अमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलफीफा अंडर-15 विश्व कप में अफगानिस्तान से हारा भारत, अब कजाकिस्तान से टक्करकक्षा में दांव-पेंच और लंबी उड़ान से चौकन्ना हुआ वॉशिंगटन, ड्रैगन के गुप्त स्पेसप्लेन की पहली स्पष्ट झलक आई सामनेआर्मेनिया की संसद में चुनावी वादे पर भिड़े नेता, लाइव प्रसारण के दौरान चले लात-घूंसे और फटे कपड़ेफर्जी हेल्थ कैंप के बहाने ग्रामीणों के आधार जुटाकर ई-सिम रैकेट चलाने वाले दो जालसाज मथुरा से पकड़े गएचीन के रहस्यमयी स्पेसप्लेन की तस्वीर ने खोली गुप्त अंतरिक्ष अभियानों की पोल, अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट में बड़े खुलासेगुवाहाटी के ओडीआईएन एक्सपीरियंसेज ने जीता पूर्वी भारत के सर्वश्रेष्ठ नाइटक्लब का राष्ट्रीय खिताबभागलपुर के 12वीं के छात्र प्रिंस का पंचक सिलाट में अंतरराष्ट्रीय चयन, 33 देशों के मुकाबले में उतरेंगेउत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा की शहर पर्ची जारी, जानिए तारीखें और डाउनलोड प्रक्रियाऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालत
साल 2050 तक आधुनिक सभ्यता के बिखरने की 49 प्रतिशत आशंका, अमेरिकी रिसर्चर जेरेड डायमंड ने दी चेतावनीदुनिया
25 सित॰ 2026, 1:17 pm (35 दिन पहले)· 0

साल 2050 तक आधुनिक सभ्यता के बिखरने की 49 प्रतिशत आशंका, अमेरिकी रिसर्चर जेरेड डायमंड ने दी चेतावनी

अमेरिकी इतिहासकार जेरेड डायमंड का आकलन है कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के चलते 2050 तक मौजूदा वैश्विक व्यवस्था के ढहने की 49 प्रतिशत संभावना है.

धरती पर मौजूद मानव समाज अगर अपने तौर-तरीके नहीं सुधारता, तो आज से करीब 25 साल बाद दुनिया का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है. शहर, तकनीक और इंसान मौजूद रहने के बावजूद वह सामाजिक व आर्थिक ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है जिसके सहारे आधुनिक दुनिया चल रही है. किसी साइंस-फिक्शन थ्रिलर जैसी लगने वाली यह गंभीर चिंता अमेरिकी इतिहासकार और रिसर्चर जेरेड डायमंड ने सामने रखी है. उन्होंने वर्तमान वैश्विक रुझानों के विश्लेषण के आधार पर आगाह किया है कि साल 2050 तक दुनिया की मौजूदा व्यवस्था के बेहद गंभीर रूप से ध्वस्त होने और सब कुछ खत्म होने की करीब 49 प्रतिशत संभावना है.

एक इंटरव्यू में अपनी राय रखते हुए जेरेड डायमंड ने साफ किया कि उनकी यह टिप्पणी कोई अटल भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों के गहन आकलन से निकली चेतावनी है. उनकी सबसे बड़ी चिंता किसी अचानक छिड़ने वाले परमाणु युद्ध या किसी एक अकेली प्राकृतिक आपदा को लेकर नहीं है. न ही यह कोई विशुद्ध गणितीय गणना है. डायमंड के अनुसार, सबसे बड़ा और बुनियादी खतरा उन आवश्यक संसाधनों से जुड़ा है जिन पर पूरी मानव सभ्यता की नींव टिकी हुई है.

ये भी पढ़ें

प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से बढ़ता संकट

दुनिया भर में संसाधनों के गैर-टिकाऊ उपयोग पर सवाल उठाते हुए डायमंड ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर खेती योग्य जमीन, उपजाऊ मिट्टी, मीठे पानी के जलस्रोत और समुद्री मछलियों के भंडार का उपभोग बेहद अनियंत्रित ढंग से हो रहा है. यदि खपत की यही बेहिसाब रफ्तार बनी रही, तो आगामी दशकों में इन बुनियादी संपदाओं पर बर्दाश्त से बाहर का दबाव पड़ जाएगा.

इस संकट से सीधे तौर पर भोजन और पानी की सुरक्षा का सवाल जुड़ा है. अगर खेतों की उर्वरा शक्ति निरंतर घटती चली गई, पीने योग्य पानी के स्रोत सूखने लगे और महासागरों से मछलियों की तादाद कम हो गई, तो दुनिया की अरबों की आबादी का पेट भरना असंभव हो जाएगा. डायमंड का मानना है कि मौजूदा गैर-टिकाऊ रफ्तार से शायद कुछ दशक और काम चल सकता है, लेकिन 2050 के करीब पहुंचकर यह ढांचा अपनी आखिरी सीमा तक खिंच जाएगा. उस निर्णायक मोड़ पर मानव समाज के सामने केवल दो विकल्प बचेंगे: या तो समय रहते पूरी तरह टिकाऊ जीवनशैली अपनाई जाए, या फिर संकट इतना गहरा हो जाएगा कि सुधार का कोई मौका नहीं मिलेगा.

विनाश से बचने के उपाय और सामूहिक जिम्मेदारी

हालांकि जेरेड डायमंड का मानना है कि भविष्य पूरी तरह निराशाजनक नहीं है और इस आसन्न संकट को टाला भी जा सकता है. इसके समाधान के लिए उन्होंने केवल सरकारों पर निर्भर रहने के बजाय बहुस्तरीय प्रयासों की जरूरत बताई है. व्यक्तिगत स्तर पर आम नागरिक ईंधन की खपत कम करने, निजी गाड़ियों का उपयोग घटाने और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने जैसी आदतें अपना सकते हैं.

इसी तरह औद्योगिक घरानों और कंपनियों को भी अपने उत्पादन मॉडल में बदलाव करना होगा ताकि कच्चे माल व प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके. वहीं सरकारों को जल संरक्षण, कृषि सुधार, स्वच्छ परिवहन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक नीतिगत बदलाव लागू करने होंगे. 2050 भले ही समय के लिहाज से दूर दिखाई दे, लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या इंसान धरती के संसाधनों के पूरी तरह सूखने से पहले अपनी विकासवादी दिशा को बदलने के लिए तैयार होगा. यही वजह है कि डायमंड की 49 प्रतिशत संभावना वाली चेतावनी बेहद गंभीर मानी जा रही है.

सवाल-जवाब

जेरेड डायमंड कौन हैं?
जेरेड डायमंड एक अमेरिकी इतिहासकार और रिसर्चर हैं, जिन्होंने सभ्यताओं और पर्यावरण पर विस्तृत अध्ययन किया है.
डायमंड ने साल 2050 को लेकर क्या चेतावनी दी है?
उनके आकलन के मुताबिक लगभग 49 प्रतिशत संभावना है कि मौजूदा वैश्विक ढांचा 2050 तक बिखर जाएगा और सब खत्म हो सकता है.
इस संकट के पीछे मुख्य कारण क्या बताए गए हैं?
खेती की जमीन, उपजाऊ मिट्टी, मीठे पानी और समुद्री मछलियों के भंडार का अंधाधुंध तथा गैर-टिकाऊ दोहन इसका मुख्य कारण है.
इस संभावित खतरे से बचने के लिए क्या उपाय सुझाए गए हैं?
व्यक्तिगत स्तर पर कम ईंधन उपयोग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कंपनियों द्वारा उत्पादन मॉडल बदलने और सरकारों द्वारा नीतिगत सुधार करने की सलाह दी गई है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·34 दिन पहले

49 प्रतिशत जैसी सटीक संख्या बताना थोड़ा अजीब लगता है। भविष्य का अनुमान लगाना इतना आसान नहीं होता और हर बार तबाही की भविष्यवाणी सच नहीं निकलती।

Sophie Laurent@sophie-laurent·34 दिन पहले

2050 तक सब कुछ बिखर जाएगा, यह बात थोड़ी डराने वाली तो है, पर मुझे लगता है कि इंसान हमेशा आखिरी वक्त पर रास्ता निकाल ही लेता है। तकनीक और नीतियां हर साल बेहतर हो रही हैं, इसलिए इतनी निराशा भी ठीक नहीं।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·34 दिन पहले

सोफी, तुम्हारी यह उम्मीद अच्छी है, पर क्या हम सच में आखिरी वक्त तक इंतजार करके तब सुधार कर पाएंगे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

2050 तक सब कुछ ऐसे ढह जाएगा, यह बात थोड़ी ज़्यादा डरावनी लगती है। तकनीक और नीतियां बदल भी तो रही हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

अर्जुन, डर की बात नहीं है। पिछले साल ही हमारे यहाँ का बोरवेल अचानक सूख गया था, तब समझ आया कि पानी कितनी तेजी से खत्म हो रहा है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp