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साउथ कोरिया: ड्रोन साजिश में पूर्व प्रेसिडेंट यून सुक योल को 30 साल की सजा, मार्शल लॉ का बहाना बनाने का आरोप साबितदुनिया
13 जून 2026, 4:47 am (138 दिन पहले)· 0

साउथ कोरिया: ड्रोन साजिश में पूर्व प्रेसिडेंट यून सुक योल को 30 साल की सजा, मार्शल लॉ का बहाना बनाने का आरोप साबित

सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को नॉर्थ कोरिया पर मिलिट्री ड्रोन उड़ाकर तनाव भड़काने का दोषी मानते हुए 30 साल की जेल सुनाई है, उनके डिफेंस मिनिस्टर किम योंग ह्यून को भी इसी साजिश में सख्त सजा मिली।

साउथ कोरिया की सियासत में एक और बड़ा झटका लगा है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पूर्व प्रेसिडेंट यून सुक योल को 30 साल कैद की सजा सुना दी है। अदालत का मानना है कि उन्होंने अपने पद की ताकत का दुरुपयोग किया और जानबूझकर दुश्मन देश की मदद हुई ऐसे हालात बनाए। उनके साथ-साथ उनके तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर किम योंग ह्यून को भी इसी साजिश का हिस्सा माना गया और उन्हें भी उतनी ही कड़ी सजा दी गई है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रोसिक्यूटर्स ने अप्रैल में ठीक इतनी ही, यानी 30 साल की, सजा की मांग की थी।

आखिर मामला है क्या

पूरा विवाद नॉर्थ कोरिया की सरहद पर भेजे गए मिलिट्री ड्रोन से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि यून सुक योल के निर्देश पर नॉर्थ कोरिया के आसमान में ड्रोन उड़ाए गए, और इसका असली मकसद सीमा पार से दुश्मनी मोल लेना नहीं, बल्कि देश के भीतर मार्शल लॉ थोपने का बहाना तैयार करना था। साल 2024 के आखिरी महीनों में जब यह कदम सामने आया तो साउथ कोरिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति, दोनों हिल गईं।

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नॉर्थ कोरिया ने क्या आरोप लगाए थे

इस घटनाक्रम की शुरुआत अक्टूबर 2024 में हुई थी, जब किम जोंग उन की सरकार ने सियोल पर सीधा निशाना साधा। प्योंगयांग का दावा था कि साउथ कोरिया ने तीन अलग-अलग मौकों पर उसकी राजधानी के ऊपर ड्रोन भेजे, और इन ड्रोन के जरिए सरकार-विरोधी पर्चे गिराए गए। उस वक्त डिफेंस मिनिस्टर किम योंग ह्यून ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, और बाद में रक्षा मंत्रालय ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इस तनातनी ने दोनों देशों को जंग के मुहाने पर ला खड़ा किया था। लेकिन अदालती जांच में जो तस्वीर उभरी, उसने साफ कर दिया कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी।

मार्शल लॉ का असली खेल

कोर्ट के विश्लेषण के मुताबिक यून सुक योल देश में मार्शल लॉ लागू करना चाहते थे। उनकी राजनीतिक पकड़ लगातार कमजोर पड़ रही थी और इसी डूबती साख को बचाने के लिए वह नॉर्थ कोरिया के साथ तनाव को जानबूझकर हवा दे रहे थे, ताकि देश में आपातकाल जैसे हालात पैदा किए जा सकें। हालांकि उनका यह दांव पूरी तरह उलटा पड़ गया। संसद ने उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया, कॉन्स्टीट्यूशनल कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी, और इसके बाद हुए चुनाव में लिबरल नेता ली जे म्युंग जीतकर सत्ता में आ गए।

एक नहीं, कई मुसीबतों में घिरे यून

यह ड्रोन केस यून सुक योल की अकेली परेशानी नहीं है। इससे पहले फरवरी में भी एक बड़े मुकदमे में उन्हें सजा मिल चुकी है, जहां अदालत ने उन्हें देश के खिलाफ विद्रोह का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिलचस्प बात यह है कि सत्ता में आने से पहले वही यून सुक योल कभी साउथ कोरिया के टॉप प्रोसिक्यूटर रह चुके थे। ट्रायल के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनके वकीलों की दलील है कि यह ड्रोन ऑपरेशन दरअसल नॉर्थ कोरिया की ओर से भेजे गए कचरे से भरे बैलूनों का जवाब भर था।

आगे क्या

फिलहाल पूर्व राष्ट्रपति जेल में बंद हैं और उनके पास इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का पूरा हक है। उनके वकीलों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे इस मामले में अपील करेंगे या नहीं, हालांकि पहले के फैसलों के खिलाफ वे पहले ही अपील दायर कर चुके हैं।

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