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अमेरिका-कनाडा टैरिफ जंग में डोनाल्ड ट्रंप की फजीहत, 8 सितंबर से मार्क कार्नी दिखाएंगे तेवरदुनिया
23 अग॰ 2026, 6:50 am (1 घंटे पहले)· 2

अमेरिका-कनाडा टैरिफ जंग में डोनाल्ड ट्रंप की फजीहत, 8 सितंबर से मार्क कार्नी दिखाएंगे तेवर

डोनाल्ड ट्रंप और मार्क कार्नी के बीच टैरिफ को लेकर व्यापारिक तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों पर डॉलर-फॉर-डॉलर शुल्क लगाने का ऐलान किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान संघर्ष के मोर्चे पर नुकसान उठाने के बाद अब उत्तरी अमेरिकी पड़ोसी देश कनाडा के साथ एक नया व्यापारिक विवाद मोल ले लिया गया है। दोनों देशों के बीच काफी समय से दबाव की कूटनीति चल रही थी, लेकिन अब यह मामला खुलकर आमने-सामने के टैरिफ संघर्ष में बदल चुका है। वाशिंगटन और ओटावा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दोटूक शब्दों में ऐलान किया है कि अमेरिका के हर एक शुल्क के जवाब में कनाडा भी ठीक उतना ही यानी डॉलर-फॉर-डॉलर टैरिफ वसूलेगा। सीधी सी रणनीति यह है कि अमेरिकी सामान पर जितना शुल्क थोपा जाएगा, कनाडाई बाजार में अमेरिकी उत्पादों को भी उतने ही भारी भरकम शुल्कों का सामना करना पड़ेगा।

कनाडा के जवाबी शुल्क से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़े झटके

विश्लेषकों और आम लोगों के मन में यही सवाल है कि क्या कनाडा का यह आक्रामक कदम अमेरिकी आर्थिक व्यवस्था को हिला पाएगा। इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है कि इससे अमेरिकी बाजार पर गहरा असर पड़ेगा। कनाडा की तरफ से लगाए जाने वाले इन नए शुल्कों की सीधी मार स्टील, डेयरी सेक्टर, घरेलू इस्तेमाल के उपकरण, कृषि मशीनरी, पल्प और पेपर के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम उद्योगों पर पड़ने वाली है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट किया है कि इन जवाबी शुल्कों की विस्तृत रूपरेखा आने वाले दिनों में सार्वजनिक कर दी जाएगी और लेबर डे के तुरंत बाद यानी 8 सितंबर से इसे आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा।

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ऊर्जा के मोर्चे पर सुपरपावर की लाचारी

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने व्यापार घाटे के पीछे छिपे गणित को समझाते हुए बताया है कि दोनों देशों के बीच नजर आने वाला यह घाटा मूल रूप से ऊर्जा कारोबार की वजह से है। यह अकाट्य सच है कि अमेरिका अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए पूरी तरह कनाडा पर टिका हुआ है। यदि उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका अपनी जरूरत की लगभग 99% प्राकृतिक गैस का आयात अकेले कनाडा से ही करता है, जबकि अपनी कुल बिजली का लगभग 85% हिस्सा भी वहीं से खरीदता है। आसान शब्दों में कहें तो अमेरिकी पावर सेक्टर की धड़कनें कनाडाई ऊर्जा आपूर्ति पर ही चल रही हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का कारोबार करने वाले अमेरिका को अपनी जरूरत का करीब 60% कच्चा तेल भी कनाडा से ही मिलता है। इस पूरी सप्लाई चेन में यदि किसी भी प्रकार का व्यवधान आता है, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा सकती है। यही वजह है कि कनाडाई प्रधानमंत्री ने कटाक्ष करते हुए यहां तक कह दिया है कि अगर कनाडा अपनी ऊर्जा सप्लाई को रोक दे, तो सुपरपावर अमेरिका की आर्थिक रफ्तार भी थम जाएगी।

आपूर्ति श्रृंखला और कारोबार पर मंडराता संकट

कनाडा अमेरिकी कंपनियों के लिए बहुत बड़ा और अहम बाजार है। इस नए जवाबी टैरिफ के लागू होने से अमेरिकी फर्मों के लिए कनाडा में माल भेजना बेहद महंगा सौदा बन जाएगा, जिससे उनकी बिक्री में भारी गिरावट आएगी और बाजार की हिस्सेदारी भी सिमट जाएगी। पिछले अनुभवों को देखें तो कनाडाई जवाबी शुल्कों की वजह से अमेरिकी निर्यातक पहले भी बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इस तरह के टैरिफ वार से देशों के बीच की क्रॉस-बॉर्डर सप्लाई चेन खंडित हो जाती है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल और खर्चीली हो जाती है। अंततः इससे अमेरिकी कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ती है और उनकी कार्यकुशलता में भी गिरावट आती है। इस तरह के व्यापारिक युद्धों से कुल वैश्विक व्यापार सिकुड़ता है, निवेश के मोर्चे पर अनिश्चितता बढ़ती है और बाजार का माहौल बिगड़ता है। विभिन्न आर्थिक अध्ययनों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि यदि USMCA समझौता बड़े पैमाने पर टूटता है, तो इसका अमेरिकी GDP पर लंबे समय तक बहुत बुरा असर पड़ेगा और जवाबी शुल्क इस संकट को और ज्यादा गहरा कर देंगे.

अमेरिका की शर्तों को ठुकराने की पीछे की वजह

इससे पहले दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगातार बातचीत का दौर चल रहा था और कुछ वक्त पहले तक यह उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए कनाडा ने अपने कुछ पुराने जवाबी टैरिफ को वापस लेने की पेशकश तक कर दी थी, लेकिन वार्ताओं के अंतिम चरण में अमेरिकी पक्ष की ओर से ऐसी शर्तें रख दी गईं जिन्हें स्वीकार करना कनाडा के लिए नामुमकिन था। मार्क कार्नी के अनुसार अमेरिकी की उन आखिरी मांगों में कनाडाई ऑटोमोबाइल सेक्टर को मिलने वाली टैरिफ राहत को सीमित करना, कनाडा के अन्य संप्रभु देशों के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते करने के अधिकार पर अंकुश लगाना और देश की भाषा, संस्कृति तथा संप्रभुता को प्रभावित करने वाली अनुचित शर्तें शामिल थीं। दूसरी ओर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस विवाद पर अपने देश का पक्ष रखते हुए दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने कनाडा को स्टील, ऑटोमोबाइल और लंबर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कई बेहतर रियायतें देने की पेशकश की थी। इस बार अमेरिका ने 1930 के दौर के टैरिफ कानून की सेक्शन 338 का सहारा लिया है। यह विशिष्ट कानूनी प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को उन विदेशी देशों के उत्पादों पर 50% तक भारी भरकम टैरिफ थोपने की विशेष शक्ति देता है, जिन पर अमेरिकी कारोबार के साथ भेदभाव करने का शक या आरोप हो। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी इतिहास में इस प्रावधान का इस्तेमाल इस तरह से टैरिफ थोपने के लिए पहले कभी नहीं किया गया था।

सवाल-जवाब

अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ विवाद क्यों बढ़ा है?
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए शुल्कों और बातचीत के अंतिम दौर में अमेरिका द्वारा कुछ सख्त शर्तें रखे जाने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने क्या जवाबी कदम उठाने की घोषणा की है?
मार्क कार्नी ने ऐलान किया है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों पर डॉलर-फॉर-डॉलर टैरिफ लगाएगा, जिसे 8 सितंबर से प्रभावी किया जाएगा।
कनाडा के जवाबी टैरिफ का असर किन क्षेत्रों पर पड़ेगा?
इन नए शुल्कों का असर स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि मशीनरी, पल्प और पेपर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर पड़ेगा।
अमेरिका ऊर्जा के मामले में कनाडा पर कितना निर्भर है?
अमेरिका अपनी कुल प्राकृतिक गैस का लगभग 99%, बिजली का लगभग 85% और कच्चे तेल का करीब 60% हिस्सा कनाडा से आयात करता है।
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टिप्पणियाँ 2

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·14 मिनट पहले

यह टैरिफ संघर्ष अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार है, क्योंकि वाशिंगटन अपनी प्राकृतिक गैस और बिजली की भारी जरूरतों के लिए कनाडा पर अत्यधिक निर्भर है। यदि 8 सितंबर से लेबर डे के बाद ये जवाबी शुल्क लागू होते हैं, तो स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम अमेरिकी उद्योगों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित होगी।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·14 मिनट पहले

कार्लोस मेंडोज़ा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यदि यह व्यापारिक गतिरोध लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर उत्तर अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण पर पड़ेगा। अमेरिका की 99 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति सीधे तौर पर जुड़ी होने के कारण, वाशिंगटन के पास लंबी अवधि में इस दबाव को झेलने की सीमित गुंजाइश होगी। 8 सितंबर से प्रभावी होने वाले ये डॉलर-फॉर-डॉलर टैरिफ अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र के लिए उत्पादन लागत बढ़ाएंगे और आगामी तिमाहियों में मुद्रास्फीति के मोर्चे पर गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।

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