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फरीदाबाद में सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 21 साल की बेटी के अंगों ने दी कई लोगों को नई जिंदगीहरियाणा
25 अग॰ 2026, 10:12 am (1 घंटे पहले)· 2

फरीदाबाद में सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 21 साल की बेटी के अंगों ने दी कई लोगों को नई जिंदगी

फरीदाबाद में एक सड़क हादसे में 21 साल की युवती की जान चली गई, लेकिन उसके शोकसंतप्त परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लेकर कई मरीजों को नया जीवनदान दिया।

फरीदाबाद में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे का शिकार बनी इक्कीस साल की युवती का जीवन भले ही समय से पहले थम गया, लेकिन उसके परिजनों के एक बड़े और संवेदनशील निर्णय ने कई अन्य गंभीर मरीजों के लिए नई उम्मीदों के दरवाजे खोल दिए हैं। बेटी के असमय निधन के गहरे सदमे और दुख के बीच भी इस परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उसके अंगों को दान करने की सहमति दी, जिससे जरूरतमंदों को जीवन का एक और मौका मिल सका। इस पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों के साथ-साथ जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे ने आपसी तालमेल का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

गंभीर हालत में अस्पताल लाई गई थी युवती

अमृता अस्पताल फरीदाबाद के न्यूरोक्रिटिकल केयर एवं न्यूरोएनेस्थीसिया विभाग के हेड डॉ. गौरव कक्कड़ ने पूरी जानकारी साझा करते हुए बताया कि बीती 20 अगस्त की देर रात युवती को बेहद नाजुक हालत में चिकित्सा केंद्र लाया गया था। सड़क पर हुए एक भीषण हादसे में उसके सिर पर अत्यंत गंभीर चोटें आई थीं। उसे तुरंत न्यूरो आईसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में इलाज शुरू किया गया, परंतु सिर की चोटें इतनी गहरी थीं कि तमाम मेडिकल कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। सभी चिकित्सीय और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

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अंगदान का कठिन लेकिन सराहनीय निर्णय

डॉ. गौरव कक्कड़ के अनुसार, किसी भी माता-पिता के लिए अपनी इक्कीस साल की जवान बेटी को खोना सबसे बड़ा आघात होता है और उस पल परिवार मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था। इसके बावजूद, जब डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेथ और अंगदान की संभावना के बारे में समझाया, तो उन्होंने तमाम दुखों को दरकिनार करते हुए देश और समाज हित में अंगदान का मजबूत फैसला लिया। उनके इसी त्याग और संवेदनशीलता की वजह से कई ऐसे मरीजों के जीवन की रक्षा संभव हो पाई जो लंबे समय से अंगों की कमी से जूझ रहे थे।

लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया किए गए दान

डॉ. गौरव कक्कड़ ने बताया कि युवती के शरीर से लिवर, दोनों किडनियां और कॉर्निया पूरी चिकित्सकीय सावधानी के साथ सुरक्षित रूप से अलग किए गए। इसके बाद निर्धारित सरकारी प्रोटोकॉल और अंग आवंटन की तय प्रक्रिया के तहत इन सभी अंगों को जरूरतमंद मरीजों के लिए संबंधित केंद्रों पर रवाना किया गया। इनमें से एक किडनी का सफल प्रत्यारोपण फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में ही भर्ती एक मरीज के शरीर में किया गया, जबकि बाकी अंगों को दूसरे तयशुदा ट्रांसप्लांट सेंटर्स पर भेजा गया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में एक-एक मिनट कीमती होता है और अंगों को तय समय सीमा के भीतर पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

मेडिकल और कानूनी प्रक्रियाओं का समन्वय

चूंकि यह मामला मेडिको लीगल प्रकृति का था, इसलिए अस्पताल के डॉक्टरों के सामने पोस्टमार्टम, कानूनी अनुमतियों और अंगदान से जुड़ी जटिल मेडिकल प्रक्रियाओं को एक साथ और कम से कम समय में पूरा करने की चुनौती थी। इस मोर्चे पर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस टीमों ने आपसी समन्वय बनाए रखते हुए अस्पताल को पूरा सहयोग दिया। डॉ. गौरव कक्कड़ का कहना है कि सभी विभागों की सक्रियता और समय पर मिले प्रशासनिक सहयोग के कारण ही इस पूरी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनावश्यक रुकावट या देरी नहीं आई।

हरियाणा और दिल्ली पुलिस द्वारा बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

अंगों को समय पर उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने मिलकर एक अंतरराज्यीय ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। दोनों राज्यों के पुलिस कर्मियों और यातायात नियंत्रण टीमों ने रूट पर विशेष प्रबंध किए ताकि एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के सरपट दौड़ सके। कम से कम समय में अंगों को संबंधित ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाने में इस अंतरराज्यीय पुलिस सहयोग ने अहम भूमिका निभाई।

प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों की संयुक्त भूमिका

इस पूरी जटिल और समय-बद्ध प्रक्रिया को सिरे चढ़ाने में फरीदाबाद के जिला प्रशासन, उपायुक्त कार्यालय, जिला स्वास्थ्य विभाग और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर काम किया। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. श्योकंद, डीसीपी सेंट्रल, खेड़ी पुल थाना पुलिस के साथ-साथ हरियाणा और दिल्ली पुलिस के जवानों ने हर स्तर पर मुस्तैदी दिखाई। मेडिको लीगल अंगदान के मामलों में तय समय सीमा के भीतर औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य होता है, जिसे इन सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों ने मुमकिन कर दिखाया।

अंगदान से मिली मरीजों को नई जिंदगी

डॉ. गौरव कक्कड़ बताते हैं कि चिकित्सा जगत में कई बार तमाम आधुनिक संसाधनों और डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद मरीज को बचाना मुमकिन नहीं हो पाता है। ऐसे अत्यंत कठिन पलों में यदि पीड़ित परिवार अंगदान का उदार फैसला ले, तो वह मरणोपरांत किसी अनजान व्यक्ति को जीवन का नया उपहार दे सकता है। इस शोकसंतप्त परिवार ने अपने व्यक्तिगत गहरे दुख से ऊपर उठकर समाज के बारे में सोचा और उनके इस कदम से कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।

ब्रेन डेथ और अंगदान पर जागरूकता की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में ब्रेन डेथ और अंगदान जैसी जीवनरक्षक अवधारणाओं को लेकर जागरूकता फैलाना बेहद आवश्यक है। देश के भीतर हजारों ऐसे मरीज हैं जो डोनर न मिलने के कारण ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हुए अपनी जिंदगी की जंग हार जाते हैं। यदि परिवार के स्तर पर पहले से ही अंगदान को लेकर खुली चर्चा और सहमति हो, तो ऐसे संकट के समय निर्णय लेना कहीं अधिक आसान हो जाता है। इस तरह की जागरूकता से भविष्य में अनगिनत जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

हादसे में बुझी सांसें, पर अंगों में धड़केगी उम्मीद

भले ही एक सड़क दुर्घटना ने इक्कीस साल की इस युवती की जीवन यात्रा को अचानक समाप्त कर दिया हो, लेकिन उसके परिजनों के साहसी निर्णय ने उसकी कहानी को एक नया आयाम दे दिया है। बेटी के बिछड़ने का यह दर्द उस परिवार के दिलों से कभी नहीं मिटेगा, किंतु उसके अंग आज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जरूरतमंदों के भीतर धड़क रहे हैं और जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं। यह अनूठा कदम मानवीय साहस और करुणा की एक ऐसी मिसाल है जो हमेशा याद रखी जाएगी।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद में किस अस्पताल में अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई?
यह पूरी प्रक्रिया अमृता अस्पताल फरीदाबाद में संपन्न हुई।
युवती के कौन-कौन से अंग दान किए गए थे?
युवती के लिवर, दोनों किडनियां और कॉर्निया दान किए गए।
युवती को अस्पताल कब और किस स्थिति में लाया गया था?
युवती को 20 अगस्त की देर रात सड़क हादसे में सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था।
अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए किसने मदद की?
हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने मिलकर अंतरराज्यीय ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया था।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 मिनट पहले

अपराध और दुर्घटना मामलों की रिपोर्टिंग करते समय अक्सर हमारा ध्यान सिर्फ प्राथमिकी, लापरवाही और मौत के आंकड़ों तक सीमित रह जाता है, लेकिन यह मामला पुलिस, जिला प्रशासन और चिकित्सा महकमे के बीच हुए बेहतरीन प्रशासनिक समन्वय का एक दुर्लभ उदाहरण है। मेडिको-लेगल मामलों में पुलिस और कानूनी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करना अंगदान की सफलता की रीढ़ होता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि यदि कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र मिलकर काम करें, तो एक कानूनी रूप से संवेदनशील दुर्घटना को भी जीवनदान के बड़े अवसर में बदला जा सकता है, जो भविष्य के ऐसे मामलों के लिए एक सकारात्मक प्रशासनिक मॉडल पेश करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·39 मिनट पहले

करन मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि सड़क सुरक्षा और त्वरित प्रशासनिक समन्वय का यह मामला उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े इलाकों के लिए एक मजबूत मिसाल है। जब पुलिस, जिला प्रशासन और अस्पताल ऐसे मेडिको-लेगल मामलों में बिना देरी किए ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्थाओं और कानूनी औपचारिकताओं को संभालते हैं, तभी अंगदान जैसी जटिल प्रक्रियाएं समय सीमा के भीतर संभव हो पाती हैं। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को जीवनदान में बदलने के लिए हर जिले में इस तरह के प्रशासनिक प्रोटोकॉल को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

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