पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज़-आचा वास्केज़ ने सोमवार को नई दिल्ली में भारत की जमकर तारीफ करते हुए इसे दुनिया की मौजूदा महाशक्तियों में गिना और आने वाले दशकों के लिए दोनों देशों के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी बनाने की वकालत की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान वास्केज़ ने कहा कि भारत जिस तरह 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था को गढ़ने में अहम भूमिका निभा रहा है, ऐसे मौके पर यहां आना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने भारत से व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि लैटिन अमेरिका और मध्य अमेरिका में कदम रखने के लिए पनामा भारत का सबसे भरोसेमंद प्रवेश द्वार बन सकता है।
'हमारे लिए भारत पहले से ही सुपरपावर'
वास्केज़ ने कहा कि दुनिया के कई विश्लेषक भारत को उभरती हुई ताकत मानते हैं, लेकिन पनामा की नजर में यह तस्वीर पहले से साफ है। उन्होंने कहा
हमारे लिए भारत पहले से ही एक सुपरपावर है।
उनके मुताबिक, पनामा भारत को महज एक बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर नहीं देखता, बल्कि उसे एक ऐसी सभ्यतागत ताकत मानता है जिसकी आवाज़ अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बुलंद होती जा रही है। वास्केज़ का कहना था कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव देखने को मिला है, उसने पनामा समेत कई अन्य देशों को भी अपने भविष्य के लिए बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी यात्रा सिर्फ छह दशक पुरानी दोस्ती की औपचारिकता निभाने भर के लिए नहीं थी, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत और स्थायी साझेदारी की नींव रखने के मकसद से हुई थी, जिसका असर आने वाले दशकों तक दिखेगा।
बैठक के दौरान की तस्वीरें विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुद X पर साझा कीं, जिसमें दोनों नेताओं की बातचीत की झलक दिखी।
'आकार नहीं, दुनिया को जोड़ने की क्षमता है असली ताकत'
पनामा की भौगोलिक अहमियत पर बोलते हुए वास्केज़ ने अपने देश के छोटे आकार को लेकर बनी धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि किसी देश की ताकत उसके क्षेत्रफल से नहीं, बल्कि दुनिया को आपस में जोड़ने की उसकी क्षमता से तय होती है। उन्होंने इसे उदाहरण देकर समझाया कि जिस तरह भारत आज विचारों और नवाचार को आपस में जोड़ने का काम कर रहा है, ठीक उसी तरह पनामा दुनिया भर के बाजारों को आपस में जोड़ता है। उनके मुताबिक पनामा नहर सिर्फ इंजीनियरिंग का एक नमूना भर नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए एक भरोसेमंद और अहम रास्ता है। वास्केज़ ने कहा कि भले ही भारत और पनामा के बीच भौगोलिक दूरी काफी ज्यादा है, लेकिन दोनों देशों की साझा सोच और मूल्य उन्हें करीब लाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देशों की जिम्मेदारी बनती है कि वे दुनिया को दिखाएं कि खुलापन, नवाचार और आपसी सहयोग ही समृद्धि की ओर ले जाने वाला सबसे कारगर रास्ता है।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर
वास्केज़ ने कहा कि भारत को अपनी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रणनीति में पनामा को एक अहम कड़ी के तौर पर शामिल करना चाहिए, क्योंकि लैटिन अमेरिका और मध्य अमेरिका के बाजारों तक पहुंचने के लिए पनामा से बेहतर कोई और प्रवेश द्वार नहीं है। आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिए उन्होंने भारत और पनामा के बीच एक हाई-लेवल ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट वर्किंग ग्रुप बनाने का सुझाव रखा। उन्होंने बताया कि पनामा में विदेशी निवेश को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा पहले से मौजूद है, और उनका देश चाहता है कि भारत की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां वहां निवेश के लिए आगे आएं। उन्होंने उन क्षेत्रों की सूची भी गिनाई जहां दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं, जिनमें फार्मा, मेडिकल सर्विसेज, सेमीकंडक्टर, AI, डेटा सेंटर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और क्षेत्रीय वितरण केंद्र शामिल हैं। उनका कहना था कि भारत दुनिया के लिए उत्पादन करता है, जबकि पनामा दुनिया को आपस में जोड़ने का काम करता है, और यही वजह है कि लैटिन अमेरिका में अपना कारोबार फैलाने की योजना बना रही भारतीय कंपनियों के लिए पनामा से बेहतर क्षेत्रीय ठिकाना और कोई नहीं हो सकता।
आगे क्या बदलेगा?
वास्केज़ के इस प्रस्ताव को भारत-पनामा संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अगर हाई-लेवल ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट वर्किंग ग्रुप बनकर आगे बढ़ता है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को संस्थागत रूप मिल सकेगा। पनामा नहर के जरिए वैश्विक व्यापार में पहले से मजबूत पकड़ रखने वाला यह देश अब भारत को अपने यहां फार्मा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों की दिशा तय कर सकता है।



















