भरतपुर में खत्म हुई चने की खेती की पुरानी चमक, दाल मिलों पर भी मंडराया संकटराशिफल 31 अगस्त: कल इन 5 राशियों को होगा बंपर फायदा, जानिए क्या कहते हैं आपके तारेएटा में बुखार के इलाज के दौरान बड़ा हादसा, झोलाछाप का इंजेक्शन लगते ही युवक की मौतसमांथा प्रभु का पांच महीनों में ग्यारह किलो बढ़ा वजन, जानिए गर्भावस्था में कितना वजन बढ़ना होता है सामान्यसुबह खाली पेट शहद के साथ लहसुन खाने से दूर होती हैं कई गंभीर बीमारियांअसम के तिंगखोंग में महीनों के आतंक के बाद मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद, ग्रामीणों को मिली राहतबाथरूम में ट्रिमर चार्ज करना पड़ सकता है भारी, जानिए क्यों है यह खतरनाक31 अगस्त 2026 पंचांग: सोमवार को संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी और कजरी तीज का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकालतिलक वर्मा बन सकते हैं 2027 वनडे वर्ल्ड कप का बड़ा हथियार, श्रेयस अय्यर के बैकअप पर विचारदफ्तर के लिए कौन सा बैग है सबसे बढ़िया, टोट, बैकपैक और लैपटॉप बैग में से ऐसे चुनें सही विकल्प
नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ के बाद मृतकों की पहचान का संकट, एयरटाइट बैग और डीएनए से हो रही है तैयारीदुनिया
30 अग॰ 2026, 3:05 pm (43 मिनट पहले)· 2

नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ के बाद मृतकों की पहचान का संकट, एयरटाइट बैग और डीएनए से हो रही है तैयारी

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सात सौ से अधिक शव मिल चुके हैं और मुर्दाघर भरने के कारण अज्ञात शवों को डीएनए नमूने लेकर दफनाया जा रहा है। सरकार लापता लोगों के परिजनों को बाद में अवशेष तलाशने में मदद के लिए विशेष प्रक्रिया अपना रही है।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण भारी तबाही मची है और अब तक सात सौ से ज्यादा लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। खोज और बचाव दल अभी भी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। यह आपदा बुधवार को आई थी, जिसके कारण हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद अब जीवित बचे होने की उम्मीद काफी कम बची है। आने वाले समय में राहत अभियानों के दौरान और अधिक शव मिलने की आशंका जताई जा रही है। देश के मुर्दाघर पहले ही पूरी तरह भर चुके हैं, जिसके कारण मृत शरीरों को सुरक्षित रखना प्रशासन के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए नेपाल ने उन शवों का भी अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। हालांकि प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतिम संस्कार की इस प्रक्रिया के बाद भी भविष्य में इन लोगों की पहचान आसानी से की जा सके।

डीएनए सैंपलिंग और एयरटाइट बैग का इस्तेमाल

प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस बारे में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन मृतकों की पहचान नहीं हो पा रही है, सरकार उनका अंतिम संस्कार कर रही है। इन मृत शरीरों को विशेष एयरटाइट बैग के भीतर रखकर दफनाया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने से पहले डॉक्टरों द्वारा उनके डीएनए सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में जब भी जरूरत पड़े, उनकी सही पहचान स्थापित की जा सके। इसके अलावा शरीर पर मौजूद किसी भी प्रकार के विशिष्ट निशान को भी आधिकारिक तौर पर दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी नोट किया है कि कौन सा शव किस विशिष्ट स्थान से बरामद किया गया था। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि भविष्य में लोगों को अपने बिछड़े हुए परिजनों के पार्थिव अवशेष ढूंढने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। शनिवार दोपहर तक प्रशासन एक सौ से अधिक शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग का काम पूरा कर चुका था, जिन्हें बाद में दफनाया गया।

ये भी पढ़ें

डेडबॉडी को जमीन में दफनाने की खास योजना

इन शवों को जमीन के भीतर डेढ़ मीटर की गहराई पर एयरटाइट बैग में पैक करके इसलिए दफनाया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस दौरान अधिकारी यह विशेष ध्यान रख रहे हैं कि किन्हीं भी दो शवों के बीच कम से कम चालीस सेंटीमीटर की उचित दूरी बनी रहे, जिससे बाद में डीएनए रिपोर्ट मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से बाहर निकाला जा सके। जिस भूखंड पर इन शवों को दफनाया जा रहा है, वहां पर एक स्पष्ट साइनबोर्ड भी लगाया जा रहा है। साथ ही इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी रिकॉर्ड की जा रही है। अब तक जितने भी शव मिले हैं, उनमें से अधिकतम हिस्सेदारी चितवन जिले की है। द हिमालयन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने चितवन में दो सौ तैंतीस शव बरामद किए हैं, लेकिन उनमें से केवल छह की ही अभी तक पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

सड़ते शवों को बचाना और मेडिकल कॉलेजों का सहयोग

मलबे के नीचे दबे होने के कारण शवों में बहुत तेजी से सड़न पैदा हो रही है और मुर्दाघरों में जगह का भारी अभाव है। ऐसी विकट परिस्थितियों में इन शरीरों को सुरक्षित रखने और उनके डीएनए नमूने जुटाने के लिए डॉक्टरों के पास बहुत कम समय बचा है। अधिकारी अब तक एक सौ पैंतीस शवों के डीएनए सैंपल ले चुके हैं। इन अज्ञात शरीरों की शिनाख्त करने के लिए अधिकारी चितवन मेडिकल कॉलेज, कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, भरतपुर अस्पताल के साथ-साथ काठमांडू और पाल्पा के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के साथ लगातार तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं। शवों को खराब होने से बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने घरों को कोल्ट सेंटर में बदल दिया है।

मौतों का आंकड़ा और चीन की अस्थायी झील का खतरा

नेपाल में बुधवार को आई इस विनाशकारी बाढ़ के बाद अब तक कुल सात सौ चौंतीस शवों को बाहर निकाला जा चुका है। इसके बावजूद दो हजार चार सौ अट्ठानवे लोग अब तक लापता बताए जा रहे हैं। राहत कर्मियों ने अब तक साढ़े चार हजार से अधिक लोगों की जान बचाई है। इस बीच प्रशासन ने एक बार फिर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि भोटेकोशी नदी का जलस्तर दोबारा से बढ़ गया है। ऐसे में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में रह रहे आम नागरिकों और राहत कार्य में जुटे कर्मचारियों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है। चीन की सीमा में बनी अस्थायी झील का आकार भी बहुत बड़ा हो चुका है और यदि यह झील टूटती है, तो नेपाल पर पहले से भी अधिक खतरनाक बाढ़ का संकट मंडराने लगेगा।

सवाल-जवाब

नेपाल में बाढ़ के बाद अब तक कितने शव बरामद किए जा चुके हैं?
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद अब तक सात सौ चौंतीस शव बरामद किए जा चुके हैं।
अज्ञात शवों को दफनाने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
अज्ञात शवों को दफनाने से पहले डॉक्टर उनके डीएनए सैंपल ले रहे हैं और उनके विशिष्ट निशानों को दर्ज कर रहे हैं।
शवों को कितनी गहराई में और किस तरह दफनाया जा रहा है?
शवों को जमीन में डेढ़ मीटर नीचे एयरटाइट बैग में भरकर दफनाया जा रहा है और दो शवों के बीच चालीस सेंटीमीटर की दूरी रखी जा रही है।
सबसे अधिक शव किस जिले से बरामद हुए हैं?
अब तक मिले अधिकांश शव चितवन जिले से बरामद किए गए हैं, जहां अधिकारियों ने दो सौ तैंतीस शव खोजे हैं।
नेपाल में कितने लोग अभी भी लापता हैं?
बाढ़ और मलबे के बीच नेपाल में दो हजार चार सौ अट्ठानवे लोग अभी भी लापता हैं।
डीएनए सैंपलिंग में कौन से मेडिकल कॉलेज सहयोग कर रहे हैं?
चितवन मेडिकल कॉलेज, कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, भरतपुर अस्पताल के साथ काठमांडू और पाल्पा के मेडिकल कॉलेज सहयोग कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·12 मिनट पहले

यह आपदा नेपाल के प्रशासनिक तंत्र और बुनियादी ढांचे की गंभीर सीमाओं को उजागर करती है। क्षमता से अधिक भरे मुर्दाघरों के बीच डीएनए प्रोफाइलिंग और एयरटाइट बैग के साथ सुनियोजित दफनाने की यह प्रक्रिया मानवीय गरिमा और वैज्ञानिक फोरेंसिक का एक कड़ा मिश्रण है। भविष्य में इस तरह की चरम मौसमी घटनाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत आपदा प्रतिक्रिया और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे का होना बेहद जरूरी हो गया है, अन्यथा मानवीय और आर्थिक क्षति इसी तरह बढ़ती रहेगी।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·12 मिनट पहले

यह आपदा न केवल बुनियादी ढांचे की सीमाओं को दर्शाती है, बल्कि यह स्पष्ट करती है कि दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन अब सीधे तौर पर मानवीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। जिस तरह से मुर्दाघर भरने के बाद डीएनए प्रोफाइलिंग और वैज्ञानिक तरीकों से दफनाने की मजबूरी सामने आई है, वह भविष्य के नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते क्रॉस-बॉर्डर अर्ली वार्निंग सिस्टम और जलवायु-लचीली अर्थव्यवस्था पर निवेश नहीं बढ़ाया गया, तो ऐसी चरम मौसमी आपदाएं दक्षिण एशिया की आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक व्यवस्था को बार-बार पटरी से उतारती रहेंगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR