बांग्लादेश में खसरे के भयावह प्रकोप के बीच अब कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। ढाका की एक अदालत में पूर्व अंतरिम सरकार प्रमुख मुहम्मद यूनुस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें उन पर आपराधिक लापरवाही का आरोप लगाया गया है। यह शिकायत सीधे तौर पर उस खसरे के प्रकोप से जुड़ी है जिसमें अब तक 738 लोगों की मौत हो चुकी है। अदालत के अधिकारियों के मुताबिक जज 12 जुलाई को यह फैसला करेंगे कि शिकायत को स्वीकार किया जाए या नहीं। अगर शिकायत स्वीकार होती है तो इससे आपराधिक कार्यवाही का रास्ता खुल सकता है।
एक पिता की शिकायत, जिसने खोई नौ महीने की बेटी
यह शिकायत सिराजुल इस्लाम ने दायर की है, जिसे ढाका की अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट जशिता इस्लाम ने दर्ज किया। सिराजुल इस्लाम एक नौ महीने की बच्ची के पिता हैं। आरोप है कि टीके की किल्लत के दौरान बच्ची को टीका नहीं लग पाया और इसी वजह से उसकी मौत हो गई। इसके बाद ऑक्सीजन की कमी के चलते बच्ची को सही इलाज भी नहीं मिल सका। शिकायत में इस मौत को ढाका के एक सरकारी अस्पताल में आपूर्ति की कमी से जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि पहले टीकाकरण में चूक हुई और फिर इलाज तक पहुंच सीमित रह गई। यह शिकायत रविवार को मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज की गई।
यूनुस के साथ और कौन-कौन आरोपी
शिकायत में मुहम्मद यूनुस पर कर्तव्य में लापरवाही, कानून के उल्लंघन और लापरवाही से हुई मौतों का आरोप है। इसमें उसी अंतरिम प्रशासन के कई अन्य लोगों को भी सह-आरोपी बनाया गया है। इनमें स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम और प्रेस सचिव शफीकुल आलम शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व महानिदेशक मोहम्मद अबू जफर का नाम भी सूची में है। सिराजुल इस्लाम की वकील तसलीमा जहां ने अदालती कार्रवाई के बाद इसका ब्योरा साझा किया।
दशकों का सबसे बुरा प्रकोप
यह कानूनी कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब बांग्लादेश दशकों के अपने सबसे बुरे खसरा प्रकोप से जूझ रहा है। रविवार सुबह तक के 24 घंटों में सात और मौतें दर्ज की गईं। इसके साथ 15 मार्च से अब तक खसरे से जुड़ी पुष्ट और संदिग्ध मौतों का कुल आंकड़ा 738 पर पहुंच गया। अधिकारी पुष्ट और संदिग्ध दोनों तरह की मौतों को इस गिनती में रख रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देशभर में खसरे के 1,18,250 पुष्ट और संदिग्ध मामले सामने आए हैं। हालांकि जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव और बढ़ा दिया है और नियमित टीकाकरण की पहुंच तथा आपूर्ति योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूनिसेफ ने पहले ही दी थी चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ ने मई में कहा था कि उसने अंतरिम सरकार को कम से कम 10 बार आगाह किया था। एजेंसी ने टीके की खरीद को प्रभावित करने वाली प्रक्रियागत देरी की ओर इशारा किया और इसे बड़े प्रकोप के खतरे से जोड़ा। उस दौरान अंतरिम सरकार ने टीके खरीदने का तरीका बदल दिया था।
"अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के जरिए टीके की खरीद रोक दी और खुली निविदा प्रणाली अपना ली। हमने 2024 से सरकार के साथ कम से कम 10 बैठकों में टीके की किल्लत पर चिंता जताई, साथ ही पांच से छह औपचारिक पत्र भी भेजे," ढाका में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने दो महीने पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा।
राणा फ्लावर्स ने कहा कि नियमित टीकाकरण लंबे समय तक बाधित रहा और इसी वजह से कई बच्चे टीके के दायरे से बाहर रह गए। उन्होंने साफ किया कि यह किल्लत पैसे की कमी की वजह से नहीं थी, बल्कि खरीद की प्रक्रिया में हुई देरी इसके पीछे असली कारण थी।
अब 12 जुलाई पर टिकी निगाहें
जज का 12 जुलाई का फैसला तय करेगा कि यह शिकायत आगे बढ़ेगी या नहीं। आरोपों में टीके और अस्पताल की आपूर्ति की कमी को एक बच्ची की मौत से जोड़ा गया है। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य आंकड़े 15 मार्च से खसरे के बढ़ते कहर को दिखा रहे हैं। अधिकारी और एजेंसियां अब खरीद में देरी और टीकाकरण में आई रुकावट पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।













