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नेपाल की संसद में काले चश्मे पहनकर बैठ सकेंगे बालेन शाह, मेडिकल रिपोर्ट के बाद मिली आधिकारिक छूटदुनिया
27 अग॰ 2026, 9:43 am (73 दिन पहले)· 3

नेपाल की संसद में काले चश्मे पहनकर बैठ सकेंगे बालेन शाह, मेडिकल रिपोर्ट के बाद मिली आधिकारिक छूट

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को संसद में अपने सिग्नेचर काले चश्मे पहनने की इजाजत मिल गई है। आंखों में तेज रोशनी से होने वाली समस्या के चलते अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर संसद सचिवालय ने यह छूट दी है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को देश की संसद के भीतर अपने बहुचर्चित काले चश्मे पहनने की औपचारिक अनुमति मिल गई है। संसद की कार्यवाही के दौरान डार्क सनग्लासेस पहनने पर लगे प्रतिबंध के बीच बालेन शाह के कार्यालय ने संसद सचिवालय को एक मेडिकल रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री को तेज रोशनी की वजह से देखने में परेशानी होती है, जिसके चलते उन्हें धूप का चश्मा पहनने की सलाह दी गई है। संसद सचिवालय ने इस चिकित्सकीय आधार को स्वीकार करते हुए उन्हें सदन के भीतर चश्मा पहने रखने की मंजूरी दे दी है।

चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर संसद सचिवालय ने दी मंजूरी

संसदीय कार्यवाही के दौरान चश्मा पहनने का यह फैसला पूरी तरह से चिकित्सकीय सलाह पर आधारित है। हाल ही में तेज रोशनी में आंखों में खिंचाव और देखने में असुविधा की शिकायत के बाद 36 वर्षीय प्रधानमंत्री बालेन शाह ने काठमांडू स्थित बीरेंद्र मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी आंखों का परीक्षण कराया था। वहां नेत्र रोग विशेषज्ञ एसोसिएट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सचित ढकाल ने उनकी जांच की। जांच के बाद डॉक्टर ढकाल ने सलाह दी कि जब भी प्रधानमंत्री को तेज रोशनी का सामना करना पड़े, तो वे सुरक्षा के लिए धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें और जरूरत के अनुसार आई ड्रॉप्स डालें।

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इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की लिखित सलाह फेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट के पास जमा करवा दी। संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी ने पुष्टि की कि जमा कराए गए मेडिकल दस्तावेजों से यह साफ तौर पर साबित होता है कि प्रधानमंत्री के चश्मा पहनने का कारण विशुद्ध रूप से स्वास्थ्य संबंधी है। सचिवालय के डिप्टी प्रवक्ता अनंत प्रसाद कोइराला ने इस मामले पर स्थिति और स्पष्ट करते हुए कहा कि सम्मानित प्रधानमंत्री को सनग्लास की आवश्यकता क्यों है, इसके पीछे ठोस मेडिकल कारण हैं और यदि सदन में तेज रोशनी की स्थिति बनती है, तो उन्हें चश्मा पहनने की पूरी अनुमति रहेगी।

संसदीय ड्रेस कोड और काले चश्मे पर प्रतिबंध की वजह

नेपाल की प्रतिनिधि सभा में काले चश्मे को लेकर यह पूरा घटनाक्रम इस महीने की शुरुआत में शुरू हुआ था। संसद के स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने सभी राजनीतिक दलों के व्हिप को कड़े निर्देश दिए थे कि वे अपने सांसदों द्वारा सदन के भीतर डार्क ग्लास पहनकर आने पर रोक लगाएं। स्पीकर अर्याल का कहना था कि बिना किसी स्वास्थ्य कारण के कार्यवाही के दौरान गहरा काला चश्मा लगाने की परंपरा पर लगातार सवाल उठ रहे थे और जनता व जनप्रतिनिधियों की ओर से इसकी आलोचना की जा रही थी। इसके बाद संसद ने नियम बनाया कि किसी भी सदस्य को सदन में काला चश्मा लगाने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि उनके पास कोई वैध मेडिकल कारण न हो।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नियमों को तोड़ने के बजाय स्थापित प्रक्रिया का पालन किया। उनके कार्यालय की ओर से मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वे किसी नियम का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य आधार पर मिलने वाली कानूनी छूट का लाभ ले रहे हैं। इस प्रकार स्पीकर के निर्देश के बाद पैदा हुई असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई और उन्हें सदन में अपना सिग्नेचर लुक बनाए रखने का रास्ता साफ हो गया।

संसदीय प्रश्नोत्तर सत्र और 26 अगस्त की बैठक

काले चश्मे को लेकर मिली इस छूट के बीच प्रधानमंत्री 26 अगस्त को प्रतिनिधि सभा के विशेष सत्र में शामिल हुए। प्रधानमंत्री बनने के बाद हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के नियमों के तहत सांसदों के साथ सीधे सवाल-जवाब के सत्र में यह उनकी पहली औपचारिक उपस्थिति थी। इससे पहले संसदीय बैठकों से उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई सांसदों ने गहरी चिंता जताई थी, जिसके बाद स्पीकर ने उन्हें सदन में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।

26 अगस्त के इस बहुचर्चित सत्र के दौरान कुल 11 सांसदों ने प्रधानमंत्री के समक्ष अपने सवाल दर्ज कराए थे। संसद में उनकी मौजूदगी और उनके बयानों के साथ-साथ हर किसी की नजर इस बात पर भी टिकी रही कि किस तरह उन्होंने मेडिकल नियमों के तहत अपनी पारंपरिक पहचान को बनाए रखा।

रैपर से मेयर और पीएम तक: एक राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीक

36 साल के बालेन शाह की पहचान हमेशा से नेपाल के पारंपरिक नेताओं से अलग रही है। राजनीति में आने से पहले वे एक मशहूर रैपर थे और काठमांडू के मेयर बनने के दौरान ही आयताकार काले चश्मे उनकी जनसभाओं और सार्वजनिक जीवन का अटूट हिस्सा बन गए थे। काले कपड़ों और डार्क सनग्लासेस के उनके इस अंदाज को नेपाल के युवाओं ने पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक निर्दलीय और नए दौर के नेता के रूप में देखा।

समय के साथ उनका यह व्यक्तिगत अंदाज एक बड़े फैशन ट्रेंड में बदल गया। नेपाल में उनके समर्थक और युवा इस लुक को बेहद चाव से अपनाने लगे और इसे बालेन दाई को चश्मा नाम दिया गया। काठमांडू के चश्मे के बाजारों और दुकानों में इसी तरह के आयताकार डार्क फ्रेम वाले चश्मों की भारी मांग देखी गई, जिन्हें व्यापारी बालेन सनग्लासेज के नाम से बेचने लगे। अब काठमांडू की सड़कों से लेकर देश की संसद और प्रधानमंत्री कार्यालय तक, यह चश्मा बालेन शाह की मजबूत राजनीतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक बन चुका है।

सवाल-जवाब

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह संसद में हमेशा काला चश्मा क्यों पहनते हैं?
बीरेंद्र मिलिट्री हॉस्पिटल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सचित ढकाल की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, बालेन शाह को तेज रोशनी में देखने में परेशानी होती है, इसलिए उन्हें सुरक्षा के तौर पर सनग्लास पहनने की चिकित्सकीय सलाह दी गई है।
क्या नेपाल संसद में काला चश्मा पहनने पर पाबंदी है?
हां, स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने बिना किसी मेडिकल कारण के संसद में डार्क सनग्लासेस पहनने पर रोक लगाई है। हालांकि, वैध मेडिकल रिपोर्ट जमा करने पर इसके लिए छूट दी जाती है।
संसद सचिवालय ने बालेन शाह को क्या अनुमति दी है?
संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी और डिप्टी प्रवक्ता अनंत प्रसाद कोइराला ने पुष्टि की है कि जमा की गई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री को तेज रोशनी में चश्मा पहनने की अनुमति दी गई है।
बालेन शाह के काले चश्मे का फैशन ट्रेन क्या है?
काठमांडू के मेयर रहने के समय से ही उनका आयताकार काला चश्मा उनकी पहचान बन गया था। समर्थक इसे 'बालेन दाई को चश्मा' कहते हैं और काठमांडू के बाजारों में 'बालेन सनग्लासेज' की भारी मांग रहती है।
26 अगस्त को संसद में क्या हुआ था?
26 अगस्त को प्रधानमंत्री बालेन शाह प्रतिनिधि सभा के सीधे सवाल-जवाब सत्र में शामिल हुए, जहां 11 सांसदों ने उनसे सवाल पूछे थे।
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टिप्पणियाँ 2

Sophie Laurent@sophie-laurent·72 दिन पहले

नेपाल की संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह के काले चश्मे को लेकर उठा यह विवाद भले ही आंतरिक ड्रेस कोड का लगे, लेकिन यह दक्षिण एशिया में राजनीतिक पारदर्शिता और प्रतीकों के प्रति जनता की बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है। जब नियम कायदे सख्त होते हैं, तो शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्थापित कानूनी और चिकित्सा प्रक्रियाओं का पालन करना लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·72 दिन पहले

संसदीय नियमों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच का यह संतुलन लोकतांत्रिक संस्थाओं की परिपक्वता को रेखांकित करता है। जब किसी देश का शीर्ष नेतृत्व औपचारिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करने के बजाय मेडिकल दस्तावेजों के जरिए पारदर्शी मार्ग चुनता है, तो यह जनता के बीच संस्थागत जवाबदेही का एक मजबूत संदेश देता है। यह घटना दर्शाती है कि लोकतांत्रिक प्रणाली में कड़े नियमों का पालन करते हुए भी वैध स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए कैसे स्थान बनाया जा सकता है।

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