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ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक छलांग: मोदी ने दुनियाभर में बनाए नए रणनीतिक रिश्तेदुनिया
21 जून 2026, 1:14 am (38 दिन पहले)· 5

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक छलांग: मोदी ने दुनियाभर में बनाए नए रणनीतिक रिश्ते

अमेरिका और ईरान के बीच 100 से अधिक दिनों के सशस्त्र संघर्ष के दौरान भारत ने व्यापार विविधीकरण और सक्रिय कूटनीति के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत रखा. पीएम मोदी ने कई देशों के दौरे कर EU, GCC और अमेरिका समेत दर्जनों देशों के साथ नए व्यापार और रक्षा समझौते किए.

अमेरिका और ईरान के बीच 100 से अधिक दिनों तक चला सशस्त्र संघर्ष आखिरकार समझौते पर खत्म हुआ. होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर जहाजरानी के लिए ऑपरेशनल हो गया और दोनों पक्षों ने हमले रोक लिए. लेकिन 28 फरवरी से 18 जून तक का यह दौर दुनिया के तमाम देशों के लिए कड़ी परीक्षा था. इस पूरी अवधि में भारत ने न सिर्फ अपने आर्थिक हितों की हिफाजत की, बल्कि बदलती दुनिया में नए मौके भी तलाशे.

व्यापार में विविधीकरण: सबसे अहम रणनीतिक कदम

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने मिडिल ईस्ट की सप्लाई चेन को बुरी तरह हिलाकर रख दिया. इस माहौल में भारत ने अपने व्यापारिक रिश्तों को तेजी से विस्तार दिया. अमेरिका के साथ तनाव और पश्चिम एशिया के अनिश्चित हालात के बावजूद, भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफलता पाई. फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक करार भी संपन्न हुआ.

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उसी महीने भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर दस्तखत किए. GCC में सऊदी अरब, UAE, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन शामिल हैं. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट गहराने के बाद भारत ने राजनयिक दबावों की परवाह किए बिना रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने का फैसला किया, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती रहें.

मलेशिया और इजरायल दौरा: संतुलन साधने की कोशिश

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से पहले पीएम मोदी ने मलेशिया की यात्रा की. इस दौरे का मकसद व्यापार संबंधों को मजबूत करना और पाम ऑयल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था. हमलों की शुरुआत से ठीक पहले पीएम मोदी इजरायल पहुंचे, जहां दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके कुछ ही समय बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भीषण हमला शुरू कर दिया.

मई 2026: एक साथ पांच देशों का दौरा

जब दोनों पक्षों की तरफ से हमले जारी थे, उस वक्त मई 2026 में पीएम मोदी ने एक महत्वाकांक्षी पांच-देशीय दौरा किया. इसमें UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल थे. UAE के साथ ऊर्जा आपूर्ति को लेकर समझौते हुए. यूरोपीय देशों, खासकर इटली के साथ, ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के तहत क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस सेक्टर में बड़ी डील आगे बढ़ाई गई.

फ्रांस और स्लोवाकिया: समझौते से पहले आखिरी कूटनीतिक कदम

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा से ठीक पहले पीएम मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा किया. नई व्यापारिक साझेदारियां बनाना, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना और हर पक्ष के साथ संतुलित कूटनीति कायम रखना, इन तीन मोर्चों पर टिकी भारत की नीति ने यह जता दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उसका लक्ष्य महज नुकसान से बचना नहीं था, बल्कि नए अवसरों को भी भुनाना था.

सवाल-जवाब

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष कब से कब तक चला?
यह संघर्ष 28 फरवरी से शुरू होकर 18 जून तक चला, यानी 100 से अधिक दिन.
भारत ने GCC के साथ क्या समझौता किया?
फरवरी 2026 में भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सऊदी अरब, UAE, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन शामिल हैं.
पीएम मोदी ने मई 2026 में किन-किन देशों का दौरा किया?
मई 2026 में पीएम मोदी ने UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का एक साथ दौरा किया.
भारत ने रूस से तेल आयात क्यों बढ़ाया?
पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट के कारण अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए भारत ने राजनयिक दबावों के बावजूद रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया.
इटली के साथ किस तरह की डील हुई?
ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के तहत इटली सहित यूरोपीय देशों के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस सेक्टर में डील की गई.
युद्ध से पहले पीएम मोदी मलेशिया क्यों गए थे?
हमले शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने मलेशिया का दौरा किया जहां व्यापार संबंध मजबूत करने और पाम ऑयल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई.
फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा कब हुआ?
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की घोषणा से ठीक पहले पीएम मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा किया.
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