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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर कुदरत का कहर, नेपाल के रसुवा में भूस्खलन से गांव तबाह और 160 लोगों की मौतदुनिया
27 अग॰ 2026, 8:53 am (1 घंटे पहले)· 3

कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर कुदरत का कहर, नेपाल के रसुवा में भूस्खलन से गांव तबाह और 160 लोगों की मौत

नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के पास आए विनाशकारी भूस्खलन और फ्लैश फ्लड में 160 से अधिक लोगों की जान चली गई है और 844 लोग लापता हैं, जिनमें कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

हिमालयी देश नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई प्राकृतिक विभीषिका ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी के तटीय क्षेत्र में अचानक आए भयंकर भूस्खलन और तेज बहाव वाले पानी के कारण विशाल तबाही देखने को मिली है। इस आपदा में अब तक कम से कम 160 लोगों की दर्दनाक मौत दर्ज की जा चुकी है, जबकि 844 लोग अभी भी लापता हैं। गायब हुए लोगों में स्थानीय निवासियों के अलावा कैलाश-मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर निकले कई भारतीय नागरिक और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। इस भीषण त्रासदी ने उन तीर्थयात्रियों के दिलों में गहरा खौफ पैदा कर दिया है, जो कुछ ही समय पहले इस मार्ग से अपनी यात्रा पूरी करके सुरक्षित वापस लौटे थे।

रसुवा के गांव का मिटा नामोनिशान और चीन का इमिग्रेशन सेंटर ध्वस्त

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे भयंकर प्रभाव नेपाल, तिब्बत और चीन की सीमा से लगे रसुवा और केरुंग क्षेत्र में देखने को मिला है। पहाड़ी इलाकों में हुए इस विनाशकारी हादसे के कारण सीमा पर बना चीन का प्रमुख इमिग्रेशन सेंटर पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है। इसके अलावा त्रिशूली नदी, भोटेकोशी नदी के तटीय क्षेत्र, त्रिशूली बाजार और शाफ्रुबेसी के नजदीकी बस्तियों में भारी नुकसान की सूचना मिली है। कई रिहायशी इमारतें और दुकानें पानी के तेज बहाव में बह गईं। नदी किनारे स्थित एक पूरा गांव इस बाढ़ और मलबे की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गया है, जिससे वहां का भूगोल ही बदल गया है।

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कोलकाता के श्रद्धालु का डरावना अनुभव और बाल-बाल बची जान

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के निवासी अनिंद्य मुखर्जी हाल ही में अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ कैलाश-मानसरोवर यात्रा पूरी करके लौटे हैं। अनिंद्य ने बताया कि लगभग ढाई महीने पहले अपनी यात्रा के दौरान वह इसी तबाह हुए गांव में लगातार तीन रातों तक ठहरे थे। जब उन्हें यह खबर मिली कि जिस गांव में उन्होंने समय बिताया था, वह अब पूरी तरह उजड़ चुका है, तो वह स्तब्ध रह गए। अनिंद्य ने कहा कि वह यह सोचकर ही कांप उठते हैं कि अगर उनका यात्रा कार्यक्रम कुछ दिन आगे होता, तो वे भी इस जानलेवा आपदा की चपेट में आ सकते थे।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जारी है राहत कार्य

आपदा की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों में व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, क्षेत्र में लगातार खराब बने मौसम और भूस्खलन के कारण तबाह हुई सड़कों की वजह से राहत टीमों को दूरदराज के हिस्सों तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चुनौती उन दर्जनों लोगों की तलाश करना है, जिनसे हादसे के बाद से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। लापता भारतीय तीर्थयात्रियों के परिजनों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और खोज अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ते कुदरती खतरों पर चिंता

पहाड़ी इलाकों में हर साल होने वाले इस तरह के हादसों पर अनिंद्य मुखर्जी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और पहाड़ों के धंसने की घटनाएं अब हर साल की कहानी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति लगातार इंसान को खतरे के संकेत दे रही है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हम उन चेतावनियों को गंभीरता से समझ रहे हैं। अपनी आंखों से देखे गए सुंदर पर्वतीय इलाके को इस तरह मलबे में तब्दील होते देखना हर किसी के लिए एक बेहद दर्दनाक और भयानक अनुभव है।

सवाल-जवाब

नेपाल में यह प्राकृतिक आपदा किस जिले में आई है?
यह प्राकृतिक आपदा नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के तटीय क्षेत्र में आई है।
इस हादसे में अब तक कितने लोगों के हताहत होने की पुष्टि हुई है?
ताजा जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है और 844 लोग लापता हैं।
क्या इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं?
हां, लापता 844 लोगों में कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
नेपाल-चीन सीमा पर किस प्रमुख केंद्र को नुकसान पहुंचा है?
नेपाल-चीन और नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित रसुवा-केरुंग इलाके में चीन का इमिग्रेशन सेंटर मलबे में तब्दील हो गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·36 मिनट पहले

यह त्रासदी दर्शाती है कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध बुनियादी ढांचा विकास कितनी भारी मानवीय कीमत मांग रहे हैं। नेपाल, चीन और भारत के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यावरणीय सुरक्षा के साझा कड़े मानदंड तय करने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा इस तरह की आपदाएं भविष्य में कूटनीतिक और आर्थिक संकट को और गहराएंगी।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·35 मिनट पहले

यह आपदा केवल एक प्राकृतिक दुर्घटना नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय तंत्र पर एक गंभीर चेतावनी है। नेपाल और तिब्बत सीमा पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की रफ़्तार और जलवायु संकट के बीच समन्वय की भारी कमी सामने आ रही है। अगर भारत, नेपाल और चीन ने इस क्षेत्र में पारिस्थितिकीय सुरक्षा के लिए संयुक्त नीति नहीं बनाई, तो सीमावर्ती व्यापार और तीर्थयात्रा मार्गों की सुरक्षा हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर भी दबाव बढ़ेगा।

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