। छात्रों की सेहत और जनभावनाओं को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा विभाग ने त्वरित कदम उठाया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मौसम के बदले मिजाज और तापमान की स्थिति का आकलन करने के बाद ही यह निर्णय सुनिश्चित किया गया है, जिससे छोटे बच्चों को बदलते मौसम में किसी भी प्रकार की मौसमी बीमारी अथवा शारीरिक कष्ट का सामना न करना पड़े।
16 अक्टूबर से प्रभावी होगी नई विंटर समय सारणी
विभाग द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देश प्रदेश के सभी संस्था प्रधानों को प्रेषित कर दिए गए हैं। नवीन व्यवस्था के अनुसार राज्य के विद्यालयों में 16 अक्टूबर से औपचारिक रूप से शारदीय टाइम टेबल प्रभावी किया जाएगा। 16 अक्टूबर के बाद से सभी सरकारी स्कूल विंटर शेड्यूल के अनुसार सुबह 10:00 बजे खुलेंगे और शाम 4:00 बजे छुट्टी होगी। तब तक सभी संबंधित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को वर्तमान समय व्यवस्था का ही पालन करना होगा।


















