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कराची में दहला पाकिस्तान: सुरक्षा बलों पर हमले के पीछे किसका हाथ?दुनिया
2 घंटे पहले· 3

कराची में दहला पाकिस्तान: सुरक्षा बलों पर हमले के पीछे किसका हाथ?

कराची में पाकिस्तानी रेंजर्स के काफिले पर हुए घातक हमले ने देश की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार से जुड़े संगठन ने ली है, जो पहले भी कई भीषण घटनाओं को अंजाम दे चुका है।

Ayesha SiddiquiAyesha SiddiquiPakistan Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को पालने-पोसने के आरोपों का सामना करता रहा है, लेकिन अब वही आतंकवाद उसके खुद के गले की फांस बन चुका है। शनिवार को पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची में हुए एक शक्तिशाली विस्फोट ने पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। इस हमले में मुख्य रूप से पाकिस्तानी रेंजर्स को निशाना बनाया गया था। हमलावरों ने विस्फोटकों से भरे एक वाहन का उपयोग किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक जबरदस्त गोलीबारी भी हुई। इस मुठभेड़ में 6 उग्रवादियों को मार गिराने का दावा किया गया है।

हमले की जिम्मेदारी और संगठन का इतिहास

प्राप्त जानकारियों के अनुसार, कराची में हुए इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से संबद्ध जमात-उल-अहरार ने ली है। हमले को अंजाम देने वाला आत्मघाती दस्ता 'खुलाफा-ए-राशिदीन इस्तिशहादी ब्रिगेड' के नाम से जाना जाता है। इस संगठन का प्रभाव मुख्य रूप से अफगानिस्तान की सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अधिक माना जाता है। हालांकि, पाकिस्तान की आधिकारिक सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इस दावे की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।

जमात-उल-अहरार का उदय वर्ष 2014 में हुआ था, जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से अलग हुए कुछ कमांडरों ने मिलकर इस कट्टरपंथी संगठन की नींव रखी थी। ओमर खालिद खुरासानी के नेतृत्व में बने इस संगठन का घोषित लक्ष्य पाकिस्तान में अपनी कट्टरपंथी विचारधारा थोपना, सरकारी संस्थानों को अस्थिर करना और सुरक्षा बलों पर घातक हमले करना रहा है। यह समूह विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और आदिवासी क्षेत्रों में बेहद सक्रिय रहा है, जहां इसने सुरक्षा बलों के साथ-साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों को भी निशाना बनाया है।

रक्तपात का खौफनाक अतीत

जमात-उल-अहरार का इतिहास खूनी हमलों से भरा पड़ा है। वर्ष 2016 में लाहौर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में ईस्टर के मौके पर हुए आत्मघाती धमाके का जिम्मेदार भी यही संगठन था। उस दिल दहला देने वाली घटना में 70 से ज्यादा मासूमों की जान गई थी, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या काफी अधिक थी। इसके अतिरिक्त, नवंबर 2014 में वाघा सीमा पर हुआ हमला भी इसी संगठन की काली करतूतों में शामिल है। 26 अगस्त, 2014 को एक डेढ़ घंटे लंबे वीडियो के माध्यम से इस समूह ने अपने आधिकारिक गठन की घोषणा की थी।

इन चरमपंथियों के संबंध अल-कायदा सहित कई अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से रहे हैं। भले ही यह समूह टीटीपी से अलग हुआ था, लेकिन समय के साथ इनके बीच फिर से सहयोग बढ़ा। अंततः साल 2020 में जमात-उल-अहरार ने खुद को दोबारा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान में विलीन कर लिया, जिसके बाद इसकी अलग पहचान लगभग समाप्त हो गई।

पाकिस्तानी सेना के लिए निरंतर चुनौती

पाकिस्तान की फौज और वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने इस संगठन के खात्मे के लिए कई सैन्य अभियान छेड़े हैं। इन ऑपरेशनों में संगठन के कई अड्डे नष्ट किए गए और उसके कई शीर्ष कमांडर मारे गए। इन सबके बावजूद, इस समूह से जुड़े आतंकी सीमावर्ती इलाकों में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं और हिंसक वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। जमात-उल-अहरार को पाकिस्तान सहित वैश्विक स्तर पर कई देशों और संस्थाओं ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। यह दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है और इस ताजा हमले ने पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियानों को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता को फिर से साबित कर दिया है।

इसका आप पर असर

भारत में: सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर भारत की सीमा सुरक्षा पर पड़ता है, जिससे सीमा पर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत होती है।

कराची में: शहर के स्थानीय निवासियों के लिए आवाजाही के दौरान सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के समय सुरक्षा की स्थिति अधिक संवेदनशील रहने की संभावना है।

सवाल-जवाब

कराची हमले का मुख्य निशाना कौन था?
इस हमले में मुख्य रूप से पाकिस्तानी रेंजर्स को निशाना बनाया गया था।
इस हमले की जिम्मेदारी किस संगठन ने ली है?
इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से संबद्ध जमात-उल-अहरार ने ली है।
क्या इस हमले में कोई हताहत हुआ?
हमले के बाद हुई गोलीबारी में 6 उग्रवादियों के मारे जाने की सूचना है।
जमात-उल-अहरार का गठन कब हुआ था?
इस संगठन का गठन वर्ष 2014 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से अलग हुए कमांडरों द्वारा किया गया था।
#दुनिया#कराची#पाकिस्तानीरेंजर्स#आतंकवाद#जमात-उल-अहरार#टीटीपी

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