अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अक्टूबर को कहा कि देश की आतंक-रोधी क्षमताएं किसी क्लासरूम या सैद्धांतिक पढ़ाई की देन नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दशकों तक सीमा पार से आने वाली गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का जमीनी स्तर पर सामना करके भारत ने यह अनुभव हासिल किया है। भारत की हर रणनीति वास्तविक अभियानों की कसौटी पर कसी जा चुकी है और उसने हर बार अपनी प्रभावशीलता को साबित किया है।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख और कड़ा संदेश
फिलीपींस के सेबू शहर में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के दौरान रक्षा मंत्री ने आतंकवाद से निपटने के भारतीय दृष्टिकोण को विस्तार से साझा किया। अपने संबोधन में उन्होंने पिछले वर्ष संचालित किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा की। उन्होंने रेखांकित किया कि इस विशेष सैन्य कार्रवाई के तहत बड़े पैमाने पर आतंकी नेटवर्क और उनके बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया गया था। राजनाथ सिंह के अनुसार, यह अभियान सीधे तौर पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ देश के सख्त और अडिग संकल्प का स्पष्ट प्रमाण था।
वैश्विक समुद्री गलियारों और नौवहन की सुरक्षा
समुद्री सुरक्षा के आयाम पर विचार रखते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का न केवल पुरजोर समर्थन करता है, बल्कि स्वयं भी उनका पूरी निष्ठा से पालन करता है। नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखना और वैश्विक समुद्री संचार मार्गों (सी लाइन्स ऑफ कम्युनिकेशन) को सुरक्षित रखना भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसे कई दशकों के निरंतर अनुभव से मजबूती मिली है।
भारतीय नौसेना की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 से ही नौसेना अदन की खाड़ी जैसे बेहद संवेदनशील और जोखिम भरे समुद्री इलाकों में लगातार तैनात है। इस पूरी अवधि में भारत ने कभी भी ऐसा बल प्रयोग नहीं किया जिससे अन्य देशों के हितों को नुकसान पहुंचे। इसके विपरीत, अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की तैनाती के माध्यम से भारतीय नौसेना ने हजारों वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया और समुद्री लुटेरों द्वारा जहाजों के अपहरण के कई प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल किया।
एडीएमएम-प्लस मंच और भारत की भागीदारी
एडीएमएम-प्लस मंच दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के 11 सदस्य देशों और उसके आठ संवाद साझेदारों का एक प्रमुख सुरक्षा तंत्र है। इन आठ संवाद साझेदारों में भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका शामिल हैं। भारत के इस मंच से जुड़ाव का इतिहास काफी पुराना है, जहां देश 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना था।
इस सुरक्षा मंच की औपचारिक शुरुआत 12 अक्टूबर, 2010 को हनोई में आयोजित पहली बैठक के साथ हुई थी। वर्ष 2026 के लिए फिलीपींस इस मंच की अध्यक्षता कर रहा है। इसके अलावा, एडीएमएम-प्लस रूपरेखा के तहत भारत 2024 से 2027 तक की अवधि के लिए मलेशिया के साथ मिलकर आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभा रहा है।






















