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इटुरुप पहुंचे व्लादिमीर पुतिन तो भड़का टोक्यो, सनाए ताकाइची ने रूसी राष्ट्रपति के कूरील दौरे को बताया पूरी तरह अस्वीकार्यदुनिया
19 अग॰ 2026, 12:20 pm (1 घंटे पहले)· 2

इटुरुप पहुंचे व्लादिमीर पुतिन तो भड़का टोक्यो, सनाए ताकाइची ने रूसी राष्ट्रपति के कूरील दौरे को बताया पूरी तरह अस्वीकार्य

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 13 अगस्त को विवादित कूरील द्वीप समूह के इटुरुप द्वीप का दौरा किया। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस यात्रा को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कड़ा विरोध जताया है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तनाव बढ़ गया है।

रूस और जापान के बीच दशकों से चला आ रहा सीमा विवाद एक बार फिर गंभीर मोड़ ले चुका है। 13 अगस्त को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विवादित कूरील द्वीप समूह के इटुरुप द्वीप का दौरा किया, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। व्लादिमीर पुतिन के अपने पूरे कार्यकाल के दौरान कूरील द्वीप समूह की यह पहली आधिकारिक यात्रा थी। इस दौरे पर जापान की ओर से बेहद कड़ा रुख देखने को मिला है, जहां प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने रूसी राष्ट्रपति की इस गतिविधि को गंभीर और पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है। इस दौरे के तुरंत बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के शीर्ष राजनयिकों को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध के समय से उलझी यह क्षेत्रीय गांठ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है।

इटुरुप में पुतिन की गतिविधियां और टोक्यो की तीखी प्रतिक्रिया

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इटुरुप द्वीप की अपनी यात्रा के दौरान कई स्थानीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। अपने इस दौरे में उन्होंने द्वीप पर स्थित एक प्रमुख मछली प्रसंस्करण संयंत्र, स्थानीय अस्पताल और एक स्कूल का जायजा लिया। इसके अलावा उन्होंने वहां रहने वाले स्थानीय नागरिकों से बातचीत भी की। मॉस्को प्रशासन के लिए यह दौरा कूरील क्षेत्र पर अपने प्रशासनिक नियंत्रण और संप्रभुता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने का एक जरिया था। हालांकि, टोक्यो ने इस दौरे को अपने क्षेत्रीय दावों और संप्रभुता पर सीधे हमले के रूप में देखा है।

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जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने रूसी राष्ट्रपति के कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि नॉर्दन टेरिटरीज ऐतिहासिक दृष्टिकोण से और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह से जापान का अभिन्न अंग हैं। जापानी प्रधानमंत्री के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन की इस यात्रा ने जापानी जनता के भीतर रूस विरोधी भावनाओं को अधिक तीव्र कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के एकतरफा कदमों से मध्यम और लंबी अवधि में रूस और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास बेहद कठिन हो गए हैं।

राजनयिकों को तलब करने का दौर और सर्गेई लावरोव का बयान

जापान की ओर से दर्ज कराए गए कड़े विरोध के बाद रूस ने भी सख्त रुख अपनाया है। मॉस्को स्थित विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जापान के राजदूत अकीरा मुतो को तलब किया। जापानी राजदूत करीब 25 मिनट तक रूसी विदेश मंत्रालय के भीतर रहे और बाहर निकलने के बाद उन्होंने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कोई बातचीत नहीं की। इस कूटनीतिक टकराव पर टिप्पणी करते हुए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बयानों को शिष्टाचार की सीमाओं का उल्लंघन करार दिया। रूस ने जापान के इस रवैये को पूरी तरह से रूस विरोधी रुख की संज्ञा दी है।

1945 से उलझा चार द्वीपों का ऐतिहासिक विवाद

कूरील द्वीपों से जुड़ा यह विवाद केवल समकालीन राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम समय 1945 तक जाती हैं। विवादित दक्षिणी कूरील द्वीप समूह के अंतर्गत मुख्य रूप से चार द्वीप आते हैं, जिनमें इटुरुप, कुनाशीर, शिकोतान और हबोमाई शामिल हैं। 1945 में सोवियत संघ की सेनाओं ने इन द्वीपों पर अपना पूर्ण अधिकार जमा लिया था और वहां दशकों से निवास कर रही जापानी आबादी को जबरन बेदखल कर दिया था। सोवियत संघ के उस कदम के बाद से ही दोनों देश इस क्षेत्र पर अपने-अपने दावे पेश करते आ रहे हैं। इसी क्षेत्रीय विवाद के कारण द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के आठ दशक बाद भी रूस और जापान के बीच एक औपचारिक शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं।

यूक्रेन युद्ध और पैट्रियट मिसाइल सौदे का असर

साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के सैन्य आक्रमण के बाद से मॉस्को और टोक्यो के संबंध लगातार बिगड़े हैं। जापान ने G7 देशों के साथ मिलकर रूस पर कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इसके साथ ही टोक्यो ने यूक्रेन को बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद और गैर-घातक रक्षा सामग्री प्रदान की है। हाल के दिनों में जापान ने अपनी नीति में बदलाव करते हुए घरेलू स्तर पर निर्मित पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों को अमेरिका को निर्यात करने की अनुमति दी है। इस कदम से अमेरिकी सेना को अपने उन मिसाइल भंडारों को फिर से भरने में मदद मिल रही है, जो यूक्रेन को सैन्य सहायता भेजने के कारण खाली हो गए थे।

कूरील यात्रा का भू-राजनीतिक संदेश और भविष्य की राह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि व्लादिमीर पुतिन के इस दौरे को केवल एक द्वीप की यात्रा के रूप में देखना अधूरी तस्वीर प्रस्तुत करेगा। इसके पीछे यूक्रेन युद्ध से जुड़ा एक गहरा रणनीतिक संदेश छिपा हुआ है। जापान हाल के वर्षों में अपनी पारंपरिक शांतिवादी रक्षा नीति से बाहर निकलकर पश्चिमी देशों और नाटो के साथ अपने सुरक्षा सहयोग को मजबूत कर रहा है। ऐसे में कूरील द्वीप पर व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी टोक्यो को यह स्पष्ट संकेत देती है कि रूस अपने क्षेत्रीय दावों और पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार की संभावनाएं बेहद कम नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां सनाए ताकाइची के नेतृत्व में जापानी सरकार रक्षा मामलों में अधिक मुखर और सक्रिय रुख अपना रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस कूरील क्षेत्र में अपनी सैन्य और प्रशासनिक मौजूदगी को लगातार मजबूत कर रहा है। व्लादिमीर पुतिन का यह एक दिवसीय दौरा भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन इसका दीर्घकालिक राजनीतिक और कूटनीतिक असर आने वाले लंबे समय तक रूस और जापान के रिश्तों पर दिखाई देगा।

सवाल-जवाब

व्लादिमीर पुतिन ने किस द्वीप का दौरा किया?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 13 अगस्त को विवादित कूरील द्वीप समूह के इटुरुप द्वीप का दौरा किया।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस दौरे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस यात्रा को गंभीर और पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया तथा इसे जापान के क्षेत्रीय दावों पर आघात बताया।
कूरील द्वीप विवाद की शुरुआत कब हुई थी?
इस विवाद की शुरुआत 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में हुई थी, जब सोवियत संघ ने चार द्वीपों (इटुरुप, कुनाशीर, शिकोतान और हबोमाई) पर कब्जा कर जापानी नागरिकों को बेदखल कर दिया था।
कूरील विवाद में कौन-कौन से चार द्वीप शामिल हैं?
इस विवादित समूह में इटुरुप, कुनाशीर, शिकोतान और हबोमाई द्वीप शामिल हैं, जिन्हें जापान 'नॉर्दन टेरिटरीज' कहता है।
मॉस्को में किस जापानी राजदूत को तलब किया गया था?
जापान के राजदूत अकीरा मुतो को रूसी विदेश मंत्रालय में तलब किया गया, जहां वे लगभग 25 मिनट रहे।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

व्लादिमीर पुतिन द्वारा इटुरुप द्वीप का दौरा और इसके बाद दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब करना इस बात का संकेत है कि रूस और जापान के बीच द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से लटका शांति संधि का मुद्दा फिलहाल ठंडे बस्ते में ही रहेगा। कूरील द्वीप समूह पर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने की रूस की रणनीति और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का कड़ा रुख यह बताता है कि आने वाले समय में टोक्यो और मॉस्को के बीच कूटनीतिक दूरियां और बढ़ेंगी, जिसका असर द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर भी पड़ सकता है।

Li Wei@li-wei·3 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना होगा कि यूक्रेन संघर्ष के बाद से टोक्यो ने जिस तरह पश्चिमी प्रतिबंधों का खुलकर समर्थन किया है, मॉस्को उसी का रणनीतिक जवाब दे रहा है। पुतिन का यह दौरा केवल क्षेत्रीय संप्रभुता दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जापान और अमेरिका की सुरक्षा साझेदारियों पर दबाव बढ़ाने का एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संदेश भी है। इससे ऊर्जा और व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच सहयोग की रही-सही गुंजाइश भी समाप्त होती दिख रही है।

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