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दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड गर्मी का कहर, जमीन के अंदर उबलने लगे आलू और 31 लोगों की मौतदुनिया
13 अग॰ 2026, 4:52 pm (65 दिन पहले)· 2

दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड गर्मी का कहर, जमीन के अंदर उबलने लगे आलू और 31 लोगों की मौत

दक्षिण कोरिया में भीषण गर्मी के कारण जमीन के नीचे आलू उबलने और पत्तागोभी के सड़ने से कृषि क्षेत्र तबाह हो गया है। यांगसान में 42.5 डिग्री तापमान के बीच 31 लोगों और 23 लाख से अधिक जानवरों व मछलियों की जान चली गई है।

दक्षिण कोरिया में इस वर्ष पड़ी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने कृषि क्षेत्र को अभूतपूर्व तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। देश के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में जब किसानों ने फसल काटने के लिए जमीन की खुदाई की, तो वे मिट्टी का हाल देखकर सन्न रह गए। खेतों से कच्ची सब्जियों के बजाय पके और बेहद मुलायम आलू निकल रहे हैं। अत्यधिक तापमान के कारण जमीन के भीतर का तापमान इतना बढ़ गया कि आलू की फसल ऐसे झुलस गई जैसे उसे पानी में उबाल दिया गया हो। इन खराब हो चुके आलुओं को बाजार में बेचना असंभव हो गया है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस आपदा का व्यापक असर कृषि अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और आने वाले हफ्तों में दैनिक खाद्य सामग्रियों की कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है। सबसे भीषण नुकसान उत्तर-पूर्वी गंगवोन प्रांत से सामने आया है, जहां कुछ ही दिनों पहले तक लहलहाती फसलें अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।

कृषि अर्थव्यवस्था पर करारा प्रहार और चुसोक त्योहार पर संकट

गंगवोन प्रांत के यांगगु काउंटी में पिछले 40 सालों से खेती कर रहे किसान ली सांग-ह्योक का कहना है कि अपने चार दशकों के अनुभव में उन्होंने ऐसा विनाशकारी मौसम कभी नहीं देखा। उन्होंने बताया कि खुदाई से पहले खेत पूरी तरह सामान्य दिखाई दे रहे थे, लेकिन जमीन के नीचे का नजारा भयावह निकला। गर्मी की इस मार से केवल आलू ही नहीं बल्कि पत्तागोभी की फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो गई है। गंगवोन क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर उगाई जाने वाली पत्तागोभी खेतों में ही झुलसकर गल गई। कुछ किसानों ने बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में फसल की कटाई को कुछ दिनों के लिए रोक दिया था, लेकिन तीखी धूप और अत्यधिक गर्मी ने खेतों में खड़ी पत्तागोभी को सुखा दिया। अंततः किसानों को इस बर्बाद फसल को मिट्टी में ही जोतकर मिलाना पड़ा, जिससे उन्हें भारी वित्तीय चपत लगी है।

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इसके अलावा फलदार बागानों में भी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। तीखी धूप के कारण सेब खेतों में ही झुलस रहे हैं जबकि आड़ू पकने से पहले ही फटने लगे हैं। किसानों ने बताया कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मनाए जाने वाले पारंपरिक चुसोक त्योहार के समय आपूर्ति के लिए तैयार हो रहे सेब की पैदावार और विकास अत्यधिक तापमान की वजह से रुक गया है। चुसोक दक्षिण कोरिया का एक प्रमुख त्योहार है, जिसमें फलों और सब्जियों की भारी मांग रहती है। त्योहार से ठीक पहले फसलों के इस तरह नष्ट होने से बाजारों में आपूर्ति का बड़ा संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

1904 के बाद का सबसे गर्म दिन और जान-माल की भारी तबाही

मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते 2 अगस्त को दक्षिण-पूर्वी शहर यांगसान में पारा 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह तापमान वर्ष 1904 में दक्षिण कोरिया में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। इस बेकाबू गर्मी ने न केवल फसलों को झुलसाया है, बल्कि इंसानों और मवेशियों की जान पर भी बन आई है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर में कम से कम 31 लोगों की मौत भीषण गर्मी और लू लगने के कारण हो चुकी है। इसके साथ ही पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंची है। अब तक लगभग 9 लाख मवेशियों और पालतू पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि व्यावसायिक पोखरों में पाली जा रही 14 लाख से अधिक मछलियां भी गर्मी के कारण दम तोड़ चुकी हैं।

सरकारी निर्देश और कृषि प्रणाली में बदलाव की जरूरत

भीषण गर्मी के संकट को देखते हुए सरकार ने आम नागरिकों को दिन के सबसे गर्म घंटों के दौरान घरों के भीतर रहने और शारीरिक मेहनत वाले कार्यों से बचने की सलाह जारी की है। हालांकि खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए इस निर्देश का पालन करना बेहद कठिन साबित हो रहा है। किसानों का तर्क है कि यदि वे दोपहर में खेतों की देखभाल नहीं करेंगे या बची हुई फसल को बचाने का प्रयास छोड़ देंगे, तो रही-सही फसल भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। इस विकट परिस्थिति पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने बयान जारी करते हुए मौजूदा मौसम को असामान्य और असाधारण करार दिया है। उन्होंने देश की मौजूदा आपदा प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव और सुधार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है।

फिलहाल सरकारी एजेंसियां और कृषि विशेषज्ञ देश भर में हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटे हुए हैं। किसानों को डर सता रहा है कि चुसोक त्योहार से पहले हरी सब्जियों और ताजे फलों की किल्लत से खाद्य मुद्रास्फीति में भारी उछाल आ सकता है। वहीं जलवायु वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते वैश्विक मौसम को देखते हुए दक्षिण कोरिया को अब पारंपरिक खेती के तरीकों को बदलना होगा। देश को अब ऐसी नई फसल किस्मों के अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा जो अत्यधिक तापमान और लू को सहन कर सकें, साथ ही आधुनिक तकनीकों के आधार पर टिकाऊ खेती के नए मॉडल तैयार करने होंगे।

सवाल-जवाब

दक्षिण कोरिया में आलू और सब्जियों की फसलें क्यों खराब हुईं?
दक्षिण कोरिया में 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचे रिकॉर्ड तापमान के कारण जमीन के अंदर गर्मी इतनी बढ़ गई कि आलू उबलने लगे और पत्तागोभी खेतों में ही सड़ गई।
यांगसान शहर में तापमान का क्या रिकॉर्ड बना?
2 अगस्त को यांगसान शहर में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो वर्ष 1904 में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक का उच्चतम तापमान है।
इस गर्मी का इंसानों और जानवरों पर क्या असर पड़ा है?
भीषण गर्मी के कारण कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि लगभग 9 लाख मवेशी और 14 लाख से अधिक मछलियां मर चुकी हैं।
चुसोक त्योहार पर इस आपदा का क्या प्रभाव पड़ सकता है?
सितंबर के अंत में आने वाले चुसोक त्योहार से ठीक पहले सेब, आड़ू और सब्जियों के नष्ट होने से बाजार में कमी आ सकती है और खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने इस स्थिति पर क्या कहा?
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने मौसम की स्थिति को असाधारण बताते हुए देश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव और सुधार की जरूरत जताई।
विशेषज्ञ इस कृषि संकट का क्या समाधान बता रहे हैं?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के बीच देश को गर्मी सहने वाली नई फसल किस्मों और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाना होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·65 दिन पहले

दक्षिण कोरिया में 42.5 डिग्री का यह तापमान और इसके कारण कृषि व पशुधन को हुई भारी क्षति केवल एक मौसमी आपदा नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आने वाले समय में महंगाई और त्योहारों पर आपूर्ति संकट से निपटने के लिए सरकारों को जलवायु अनुकूल नीतियों और कृषि राहत पैकेजों पर तत्काल काम करना होगा।

Sophie Laurent@sophie-laurent·65 दिन पहले

दक्षिण कोरिया की यह जलवायु आपदा केवल एशियाई महाद्वीप तक सीमित संकट नहीं है, बल्कि यह यूरोप के कृषि बाजारों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, यूरोपीय संघ को भी अपनी खाद्य सुरक्षा नीतियों और भू-राजनीतिक रणनीतियों में तत्काल बदलाव करने होंगे, अन्यथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में ऐसे व्यवधान यूरोप में भी महंगाई और खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट पैदा कर सकते हैं।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·65 दिन पहले

यह आपदा केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशियाई देशों और पाकिस्तान जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्रों के लिए भी एक गंभीर सबक है जो लगातार जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम का सामना कर रहे हैं। जिस तरह तापमान बढ़ने से फसलों को सीधे तौर पर नुकसान पहुँच रहा है और खाद्य सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है, यदि समय रहते दक्षिण एशिया और वैश्विक स्तर पर मजबूत नीतियां और जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकें नहीं अपनाई गईं, तो आने वाले दिनों में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा जाएगी और आम जनता को आसमान छूती महंगाई का सामना करना पड़ेगा।

Li Wei@li-wei·65 दिन पहले

दक्षिण कोरिया में 42.5 डिग्री का यह तापमान और भूमिगत फसलों का इस तरह उबलना जलवायु परिवर्तन के कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराते गंभीर खतरे का स्पष्ट प्रमाण है। जिस तरह से उत्पादन ठप हुआ है और लाखों पशु-मछलियां मारी गई हैं, उससे आगामी महीनों में क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित होगी और खाद्य महंगाई में तेजी आना तय है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·65 दिन पहले

यह आपदा सिर्फ दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा और दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी एक बड़ा सबक है। जब तापमान इस स्तर पर पहुंचता है, तो आपूर्ति श्रृंखला के टूटने से आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई और भुखमरी का संकट तेजी से उभर सकता है। सरकारों को अब पारंपरिक कृषि नीतियों से आगे बढ़कर जलवायु-अनुकूलन और रणनीतिक खाद्य भंडारों पर ध्यान देना होगा, अन्यथा आने वाले समय में हर देश इस तरह के कृषि पतन का शिकार बन सकता है।

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