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क्वॉड बना रहा इंडो-पैसिफिक में नया सुरक्षा घेरा, भारत, अमेरिका और जापान ने कसी कमरदुनिया
15 सित॰ 2026, 9:26 am (45 दिन पहले)· 9

क्वॉड बना रहा इंडो-पैसिफिक में नया सुरक्षा घेरा, भारत, अमेरिका और जापान ने कसी कमर

क्वॉड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को समुद्री नाकेबंदी से सुरक्षित रखने के लिए एक नया आपातकालीन लॉजिस्टिक्स ग्रिड तैयार किया है। टोक्यो में हुए अभ्यास के बाद इस साझा रणनीति को बीजिंग में एशियाई नाटो की आहट के रूप में देखा जा रहा है।

दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों पर बढ़ते तनाव के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक नया रणनीतिक खाका खिंच चुका है। पश्चिम एशिया के होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट से सबक लेते हुए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर एक साझा आपातकालीन लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार किया है। टोक्यो में आयोजित दो दिवसीय टेबलटॉप अभ्यास के बाद सामने आई यह रणनीति बताती है कि क्वॉड अब महज कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन और समंदर पर एक ठोस ताकत बनता जा रहा है। बीजिंग में इस कदम को एशियाई नाटो के उभार के रूप में देखा जा रहा है।

आपदा राहत के पर्दे के पीछे सैन्य तैयारी

आधिकारिक दस्तावेजों में इस व्यवस्था को इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क यानी आईपीएलएन नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिक आपदाओं में मानवीय सहायता पहुंचाना बताया गया है। हालांकि भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरी तरह से दोहरे इस्तेमाल वाली सैन्य व्यवस्था है। एक साझा मानक संचालन प्रक्रिया के तहत अब ये चारों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के बंदरगाहों, हवाई अड्डों, ईंधन डिपो और सप्लाई चेन का सीधा उपयोग कर सकेंगे। इसका मतलब साफ है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव होने की स्थिति में चारों देशों की नौसेनाएं बिना समय गंवाए एक-दूसरे के संसाधनों के सहारे मोर्चा संभाल लेंगी।

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मलक्का से प्रशांत तक ड्रैगन की घेराबंदी

चीन लगातार दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप बनाकर और प्रशांत क्षेत्र के देशों में अपना प्रभाव फैलाकर समुद्री व्यापार पर एकाधिकार जमाने की कोशिश कर रहा है। क्वॉड की यह नई रणनीति इसी विस्तारवादी नीति की काट है। भारत का अंडमान-निकोबार कमान और मलक्का जलडमरूमध्य पर उसकी मजबूत पकड़ चीन की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी मानी जाती है। अब जब अमेरिका के गुआम और हवाई ठिकानों को जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के नौसैनिक अड्डों के साथ एक ही लॉजिस्टिक्स धागे में पिरो दिया गया है, तो चीन के लिए समंदर में मनमानी करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। तेल और माल ढुलाई की मुख्य धुरी कहे जाने वाले ये मार्ग किसी भी संकट के समय पूरी तरह सुरक्षित रखे जा सकेंगे।

भारत की संतुलित और सख्त कूटनीति

यह रणनीतिक घेराबंदी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत एक तरफ ब्रिक्स मंचों पर क्षेत्रीय स्थिरता की बात कर रहा है और दूसरी तरफ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी कूटनीतिक संवाद बनाए हुए है। इसके बावजूद टोक्यो की बैठक में भारत की सक्रिय भागीदारी यह साबित करती है कि नई दिल्ली अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। भारत किसी औपचारिक सैन्य गुट का हिस्सा बने बिना भी अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए पश्चिमी देशों के साथ मिलकर काम करने की पूरी क्षमता रखता है। यह कदम इस बात की तस्दीक करता है कि इंडो-पैसिफिक में शांति केवल शक्ति संतुलन के सहारे ही कायम रह सकती है।

टोक्यो अभ्यास और संस्थागत तालमेल

जापानी रक्षा मंत्रालय की मेजबानी में 3 और 4 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ यह टेबलटॉप अभ्यास मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं और नागरिक राहत अभियानों पर केंद्रित था। इस कवायद का वास्तविक उद्देश्य आईपीएलएन के दायरे में एक साझा एसओपी को अमलीजामा पहनाना था, ताकि संकट के समय सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे का निर्बाध इस्तेमाल हो सके। यह आयोजन साल 2025 में हवाई और गुआम में हुए ऑपरेशन्स का अगला चरण है, जिसने पहली बार चारों देशों के बीच परिचालन तालमेल को औपचारिक रूप प्रदान किया है।

भू-राजनीतिक मायने और दोहरे उपयोग की क्षमता

कागजों पर यह पहल भले ही चक्रवात, बाढ़ या सुनामी जैसे प्राकृतिक संकटों से निपटने के लिए पेश की गई हो, लेकिन आधुनिक रणनीतिकारों का मानना है कि रसद किसी भी संघर्ष की रीढ़ होती है। जब चार देश अपने बंदरगाह और आपूर्ति तंत्र को साझा करने का समझौता कर लेते हैं, तो इसे किसी भी वक्त नौसैनिक घेराबंदी के रूप में बदला जा सकता है। यह नेटवर्क मलक्का से लेकर दक्षिण चीन सागर तक एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करता है, जो बीजिंग को साफ संदेश देता है कि आपातकाल में ये देश अपनी संपत्तियों को तुरंत तैनात कर सकते हैं।

एशियाई नाटो के आरोपों की हकीकत

चीन अक्सर क्वॉड को इस क्षेत्र को विभाजित करने वाला एशियाई नाटो कहकर खारिज करने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन को आगे रखकर इस गठबंधन ने आसियान और छोटे द्वीप राष्ट्रों के बीच अपनी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। इस कूटनीतिक चाल ने बीजिंग की आक्रामक बयानबाजी की धार को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे भारत और उसके सहयोगियों को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का खुला मौका मिल रहा है।

सवाल-जवाब

क्वॉड देशों ने हाल ही में कौन सी नई रणनीति तैयार की है?
क्वॉड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नाकेबंदी से बचाने के लिए एक आपातकालीन लॉजिस्टिक्स ग्रिड तैयार किया है।
यह टेबलटॉप अभ्यास कहाँ और कब आयोजित किया गया था?
यह दो दिवसीय अभ्यास टोक्यो में 3 और 4 सितंबर 2026 को जापानी रक्षा मंत्रालय की मेजबानी में संपन्न हुआ।
इस समझौते का आधिकारिक नाम क्या है?
इस कवायद को इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क यानी आईपीएलएन नाम दिया गया है।
इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य आपदा राहत के साथ-साथ संकट के समय चारों देशों के सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे का निर्बाध इस्तेमाल करना है।
चीन इस गठजोड़ को किस रूप में देखता है?
चीन अक्सर क्वॉड को इस क्षेत्र को विभाजित करने वाले एशियाई नाटो के रूप में खारिज करता रहा है।
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