अमेरिकी सेना ने टेक्सास में हुए एक भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के बाद देशभर में अपने सभी AH-64 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की प्रशिक्षण उड़ानों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। सलाडो के पास हुए इस हादसे में दो अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई, जिसके बाद सैन्य नेतृत्व ने सुरक्षा कारणों से यह बड़ा कदम उठाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक जांचकर्ता दुर्घटना के मूल कारणों का सटीक पता नहीं लगा लेते, तब तक अपाचे का पूरा ट्रेनिंग बेड़ा जमीन पर ही रहेगा। यह कदम भारत जैसे सहयोगी देशों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो अपनी सैन्य तैयारियों के लिए इसी विमान प्रणाली पर निर्भर हैं।
सलाडो के पास घास के मैदान में हुआ भीषण हादसा
यह दुखद दुर्घटना बुधवार को घटित हुई, जब हेलीकॉप्टर टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे से लगभग 48 किलोमीटर दूर सलाडो के निकट एक खुले घास वाले मैदान में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में केवल दो सैन्यकर्मी सवार थे और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। अमेरिकी सेना ने आधिकारिक रूप से मृतकों की पहचान उजागर की है। इनमें 34 वर्षीय चीफ वॉरंट ऑफिसर 2 डियोंत्रे टी. ह्यूई शामिल थे, जिन्होंने वर्ष 2014 में सेना में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। उनके साथ 25 वर्षीय वॉरंट ऑफिसर सेठ एल. ओल्मस्टेड भी शहीद हुए, जो 2023 में सेना में शामिल हुए थे। ये दोनों जांबाज सैनिक 1वीं कैवेलरी डिवीजन की 1वीं एयर कैवेलरी ब्रिगेड के अंतर्गत 227वीं एविएशन रेजिमेंट की 1वीं बटालियन की ब्रावो कंपनी में तैनात थे।
अलबामा की विशेष टीम कर रही है मामले की गहन जांच
दुर्घटना के तुरंत बाद अलबामा स्थित फोर्ट रकर के आर्मी कॉम्बैट रेडीनेस सेंटर से सुरक्षा विशेषज्ञों की एक विशेष जांच टीम को मौके पर भेजा गया है। सैन्य प्रवक्ताओं ने शुक्रवार को वक्तव्य जारी कर बताया कि उड़ानों पर लगाई गई यह रोक सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से अनिवार्य है और यह तब तक लागू रहेगी जब तक जांच टीम हादसे के तकनीकी व वास्तविक कारणों की स्पष्ट समझ हासिल नहीं कर लेती। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी या साक्ष्य सार्वजनिक करने स्थिति नहीं है। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह हादसा किसी यांत्रिक खराबी, उड़ान की परिस्थितियों या मानवीय त्रुटि के कारण हुआ।
चार दशकों से अमेरिकी वायुसेना का मुख्य आधार है अपाचे
AH-64 अपाचे को अमेरिकी सैन्य विमानन का सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद अग्रिम पंक्ति का हमलावर हेलीकॉप्टर माना जाता है। अमेरिकी सेना को इसका पहला बेड़ा वर्ष 1984 में प्राप्त हुआ था और तब से पिछले चार दशकों से अधिक समय से यह विभिन्न युद्ध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। वर्तमान में अमेरिका और उसके मित्र देशों के पास 5,000 से अधिक अपाचे हेलीकॉप्टर तैनात किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या और रणनीतिक महत्व को देखते हुए पूरे ट्रेनिंग मिशन पर रोक लगाना अमेरिकी सेना का एक अत्यंत गंभीर और असाधारण निर्णय दर्शाता है।
फोर्ट हुड क्षेत्र में पूर्व में भी हो चुके हैं बड़े प्रशिक्षण हादसे
जिस फोर्ट हुड इलाके के आसपास यह हालिया हादसा हुआ है, वहां पहले भी कई दर्दनाक सैन्य दुर्घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। वर्ष 2015 में एक नियमित अभ्यास सत्र के दौरान एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें चार सैनिकों की जान चली गई थी। इसके अतिरिक्त वर्ष 2016 में भारी बारिश के कारण आए अचानक उफान में एक सैन्य वाहन बह जाने से फोर्ट हुड के नौ सैनिकों की मृत्यु हो गई थी। ये घटनाएं इस क्षेत्र में होने वाले कठिन और जोखिम भरे सैन्य अभ्यासों की गंभीरता को रेखांकित करती हैं।
भारत और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के लिए जांच के मायने
अपाचे हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा से जुड़ी यह जांच केवल अमेरिकी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के लिए भी इसके गहरे निहितार्थ हैं। भारतीय वायुसेना अपनी लड़ाकू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उन्नत AH-64E अपाचे संस्करण का संचालन करती है, जिसकी पहली खेप भारत को 2019 में प्राप्त हुई थी। यदि अमेरिकी जांच में किसी बुनियादी डिजाइन खराबी या तकनीकी खामी की पुष्टि होती है, तो उसका सीधा असर भारत के अपने अपाचे बेड़े के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर पड़ेगा। इसके अलावा ब्रिटेन, इजरायल, जापान, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देश भी इस हेलीकॉप्टर के नियमित उपयोगकर्ता हैं। ऐसे में अलबामा की जांच टीम द्वारा निकाले गए निष्कर्ष वैश्विक स्तर पर इन सभी देशों के अपाचे बेड़ों को भविष्य में सुरक्षित रखने के लिए अति आवश्यक सिद्ध होंगे।



















