प्रकृति का एक और भयंकर रूप एशिया के एक हिस्से में तबाही का कारण बन रहा है। हाल के दिनों में कई स्थानों पर जलप्रलय जैसे हालात बन चुके हैं, लेकिन यह खतरा अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। समुद्री जलक्षेत्र के भीतर से एक नया चक्रवाती बवंडर उठकर सक्रिय हो चुका है। इस घातक चक्रवाती तूफान क्रोवान्ह ने दस्तक दे दी है, जिसके प्रभाव से आसमान से लगातार पानी बरस रहा है। कुछ विशेष क्षेत्रों में मौसम ने कुछ ही पलों में इतना खतरनाक मोड़ लिया कि महज साठ मिनट के भीतर 110 मिलीमीटर से अधिक की अभूतपूर्व वर्षा दर्ज की गई। वर्तमान में यह गंभीर संकट जापान के विभिन्न हिस्सों को अपनी चपेट में ले चुका है।
चक्रवाती बवंडर क्रोवान्ह का विध्वंस
रविवार, 6 सितंबर को जापान के कई इलाकों में इस तूफान ने इस तरह का भारी प्रकोप दिखाया कि हर तरफ केवल जलभराव ही दिखाई दे रहा है। सबसे गंभीर स्थिति इजू द्वीप समूह और हाचिजोजीमा की बनी हुई है, जहां अचानक आई बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। मौसम संबंधी अधिकारियों ने गंभीर खतरे की चेतावनी देते हुए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
समुद्र के भीतर कम वायुमंडलीय दबाव बनने के कारण चक्रवाती तूफान क्रोवान्ह का निर्माण हुआ। मौसम से जुड़े एक अन्य तंत्र के सक्रिय होने से इस चक्रवात की शक्ति कई गुना अधिक बढ़ गई। रविवार के दिन जब लोग अपने घरों के भीतर सुरक्षित थे, तभी अचानक मौसम के मिजाज में भारी बदलाव आया और मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तूफान इतनी तीव्र गति से आगे बढ़ा कि स्थानीय लोगों को खुद को संभालने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिला। जैसे ही यह चक्रवात तटीय क्षेत्रों के करीब पहुंचा, हवाओं की गति तेजी से बढ़ गई और बादलों की भीषण गड़गड़ाहट के साथ बारिश ने विकराल रूप ले लिया। जापान के निचले भौगोलिक क्षेत्रों में देखते ही देखते सड़कों पर पानी इकट्ठा होना शुरू हो गया, जिससे जनजीवन अत्यधिक प्रभावित हुआ।
एक घंटे में 110 मिमी बारिश और बेकाबू हालात
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे विकराल प्रभाव दक्षिणी इजू द्वीप समूह के अंतर्गत आने वाले हाचिजोजीमा क्षेत्र में देखा गया। शनिवार की रात से ही यहां रुक-रुक कर बारिश हो रही थी, लेकिन जैसे-जैसे रात गहरी होती गई, मौसम का रुख पूरी तरह आक्रामक हो गया। रविवार के शुरुआती घंटों में आसमान पर ऐसे घने काले बादल छाए कि दोपहर के वक्त भी रात जैसा अंधेरा महसूस होने लगा।
जापानी मौसम एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, हाचिजोजीमा के भीतर केवल एक घंटे के समयाराधन में लगभग 110 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यह बारिश इतनी मूसलाधार थी कि जल निकासी की संपूर्ण व्यवस्थाएं पूरी तरह धराशायी हो गई। पक्के मार्ग, कृषि भूमि और संकरी गलियां सब कुछ जलमग्न हो चुका है। अल्प अवधि में 110 मिलीमीटर बारिश होना अत्यंत खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इतने कम अंतराल में अत्यधिक जलराशि बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को अत्यधिक बढ़ा देती है।
समुद्री लहरें और तेज हवाओं का तांडव
यह तूफान केवल मूसलाधार बारिश ही लेकर नहीं आया है, बल्कि इसके साथ चल रही प्रचंड हवाएं और समुद्र में उठने वाली विशालकाय लहरें भी गहरी दहशत पैदा कर रही हैं। तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं का वेग इतना अधिक है कि सड़क के किनारे खड़े पेड़ और होर्डिंग्स अपनी जगह से उखड़ने के कगार पर पहुंच चुके हैं।
समुद्र के भीतर कई मीटर ऊंची तूफानी लहरें ठाठे मार रही हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी प्रकार के जहाजरानी, नौकायन और मछली पकड़ने के कार्यों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। बंदरगाहों पर सुरक्षा की दृष्टि से खड़े जहाजों को सुरक्षित स्थानों पर कसकर बांध दिया गया है। जो लोग समुद्र तट के समीप निवास करते हैं, उन्हें तुरंत अपने आवास खाली कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सख्त चेतावनी दी गई है.
रिकॉर्ड शॉर्ट-टर्म हैवी रेन एडवाइजरी का अर्थ
हाचिजोजीमा और इसके आसपास के क्षेत्रों में उत्पन्न हुई गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जापान के मौसम विज्ञान विभाग ने रिकॉर्ड शॉर्ट-टर्म हैवी रेन एडवाइजरी जारी की है।
सामान्य शब्दों में समझें तो यह चेतावनी तब प्रसारित की जाती है जब किसी सीमित भौगोलिक क्षेत्र में बहुत कम समय के भीतर ऐसी अभूतपूर्व वर्षा हो जाए जो दशकों में एक बार देखने को मिलती है। इस प्रकार की चेतावनी का स्पष्ट संकेत होता है कि उस क्षेत्र में अचानक भयंकर बाढ़ आ सकती है, नदियां उफान पर आ सकती हैं और पर्वतीय क्षेत्रों से मिट्टी खिसक कर बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। इस चेतावनी के जारी होते ही स्थानीय प्रशासनिक अमला तुरंत सक्रिय हो जाता है और राहत कार्य शुरू कर दिए जाते हैं।
जापान की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यहां वर्षा के साथ ही पर्वतों से भूस्खलन होने की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है। इजू द्वीप समूह और हाचिजोजीमा के कई आवास पहाड़ियों की ढलान पर निर्मित हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पर्वतों की मिट्टी अपनी पकड़ खो चुकी है, जिससे किसी भी वक्त बड़े पैमाने पर भूस्खलन की दुर्घटना हो सकती है।
प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रह रहे नागरिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें। आपातकालीन सेवाओं, दमकल विभाग और तटरक्षक बलों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। बाढ़ या भूस्खलन से प्रभावित होने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के लिए राहत शिविरों के द्वार खोल दिए गए हैं।
अगले 48 घंटों की चुनौती और मौसम का अनुमान
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि इस चक्रवात का प्रभाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। आगामी 24 से 48 घंटों की अवधि तक बारिश का यह दौर लगातार जारी रह सकता है। चूंकि वर्षा उत्पन्न करने वाला वेदर फ्रंट एक ही स्थान पर स्थिर हो गया है, इसलिए लंबे समय तक लगातार बारिश होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
जापानी सरकार और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें प्रत्येक गतिविधि पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक तापन यानी ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके परिणामस्वरुप इस प्रकार के शक्तिशाली चक्रवात बार-बार उत्पन्न हो रहे हैं और बेहद कम समय के भीतर भारी तबाही मचा रहे हैं। फिलहाल, इजू द्वीप समूह और जापान के पूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए आने वाले कुछ घंटे बेहद संवेदनशील और कठिनाई भरे रहने वाले हैं।




















