उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत में एक बड़ा इजाफा करते हुए पाँच हजार टन वजनी नए विध्वंसक युद्धपोत ‘कांग कोन’ को आधिकारिक तौर पर अपने बेड़े का हिस्सा बना लिया है। पूर्वी बंदरगाह शहर वोनसन में आयोजित एक विशेष कमीशनिंग समारोह के दौरान देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने इस नए पोत को नौसेना को सौंपा। सरकारी माध्यमों से मिली जानकारी के अनुसार, इस युद्धपोत को मुख्य रूप से एक आक्रामक युद्धपोत करार दिया गया है जो देश की परमाणु जवाबी कार्रवाई प्रणाली का एक अहम हिस्सा बनने के लिए तैयार किया गया है।
परमाणु क्षमता और आक्रामक रणनीति पर जोर
वोनसन में आयोजित समारोह के दौरान किम जोंग-उन ने नए विध्वंसक पोत के बारे में विस्तार से बात करते हुए इसे देश की परमाणु युद्ध प्रतिरोधक क्षमता का मुख्य आधार बताया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह पोत दुश्मनों को बेहद घातक और करारा जवाब देने में पूरी तरह सक्षम होना चाहिए। नेता ने स्पष्ट किया कि समुद्री रक्षा को अभेद्य बनाने और किसी भी बाहरी हमले को पूरी तरह रोकने के लिए देश के नौसैनिक बेड़े को परमाणु हथियारों से लैस बल के रूप में विकसित करना मौजूदा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
भविष्य की नौसैनिक योजनाएं और पनडुब्बी विकास
इस नए युद्धपोत को शामिल करने के साथ ही उत्तर कोरियाई नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया है कि देश आने वाले समय में अपनी नौसैनिक ताकत का और अधिक विस्तार करेगा तथा कई और शक्तिशाली रणनीतिक सैन्य संसाधनों को तैनात किया जाएगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि यह दीर्घकालिक योजना देश के परमाणु ऊर्जा से चलने वाले पनडुब्बी विकास कार्यक्रमों से गहराई से जुड़ी हो सकती है। इस दिशा में काम जनवरी 2021 में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पहली बार सार्वजनिक किया गया था, जबकि दिसंबर 2025 में जारी की गई तस्वीरों में किम जोंग-उन को एक निर्माणाधीन 8,700 टन क्षमता वाली परमाणु-संचालित पनडुब्बी का निरीक्षण करते हुए देखा गया था।
पूर्वी सागर बेड़े की ताकत और पिछला विध्वंसक पोत
सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार, ‘कांग कोन’ को देश के पूर्वी सागर बेड़े में तैनात किया जाएगा ताकि वह एक अडिग परमाणु युद्ध रोधी शक्ति के रूप में समुद्र में देश की संप्रभुता की रक्षा कर सके। दिलचस्प बात यह है कि इस पांच हजार टन वजनी पोत को शामिल करने की घोषणा, देश के पहले इसी श्रेणी के विध्वंसक ‘चोए ह्योन’ के बेड़े में आने के तीन महीने से भी कम समय के भीतर सामने आई है। इससे पहले चोए ह्योन को पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की रक्षा और युद्ध को रोकने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
क्षेत्रीय तनाव और दक्षिण कोरियाई सैन्य अभ्यास
उत्तर कोरिया की ओर से ‘कांग कोन’ को बेड़े में शामिल करने की यह बड़ी घोषणा ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आई है जब दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान मिलकर लगातार पाँच दिनों तक ‘फ्रीडम एज’ नामक सैन्य अभ्यास को अंजाम दे रहे हैं। उत्तर कोरिया ने इस त्रिपक्षीय सैन्य ड्रिल को सीधे तौर पर युद्ध का पूर्वाभ्यास करार दिया था और उसके तुरंत बाद अपने इस नए युद्धपोत की तैनाती की आधिकारिक घोषणा कर दी। दूसरी ओर, दक्षिण कोरियाई ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का आधिकारिक रूप से यह कहना है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास क्षेत्र में केवल शांति और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
वैश्विक महाशक्तियों के क्लब में औपचारिक प्रवेश
इस नए विध्वंसक पोत को अपने सैन्य बेड़े में शामिल करने के साथ ही उत्तर कोरिया ने आधिकारिक रूप से उस अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट क्लब में अपनी धमाकेदार एंट्री कर ली है जिसमें अब तक केवल अमेरिका, रूस और दुनिया के चुनिंदा देश ही शामिल माने जाते थे। वर्तमान में केवल इन्हीं प्रमुख देशों के पास परमाणु-सक्षम नौसैनिक विध्वंसक मौजूद हैं। अमेरिका के पास आर्ले बर्क-श्रेणी के पोत हैं जो टॉमहॉक मिसाइलें दाग सकते हैं, रूस के पास उदालोय और सोव्रेमेनी श्रेणी के पोत हैं जो कलिब्र और जिरकॉन मिसाइलों के परमाणु संस्करण ले जा सकते हैं, और चीन के पास टाइप 055 तथा टाइप 052D जैसे पोत हैं जो लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें ले जाने में सक्षम हैं। अब इस सूची में उत्तर कोरिया के चोए ह्योन और कांग कोन जैसे युद्धपोत भी शामिल हो चुके हैं जो देश की स्टेट न्यूक्लियर काउंटरएक्शन सिस्टम का अहम हिस्सा हैं।





















