नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भीषण तबाही मचाई है। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में कम से कम 160 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि विदेशी नागरिकों समेत सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। तेज बहाव में कई बस्तियां और बुनियादी ढांचा पूरी तरह बह गए हैं। प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे राहत कार्य में 114 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाकर काठमांडू और रसुवा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस जलप्रलय के बीच एक चमत्कारिक घटना सामने आई है, जहाँ रसुवा जिले के 24 वर्षीय मजदूर बिबेक कुमाल मौत के मुँह से सही-सलामत बाहर निकलने में कामयाब रहे।
5 फीट गहरे गड्ढे से शुरू हुई जिंदगी की जंग
रसुवा जिले के रहने वाले बिबेक कुमाल बाढ़ आने के समय निचले इलाके बिदुर में काम कर रहे थे। वह वहाँ एक नवनिर्मित मकान के बाहर शौचालय निर्माण के लिए 5 फीट गहरा गड्ढा खोदने में व्यस्त थे। काम के दौरान ही उन्हें अचानक पानी के फुसफुसाहट जैसी आवाज सुनाई दी। खतरे का अहसास होते ही मकान के बाहर खड़े उनके चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने की चेतावनी दी और जोर-जोर से चिल्लाने लगे।
सहकर्मियों की आवाज सुनते ही बिबेक बिना देर किए 5 फीट गहरे गड्ढे से बाहर निकले और सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे। लेकिन पानी की प्रचंड रफ्तार ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया। बिबेक ने बताया कि जब वह भाग रहे थे, तभी किसी भीषण भूकंप की तरह गड़गड़ाहट की तेज आवाज के साथ पानी की एक बहुत बड़ी दीवार नीचे गिरी। कुछ ही पलों में पानी, कीचड़ और भारी पत्थरों की तेज लहर ने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया और दूर तक बहाकर ले जाने लगी।
आम का पेड़ और तबाही का मंजर
बाढ़ के प्रचंड वेग में बहते हुए बिबेक कुमाल के सामने अचानक आम का एक पेड़ आ गया। उन्होंने डूबते हुए अपनी पूरी ताकत लगाकर उस पेड़ की शाखाओं को थाम लिया और उससे लटक गए। बिबेक के अनुसार, "किस्मत से मैं आम के पेड़ में फंस गया था, वरना मैं बहकर मर जाता।" पेड़ से लटके-लटके ही उन्होंने उस नए बने मकान को अपनी आँखों के सामने पानी के तेज बहाव में गायब होते देखा जहाँ वे कुछ मिनट पहले तक काम कर रहे थे।
बाढ़ की लहरों में बहकर आए एक बड़े पत्थर और तेज पानी के थपेड़ों के कारण बिबेक के दाहिने पैर में गंभीर चोट आ गई। काफी देर तक पेड़ के सहारे लटके रहने के बाद नेपाल पुलिस की टीम ने मौके पर पहुँचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल उनका इलाज काठमांडू स्थित नेशनल ट्रॉमा सेंटर के अस्पताल में चल रहा है, जहाँ वह अपनी इस चमत्कारिक बचाव की कहानी बयाँ कर रहे हैं।
स्कूल से लौट रही 11 साल की बच्ची की आपबीती
इस आपदा के बीच बचाई गई एक अन्य पीड़िता 11 वर्षीय रिहाना लामिछाने भी हैं। रिहाना उस समय फ्लैश फ्लड की चपेट में आ गई थीं जब वह अपना स्कूल खत्म करके घर लौट रही थीं। नदी पार करने के दौरान अचानक पानी का स्तर बेहद तेजी से बढ़ गया और तेज बहाव उन्हें अपने साथ ले जाने लगा। हालांकि, रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें समय पर बचा लिया।
अस्पताल में भर्ती रिहाना ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि जब वह नदी पार कर रही थीं, तभी अचानक बाढ़ का पानी तेजी से नीचे आ गया। उन्होंने आगे कहा, "मैं सुरक्षित हूँ, इसलिए खुश हूँ, लेकिन मुझे नहीं पता कि मेरे दोस्तों के साथ क्या हुआ।" रिहाना की तरह कई अन्य बच्चे और स्थानीय निवासी भी इस अचानक आई आपदा के बाद से अपनों की तलाश में जुटे हुए हैं।
भूकंप, मलबे का गिरना और राहत कार्य
अधिकारियों और विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के अनुसार, नेपाल और तिब्बत सीमा के पास आई यह विनाशकारी बाढ़ नदी के ऊपरी इलाके में भारी मात्रा में मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थरों के अचानक गिरने के कारण आई। नदी का मार्ग अवरुद्ध होने से पानी का भयानक दबाव बना और वह मलबे के साथ निचले इलाकों में तबाही मचाता हुआ फैल गया। इस आपदा के आने से ठीक कुछ समय पहले क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया था, जिसे इस भूस्खलन और बाढ़ का संभावित कारण माना जा रहा है।
बाढ़ के कारण नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में सड़कों, पुलों और बस्तियों को व्यापक नुकसान पहुँचा है। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। अब तक 114 से ज्यादा घायल और प्रभावित लोगों को निकालकर अस्पतालों में पहुँचाया गया है, जहाँ डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ उनका इलाज कर रहे हैं। मौतों का आंकड़ा 160 पार कर जाने से पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है।





















